ओडिशा में जनगणना कार्य में लगे कर्मियों के लिए संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. पहले उन्हें आम लोगों की तरफ से हमले झेलने पड़ रहे थे, अब लू लगने यानी हीट स्ट्रोक से उनकी जान जा रही है. 25 अप्रैल को 34 वर्षीय शिक्षक अनुराग एक्का की सुंदरगढ़ सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई. हालांकि, उनके परिजनों ने इस मौत के लिए लू को जिम्मेदार ठहराया है.
जराडा हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक गंगाधर मेहर ने बताया कि 24 अप्रैल को एक आधिकारिक बैठक में शामिल होने के लिए एक्का दोपहर 2 बजे तक स्कूल में थे. तभी वे बेहोश होकर गिर पड़े. स्कूल प्रशासन ने तुरंत उनके परिजनों को सूचना दी. परिजन उन्हें घर ले गए, लेकिन उनकी हालत और बिगड़ गई. बाद में उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. यह एक्का पर लू का दूसरा हमला था. इससे पहले 18 अप्रैल को जनगणना कार्य के दौरान भी वे जरदा गांव में बेहोश होकर गिर पड़े थे. इलाज के बाद वे आंशिक रूप से स्वस्थ हुए थे, लेकिन फिर से काम पर लौट आए थे.
अनुराग की मां पद्मिनी एक्का कहती हैं, "वह जराडा में तैनात था और जनगणना ड्यूटी पर गया था. वहां अचानक गिर पड़ा और उसे अस्पताल लाया गया. उसे कोई बीमारी नहीं थी. अस्पताल लाए जाने तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी. लू की वजह से मैंने अपना बेटा खो दिया."
सुंदरगढ़ जिले के जिला आपातकालीन अधिकारी अश्विनी पांडा ने कहा कि मौत के सही कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद ही ऐसी मौतों को लू से हुई मौत माना जा सकता है. पांडा ने बताया कि जिले में लू से बचाव संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है. इसके तहत स्कूल बंद किए गए हैं और सरकारी दफ्तरों का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक कर दिया गया है. बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सुंदरगढ़ शहर में दिन का तापमान औसतन 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है.
इसके ठीक एक दिन बाद 26 अप्रैल को मयूरभंज जिले के बेतनोटी ब्लॉक स्थित बैद्यनाथ हाई स्कूल के शिक्षक राजकपूर हेम्ब्रम की बारिपदा के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. उनके भतीजे लक्ष्मीकांत हेम्ब्रम ने बताया कि जनगणना के लिए घर-घर सर्वेक्षण कर लौटने के बाद वे बेहोश हो गए थे. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया.
स्कूल की प्रधानाध्यापिका ममता दास ने बताया, "राजकपूर हेम्ब्रम ने जनगणना कार्य से लौटने के बाद असहज महसूस होने की शिकायत की थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. उन्हें जनगणना के लिए तीन गांवों की जिम्मेदारी दी गई थी." मृतक शिक्षक के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले ही सहकर्मियों को अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी. इसके बावजूद अधिकारियों ने उन पर जनगणना ड्यूटी जारी रखने का दबाव बनाया था.
इससे पहले 19 अप्रैल को एक अन्य घटना में सुबरनपुर जिले के एक स्कूल प्रधानाध्यापक की जनगणना ड्यूटी से लौटने के बाद मौत हो गई थी. उनके परिजनों ने भी मौत का कारण लू लगना बताया है.
ये स्थिति तब है जब राज्य सरकार ने गर्म और उमस भरे मौसम में काम कर रहे जनगणना अधिकारियों के लिए पहले ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है. बढ़ते तापमान को देखते हुए उन्हें सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक धूप में काम करने से मना किया गया है. साथ ही फील्ड वर्क के दौरान पर्याप्त पानी पीने और अपने साथ ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) रखने की सलाह दी गई है.
लू के शिकार और लोग भी हो रहे
सुंदरगढ़ जिले के बिमलागढ गांव के 57 वर्षीय मजदूर गैब्रियल मुंडा रविवार दोपहर ट्यूबवेल खुदाई के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. उन्हें लहुणीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि मुंडा खुदाई कार्य में लगे हुए थे, तभी वे गिर पड़े. उनके परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी मौत लू लगने से हुई. इस मामले में अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज किया गया है.
साल 2022 से लेकर जुलाई 2024 तक देशभर में हीटस्ट्रोक से कुल 832 लोगों की मौत हो गई है. बीते 12 मार्च 2025 को संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, साल 2022 में पूरे देश में लू से 730 लोगों की मौत हुई थी. इसमें राजस्थान और यूपी में सबसे अधिक 130-130 लोगों की मौत हुई थी. वहीं ओडिशा में कुल 38 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. जबकि मार्च 2023 से जुलाई 2024 तक देशभर में हीटस्ट्रोक के कुल 67,637 मामले आए, जिनमें कुल 374 लोगों की मौत हुई थी. इस अवधि में सबसे अधिक पश्चिम बंगाल में 102 लोगों की मौत हुई.

