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समान नागरिक संहिता का वादा BJP को फायदा पहुंचाएगा या TMC को मजबूत करेगा?

BJP के घोषणापत्र में शामिल समान नागरिक संहिता (UCC) का वादा लोगों को जोड़ने वाला बनेगा या लड़ाई का मुद्दा बनेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि आम लोगों के बीच इस मुद्दे को किस तरह से पेश किया जाता है

अमित शाह ने बंगाल के लोगों से UCC लागू करने का वादा किया
अमित शाह ने बंगाल के लोगों से UCC लागू करने का वादा किया
अपडेटेड 13 अप्रैल , 2026

BJP ने पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का वादा किया है. UCC को BJP ने अपने प्रमुख वादों में से एक के रूप में पेश किया है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि अगर BJP की सरकार बनी तो सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए UCC लागू की जाएगी.

‘भरोशार शपथ’ नाम से BJP के घोषणापत्र (संकल्प पत्र) जारी करते हुए शाह ने UCC को न्याय और सुशासन का मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि अगर BJP राज्य में सरकार बनाती है तो इसे संविधान के अनुसार लागू किया जाएगा. शाह ने कहा, "हमने BJP शासित कई राज्यों में UCC लागू किया है, हम बंगाल में भी ऐसा ही करेंगे."

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता कहते हैं कि BJP का UCC प्रस्ताव मुस्लिम वोटरों को और भी मजबूती से उनके साथ खड़ा कर देगा. बंगाल में अल्पसंख्यक (मुस्लिम) लगभग 30 फीसद हैं और वे चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. TMC पार्टी UCC को धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों पर हमला बताकर प्रचार कर रही है.

TMC का मानना है कि UCC के विरोध में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के कुछ हिस्से भी उनके पक्ष में आ सकते हैं. बंगाल की जटिल सामाजिक संरचना इसकी वजह है. कई आदिवासी समुदायों में शादी, विरासत और सामाजिक रिश्तों के अपने पारंपरिक रीति-रिवाज हैं, जो सामान्य धार्मिक कानूनों से अलग हैं. ऐसे में TMC के कार्यकर्ता UCC को इन रिवाजों को कमजोर करने वाला बता रहे हैं.

इसी तरह, कुछ अनुसूचित जातियों में भी अपनी स्थानीय परंपराएं हैं. उन्हें TMC कार्यकर्ता अगर बताने में सफल हो जाते हैं कि UCC से उनका नुकसान है तो इसका सीधा फायदा ममता बनर्जी की पार्टी को मिलेगा. यही कारण है कि BJP के इस वादे से राज्य में विपरीत ध्रुवीकरण की संभावना बनती दिख रही है. भले ही BJP हिंदू वोटों को जाति से ऊपर उठाकर एक करने की कोशिश कर रही हो.

UCC के अलावा, BJP का घोषणापत्र विचारधारा के प्रचार और कल्याणकारी राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. इसमें शासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक क्षेत्रों में कई बड़े वादे किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की मौजूदा योजनाओं को सीधे टक्कर देने के लिए हैं.

इसके प्रमुख वादों में से एक है महिलाओं को हर महीने ₹3,000 की सहायता देना है. यह राज्य सरकार की मौजूदा नकद पैसा देने की योजनाओं को चुनौती देने के लिए किया गया है. पार्टी ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग को लागू करने का भी वादा किया है, जो लंबे समय से उनकी मांग रही है.

रोजगार के क्षेत्र में BJP ने पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरियां और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया है. साथ ही बेरोजगार युवाओं को हर महीने ₹3,000 की आर्थिक मदद देने का भी ऐलान है. पार्टी ने सरकारी रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरने और औद्योगिक ढांचे को बढ़ाने का भी वादा किया है.

पश्चिम बंगाल के लिए कानून-व्यवस्था एक प्रमुख मुद्दा है. BJP ने घुसपैठ पर सख्त कार्रवाई, बेहतर सीमा प्रबंधन और मवेशी तस्करी को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का वादा किया है. इसके अलावा, मौजूदा सरकार के भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र जारी करने और राज्य में फैली “कट मनी” संस्कृति को खत्म करने का भी वादा किया गया है.

घोषणापत्र में कुछ प्रतीकात्मक और सांस्कृतिक वादे भी हैं. इनमें वंदे मातरम संग्रहालय बनाने, अतिरिक्त भाषाओं को मान्यता देने और धार्मिक प्रथाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का वादा शामिल है. धार्मिक प्रथाओं की स्वतंत्रता वाला यह आश्वासन UCC के प्रस्ताव के साथ सावधानीपूर्वक रखा गया है.

आर्थिक मोर्चे पर BJP बंगाल के औद्योगिक ढांचे को फिर से पटरी पर लाने पर ध्यान दे रही है. इसमें चाय क्षेत्र, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में लक्षित हस्तक्षेप शामिल हैं. उत्तर बंगाल में बुनियादी ढांचे का विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी उसके रोडमैप में प्रमुख जगह रखते हैं.

घोषणापत्र जारी करते समय अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि BJP राज्य में “भ्रष्टाचार, कट मनी और सिंडिकेट राज” को पूरी तरह खत्म कर देगी. उन्होंने इस चुनाव को अच्छे शासन और प्रशासनिक सड़न के बीच का चुनाव बताया. घोषणापत्र एक दोहरी रणनीति को दिखाता है.

समान नागरिक संहिता (UCC) और कानून-व्यवस्था के मुद्दे व्यापक विचारधारा आधारित वोटों को एकजुट करने के लिए हैं, जबकि कल्याणकारी वादे पार्टी का सामाजिक आधार बढ़ाने के लिए हैं. अब देखना यह होगा कि UCC एकजुट करने वाला मुद्दा बनेगा या ध्रुवीकरण का कारण. यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे मैदान में कैसे पेश किया जाता है. BJP के लिए UCC कानून के सामने समानता का मुद्दा है. वहीं TMC के लिए यह विविधता और अधिकारों की रक्षा का सवाल है. बंगाल की जटिल चुनावी अंकगणित में इन दोनों का अंतर वादों के बराबर ही नतीजे को प्रभावित कर सकता है.

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