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BJP झारखंड के नगर निकाय चुनाव EVM से कराना क्यों चाहती है?

BJP झारखंड के नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर भी कराने की मांग कर रही है

BJP
BJP को डर है कि अगर चुनाव दलीय आधार पर नहीं हुए तो कई जगह उसे भितरघात का सामना करना पड़ सकता है
अपडेटेड 7 जनवरी , 2026

झारखंड में सात साल के बाद नगर निकाय चुनाव होने जा रहे हैं.  रांची सहित कुल 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत का चुनाव होना है. राज्यभर में संभावित प्रत्याशियों ने अपने पोस्टर–बैनर लगाना शुरू कर दिया है. इन सबके बीच BJP ने मांग की है कि यह चुनाव दलीय आधार पर हो और वोटिंग के लिए EVM इस्तेमाल की जाएं. 

पार्टी इस मांग को लेकर राज्य भर के जिला मुख्यालयों में धरना, प्रदर्शन कर रही है. पिछला चुनाव यानी साल 2019 में हुए नगर निगमों के चुनाव में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव दलीय आधार पर हुआ था. जबकि वार्ड सदस्यों का चुनाव गैर दलीय आधार पर हुआ था. 

BJP को इस बात का डर है कि अगर दलीय आधार पर चुनाव नहीं हुए तो हरेक सीट पर पार्टी के अंदर से ही कई प्रत्याशी खड़े हो जाएंगे. ऐसे में उसका वोट बिखर जाएगा. बदली राजनीतिक परिस्थिति में वह इस मार को झेलने के लिए शायद ही तैयार हो. इन हालात में BJP यह भी तय नहीं कर पाएगी कि बगावती कौन है और वह उन पर कोई कार्रवाई भी नहीं कर पाएगी. दरअसल विभिन्न सीटों पर पार्टी के बड़े नेताओं के करीबी और संभावित प्रत्याशियों को अधिक डर है कि अगर दलीय आधार पर चुनाव नहीं हुए तो उन्हें इसका ज्यादा नुकसान उठाना होगा. 

BJP के राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा कहते हैं, "हमारी तीन मांग है. पहली कि राज्य सरकार जल्द से जल्द चुनाव की तारीख घोषित करे. दूसरी मांग है कि चुनाव EVM से हो, क्योंकि लाखों की संख्या में लोग मतदान करेंगे, बैलेट पेपर से गिनती होने में ही चार से पांच दिन लग जाते हैं. ऐसे में कई बार मतगणना कर्मियों के लिए अमानवीय स्थिति पैदा हो जाती है. इनके अलावा हम चाहते हैं कि चुनाव दलीय आधार पर हों, क्योंकि जब ऐसा नहीं होता तो बाहुबल और धनबल वाले ऐसे प्रत्याशी जिनका जनता से कोई खास सरोकार नहीं होता, उनके चुनाव जीतने की संभावना अधिक होती है. धन के अभाव में चाहे किसी भी दल के समर्पित कार्यकर्ता हों, वे पीछे हटने को मजबूर हो जाते हैं. इससे आम लोगों को, नगर निकायों को नुकसान है.’’  

हालांकि, इस तीसरी मांग को लेकर पार्टी के अंदर ही कई तरह की राय हैं. पार्टी की सरायकेला खरसांवा की कार्यकर्ता अनीशा सिन्हा कहती हैं, "नगर निकाय चुनाव को दलगत आधार पर कराने की हड़बड़ी दरअसल यह स्वीकारोक्ति है कि पार्टी को अपने ही कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं रहा.” 

इधर सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने BJP की मांग का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यहां EVM का खेला नहीं चलेगा. JMM महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने एक घटना का जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘’पिछली बार यानी साल 2019 में जब EVM से चुनाव हुए थे तब शुरूआती तीन राउंड तक JMM समर्थित उम्मीदवाद तीन राउंड तक बढ़त बनाए हुए थे. अचानक काउंटिंग रोक दी गई. फिर तीन घंटे बाद घोषणा कर दी गई कि BJP के उम्मीदवार जीत गए. हालांकि कितने वोटों से जीते, इसकी घोषणा चार दिन बाद हुई थी.’’  

भट्टाचार्य आगे कहते हैं, "झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग केंद्रीय निर्वाचन आयोग की तरह BJP का ऑफिस नहीं है. चुनाव कैसे कराना है यह उसका विशेषाधिकार है. चाहे बैलेट पेपर से हो या EVM से, JMM हर तरह की लड़ाई में आगे है. चिंता BJP को है और इसलिए वह बेचैन है. जहां तक दलीय आधार पर चुनाव कराने की बात है, JMM पहली भी इसकी मांग कर चुकी है.’’  

क्या है अन्य दलों की राय 

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता आलोक दुबे का कहना है कि पूरे देश को अगर EVM पर शक है, तो क्यों न चुनाव बैलेट पेपर से करा लिया जाए. जनादेश चाहे जिसे भी मिले, कम से कम लोगों को चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर शक तो नहीं होगा. दुबे दावा करते हैं, "अगर BJP EVM से ही चुनाव चाहती है, इसका साफ मतलब है कि EVM उसके कब्जे में है. BJP सहित सभी दलों को राज्य चुनाव आयोग पर भरोसा करना चाहिए. जहां तक बात दलीय आधार पर लड़ने की है, वह अगर नहीं भी होता है, तब भी सबको पता चल ही जाएगा कि कौन कैंडिडेट किस दल से संबंधित है. इसमें ज्यादा पड़ने की जरूरत नहीं है.” 

राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की प्रमुख सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के मुख्य प्रवक्ता देवशरण भगत कहते हैं, "जब पूरे देश में EVM से चुनाव हो रहा है, तो निकाय चुनाव भी इसी से होना चाहिए. लोग EVM से वोट करना जान गए हैं. बैलेट की चोरी, फर्जी वोट, बूथ लूट आदि से बचने के लिए ही तो EVM लाया गया था. साथ में अगर चुनाव दलीय आधार पर होते हैं तो पार्टी अपने विचार को जनता तक पहुंचा सकती हैं. इससे आम जन को अपना प्रतिनिधि चुनने में ज्यादा आसानी होगी.’’   

LJP (R), JDU, RJD सहित अन्य दलों ने इसपर फिलहाल अपना स्टैंड क्लियर नहीं किया है. दरअसल ये पार्टियां EVM या दलीय आधार की मांग में उलझने के बजाय अपने प्रत्याशियों को तैयार करने में जुटी है. मेयर से लेकर वार्ड मेंबर तक के चुनाव में पार्टियां अपने प्रत्याशियों को उतारने और उनके लिए समर्थन जुटाने के अभियान में लग भी चुकी हैं. 

आरोप और मांग के बीच सबसे दिलचस्प बात रांची के मेयर पद पर प्रत्याशी देने को लेकर होने जा रही है. बीते दो चुनाव में BJP की आशा लकड़ा चुनाव जीतती रही हैं. इससे पहले कांग्रेस की रमा खलखो यहां मेयर रह चुकी हैं. आशा लकड़ा इस वक्त राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य हैं, वहीं रमा खलखो महिला प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही है. चर्चा इस बात की है कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति में इस बार JMM समर्थित उम्मीदवार भी मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर चुनावी मैदान में होंगे. हालांकि JMM के महासिचव सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह जरूर कहा है कि मकर संक्रांति के बाद सभी सहयोगी दल आपस में बैठकर निकाय चुनाव में आपसी सामंजस्य बनाने की कोशिश करेंगे. 

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