scorecardresearch

महाराष्ट्र: सीएम एकनाथ शिंदे की कुर्सी बचेगी? सांसद-विधायकों की अयोग्यता तय करने पर क्या हैं स्पीकर के अधिकार?

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर 10 जनवरी को दल-बदल कानून के तहत सीएम एकनाथ शिंदे समेत 40 विधायकों की अयोग्यता पर अपना फैसला सुनाने वाले हैं

अगर स्पीकर का फैसला शिंदे के खिलाफ होता है तो उनकी कुर्सी का जाना तय है
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
अपडेटेड 10 जनवरी , 2024

महाराष्ट्र में सत्ता की कुर्सी यानी मुख्यमंत्री के पद की लड़ाई के दौरान रिजॉर्ट में विधायकों को ले जाने से लेकर दल-बदल कानून तक कई मोड़ आ चुके हैं. इस बीच एकनाथ शिंदे अभी-भी इस पद पर मजबूती से बने हुए हैं.

हालांकि इस किस्से में अब एक और दिलचस्प मोड़ आने को है. महाराष्ट्र की राजनीति में साल 2019 से ही हलचलों का दौर जारी है. अब आज यानी 10 जनवरी को महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर दल-बदल कानून के तहत सीएम एकनाथ शिंदे समेत 40 विधायकों की अयोग्यता पर अपना फैसला सुनाने वाले हैं. 

अगर स्पीकर का फैसला शिंदे के खिलाफ होता है तो उनकी कुर्सी जाना तय है. इस पूरे मामले पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा है, "फैसला चाहे जो हो, पर हमारी सरकार स्थिर रहेगी. हमें उम्मीद है कि स्पीकर का फैसला भी हमारे ही पक्ष में आएगा." इससे पहले यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने था. जिसमें कोर्ट ने स्पीकर को अपना फैसला सुनाने के लिए 31 दिसंबर 2023 तक का वक्त दिया था. 

लेकिन बाद में अदालत ने इस मियाद को 10 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया था. महाराष्ट्र के स्पीकर ने भी उद्धव और शिंदे दोनों ही गुटों के विधायकों की सुनवाई को भी पूरा कर लिया है. अब इसे रिव्यू करने के लिए कानूनी जानकारों के पास भेजा जाएगा. ऐसी उम्मीद है 10 जनवरी की शाम तक स्पीकर इस पर अपना फैसला भी सुना देंगे. ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और शिवसेना इन सभी का भविष्य क्या होगा या हो सकता है, यह तय करने में इस फैसले की एक अहम भूमिका होगी. 

लेकिन इन सभी बातों के साथ समझने वाली सबसे जरूरी बात यह है कि सांसदों और विधायकों की योग्यता या अयोग्यता तय करने के मामले में स्पीकर के पास क्या अधिकार और शक्तियां हैं? इस सवाल का जवाब संविधान की दसवीं अनुसूची में है. भारतीय संविधान की दसवीं सूची के प्रावधानों के तहत दल-बदल के मामले में सदन के किसी सदस्य की योग्यता या अयोग्यता के बारे में फैसला करने का अधिकार स्पीकर के पास है. साल 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ऐसे मामलों में स्पीकर का फैसला न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगा. 

अब दल बदल कानून के बारे में भी थोड़ा समझ लेना जरूरी है. भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून को शामिल किया गया है. इसे भारतीय राजनीति में एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चले जाने के ट्रेंड पर लगाम लगाने के लिए शामिल किया गया था. कानून के प्रावधानों के मुताबिक सदन के स्पीकर के पास सदस्यों को अयोग्य करने से जुड़ा फैसला करने का अधिकार है. इसके अलावा इस कानून में कुछ खास परिस्थितियों का जिक्र भी है, जिसमें दल-बदल के आरोप के बाद भी किसी सदस्य को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता. साथ ही इस कानून के मुताबिक किसी राजनीतिक पार्टी को दूसरी पार्टी में विलय करने की छूट मिली हुई है. हालांकि इसके लिए पार्टी के कम से कम दो तिहाई सदस्यों का साथ होना जरूरी है. 

अब उस मामले पर भी गौर कर लेते हैं जिस वजह से महाराष्ट्र की राजनीति में हर थोड़े वक्त के बाद कुर्सी हिचकोले खाने लग जाती है. दरअसल 20 जून 2022 को एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के अपने समर्थक विधायकों के साथ बगावत कर दी. शिंदे अपने पाले के विधायकों के साथ महाराष्ट्र से सूरत पहुंच गए थे. वहीं राज्य के 10 निर्दलीय विधायक भी शिंदे के खेमे में शामिल हो गए. बाद में शिंदे इन सभी को साथ लेकर गुवाहाटी निकल गए.

वहीं शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या भी 40 तक पहुंच गई. इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता का नोटिस दिया गया. उधर बगावत के चलते महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार भी गिर गई. इसके बाद बीजेपी के समर्थन से शिंदे ने सीएम पद की शपथ ली. पर तब तक शिंदे और ठाकरे दोनों ही गुट एक दूसरे के खिलाफ याचिका दायर करते हुए दलबल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का मामला उठा चुके थे. 

इसी अयोग्यता के मामले पर अब स्पीकर के फैसले का इंतजार महाराष्ट्र की जनता समेत सत्ता की कुर्सी भी कर रही है. 

Advertisement
Advertisement