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वाराणसी का मणिकर्णिका घाट विवादों में क्यों है?

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर कांग्रेस, सपा और आप ने BJP सरकार पर आस्था और विरासत से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है

reconstruction and development work of Manikarnika Ghat (Photo - Screengrab)
मणिकर्णिका घाट (दाएं) के मलबे में दिखी मूर्ति (बाएं)
अपडेटेड 18 जनवरी , 2026

काशी का मणिकर्णिका घाट केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है. यह हिंदू आस्था, मृत्यु दर्शन, परंपरा और इतिहास का जीवंत केंद्र है. जनवरी 2026 में मणिकर्णिका घाट पर चल रहे रेनोवेशन और पुनर्विकास कार्य के दौरान कुछ मूर्तियों और कलाकृतियों के हटाए जाने तथा मलबे में दिखाई देने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. 

इन वीडियो में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी मूर्तियों और चबूतरों को लेकर आरोप लगाए गए कि उन्हें तोड़ा गया या अपमानित किया गया है. इसके बाद वाराणसी से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक सियासत गरमा गई.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

10 जनवरी से मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास का काम दोबारा शुरू हुआ. इससे पहले बाढ़ के कारण यह परियोजना करीब डेढ़ साल तक ठप रही थी. 13 जनवरी को घाट की सीढ़ियों और एक पुराने चबूतरे को हटाने के दौरान कुछ मूर्तियां और कलाकृतियां मलबे में नजर आईं. इन्हीं तस्वीरों और वीडियो ने विवाद को जन्म दिया. स्थानीय पाल समाज के लोगों ने सबसे पहले विरोध दर्ज कराया. 14 जनवरी को घाट पर प्रदर्शन हुआ. आरोप लगाया गया कि देवी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों को तोड़ा गया है. 

कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया और 16 जनवरी को पार्टी की शहर इकाई ने जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की. कांग्रेस का आरोप है कि विकास के नाम पर वाराणसी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा रहा है. पार्टी के शहर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के दौरान भी कई पुराने मंदिर और धार्मिक स्थल ध्वस्त किए गए और अब वही मॉडल मणिकर्णिका घाट पर अपनाया जा रहा है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मणिकर्णिका घाट देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाया गया था और इससे उनकी स्मृतियां जुड़ी हैं. ऐसे में मूर्तियों और चबूतरों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ आस्था पर सीधा हमला है. पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर पारदर्शी जांच नहीं हुई तो भूख हड़ताल समेत आंदोलन तेज किया जाएगा. 

समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आई. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अविनाशी काशी ही BJP के विनाश का कारण बनेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP पैसे कमाने के लिए काशी की विरासत से खिलवाड़ कर रही है. 

प्रियंका गांधी ने भी एक्स पर लिखा कि धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है और काशी की सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने की साजिश तुरंत बंद होनी चाहिए. आम आदमी पार्टी ने भी मामले को राजनीतिक रंग दिया. पार्टी सांसद संजय सिंह ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे काम की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि यह महमूद गजनवी का शासन नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी का शासन है, जहां प्राचीन मंदिरों को तोड़ा जा रहा है. AAP ने 20 जनवरी को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की.

अहिल्याबाई होल्कर और भावनात्मक पहलू

मणिकर्णिका घाट का विवाद इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसका सीधा संबंध इंदौर की महारानी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ता है. मणिकर्णिका घाट का निर्माण 1771 में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था और 1791 में उन्होंने ही इसका जीर्णोद्धार कराया. घाट की मढ़ी के चारों ओर उनकी चार मूर्तियां स्थापित थीं. महारानी अहिल्याबाई ट्रस्ट और इंदौर राजपरिवार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई. ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर गुरुधाम मंदिर पहुंचे और मूर्तियों के सामने क्षमा याचना और शुद्धि पूजन किया. उनका कहना है कि मणिकर्णिका घाट की मूर्तियों का पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व है और बिना ट्रस्ट की सहमति कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता. 

ट्रस्ट का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मणिकर्णिका घाट के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी उन्हीं की है. उनका कहना है कि नई डिजाइन और नया स्वरूप ट्रस्ट की सहमति के बिना स्वीकार्य नहीं होगा. BJP ने पिछले वर्ष अहिल्याबाई होल्कर की 300 जन्मतिथि देश भर में बड़े धूमधाम से मनाई थी. इस भगवा खेमे का ओबीसी वोटबैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा गया था. 

जिला प्रशासन का पक्ष

जिला प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर या मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. खुदाई और तोड़फोड़ के दौरान जो मूर्तियां और कलाकृतियां मिलीं, उन्हें संरक्षित करने के उद्देश्य से यूपी संस्कृति विभाग के हवाले कर दिया गया है. डीएम के मुताबिक, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सभी मूर्तियों और कलाकृतियों को उनके मूल स्थान पर फिर से स्थापित किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो AI के जरिए गलत तरीके से बनाए गए हैं और ऐसे लोगों को ट्रेस किया जा रहा है जो भ्रम फैला रहे हैं. 

प्रशासन का तर्क है कि मणिकर्णिका घाट पर प्राचीन काल से बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं. बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और प्रदूषण को देखते हुए घाट का पुनर्विकास जरूरी हो गया था. इस परियोजना का उद्देश्य आस्था को चोट पहुंचाना नहीं बल्कि सुविधाओं को बेहतर बनाना है.

डोम राजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी ने भी मूर्ति तोड़े जाने के आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि घाट पर 24 घंटे उनकी मौजूदगी रहती है और कोई भी मूर्ति नहीं तोड़ी गई है. उनके अनुसार, मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण की मांग खुद उनके चाचा ने की थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी रहे हैं. हालांकि घाट के आसपास रहने वाले कुछ लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है. लकड़ी का व्यापार, पंडों की व्यवस्था और परंपरागत ढांचे में बदलाव को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं.

पुनर्विकास योजना क्या है

मणिकर्णिका घाट पर करीब 18 से 25 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास परियोजना चल रही है. यह राशि पूरी तरह रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड से खर्च की जा रही है. सरकार का कहना है कि इसमें सरकारी खजाने से एक भी पैसा नहीं लगाया जा रहा. योजना के तहत घाट पर 32 से 38 श्मशान प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे. प्रदूषण कम करने के लिए अत्याधुनिक चिमनियां लगाई जाएंगी. दो सामुदायिक शौचालय, एक पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, प्रतीक्षालय और हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा. पर्यटकों के लिए अलग विजिटर पाथ भी प्रस्तावित है ताकि दाह संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित न हो. 

प्रशासन का दावा है कि इससे स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी और गंगा में प्रदूषण कम होगा. रूपा फाउंडेशन की ओर से इस संस्था को जून, 2026 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है. इस साइट पर सामान ले लाने के लिए गंगा पार चेकर्ड प्लेट बिछाने का काम, जेट्टी का निर्माण शुरू हो गया है ताकि क्रूज का आवागमन आसानी से हो सके. सामान ढुलाई के लिए कोलकाता से ही रूपा फाउंडेशन की ओर से क्रूज उपलब्ध कराया गया है. घाट के एक भाग पर बैरिकेडिंग किया गया है. मिट्टी समतलीकरण के बाद अगले सप्ताह से पाइलिंग प्रारंभ होने की बात है. पहले इस कार्य को कार्यदायी एजेंसी बीआइपीएल (ब्रिजटेक इंफ्राविज़न प्राइवेट लिमिटेड) को करना था लेकिन हाल ही में इस संस्था ने कार्य करने से मना कर दिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात जुलाई, 2023 को महाश्मशान मणिकर्णिका का शिलान्यास किया था.

मणिकर्णिका घाट का विवाद अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है. यह BJP सरकार के विकास मॉडल बनाम विपक्ष की सांस्कृतिक संरक्षण की राजनीति का प्रतीक बन गया है. विपक्ष इसे आस्था पर हमला बता रहा है, जबकि सरकार इसे सुविधा और पर्यावरण से जोड़कर देख रही है. सवाल यह भी है कि क्या विकास और विरासत साथ-साथ चल सकते हैं. काशी जैसे शहर में जहां हर पत्थर इतिहास की गवाही देता है, वहां किसी भी तरह का निर्माण बेहद संवेदनशील हो जाता है.

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