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BJP और TMC की एक दूसरे के खिलाफ जारी ‘चार्जशीट’ से उलझा चुनावी नैरेटिव

पश्चिम बंगाल में BJP और TMC ने एक दूसरे के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) जारी किए हैं, जिससे आम जनता परस्पर विरोधी सूचनाओं और दावों के बीच उलझन में पड़ गई है

अमित शाह के आरोपपत्र के जवाब में ममता ने भी जारी किया आरोपपत्र
अमित शाह के आरोपपत्र के जवाब में ममता ने भी जारी किया आरोपपत्र
अपडेटेड 1 अप्रैल , 2026

पश्चिम बंगाल में BJP और TMC ने एक दूसरे के खिलाफ आरोपों की सूची यानी ‘चार्जशीट’ जारी कर चुनावी लड़ाई को नैरेटिव की जंग में बदल दिया है. BJP ने 28 मार्च को 35 पृष्ठों की ‘चार्जशीट’ जारी की. यह आरोपपत्र किसी सामान्य चुनावी ब्रोशर के बजाय मुकदमे की दलील जैसा है. इसमें TMC के 15 साल का शासन फेल होने की कहानी बताई गई है.

BJP का कहना है कि ममता बनर्जी के “परिवर्तन” का वादा अब “संस्थागत सड़न और सामाजिक बर्बादी” में बदल चुका है. इस आरोपत्र की भाषा बहुत तीखी और आरोपपूर्ण है. यह शासन के अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़कर बड़ा आरोप लगाती है कि ममता सरकार का पूरा शासन नाकाम और विफल रहा है.

BJP के आरोपपत्र में ममता सरकार पर आरोप है कि राज्य पर गिरोहों का कब्जा है. इतना ही नहीं BJP का कहना है कि भ्रष्टाचार का राज कोयला और राशन वितरण से लेकर शिक्षा और ग्रामीण रोजगार तक विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है.

इस आरोपपत्र के मुताबिक, ममता सरकार ने एक बड़े स्तर की भ्रष्टाचार की संस्कृति को जन्म दिया है. इस दावे को पुख्ता करने के लिए इसमें कई घोटालों का ज़िक्र है, जिनमें भर्ती संबंधी अनियमितताएं भी शामिल हैं. दावा किया गया है कि इन भ्रष्टाचार के कारण हजारों शिक्षकों की नौकरियां रद्द हुईं.

साथ ही TMC सरकार पर कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी के आरोप भी लगाए गए हैं. ऐसा करके, BJP ने भ्रष्टाचार को एक व्यवस्थागत समस्या के रूप में दिखाने की कोशिश की है.

इसके अलावा, अपने आरोपपत्र में BJP ने कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. आरोपपत्र में राजनीतिक हिंसा, महिलाओं के खिलाफ अपराध और बढ़ते अपराध के आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि शासन की जगह डर ने ले ली है.

इसमें 2016 से अब तक सैकड़ों राजनीतिक हत्याओं का दावा किया गया है और हजारों हत्या के प्रयासों की ओर इशारा करते हुए इन आंकड़ों को "कानून के शासन के पतन" के प्रमाण के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है. इसकी भाषा जानबूझकर कठोर रखी गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पुलिस और विधायिका जैसी संस्थाएं राजनीतिक नियंत्रण के उपकरण बनकर रह गई हैं.

BJP ने इस आरोपत्र से विधानसभा चुनाव के बहाने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अहम मुद्दा बनाया है. इसमें भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ का मुद्दा बार-बार उठाया गया है. इसमें प्रशासनिक ढिलाई और फर्जी पहचान नेटवर्क के माध्यम से अवैध लोगों को राज्य में रहने देने के लिए सरकारी मिलीभगत का आरोप लगाया गया है. ऐसा करके, BJP सीमावर्ती जिलों और उत्तरी बंगाल में स्थानीय शासन की विफलताओं को व्यापक तौर पर राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है.

आरोपपत्र में उद्योगों के बंद होने, कंपनियों के राज्य से बाहर जाने और बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में युवाओं के पलायन का मुद्दा उठाया गया है. इसमें बंगाल को एक "औद्योगिक कब्रिस्तान" के रूप में दिखाया गया है. राज्य के कृषि क्षेत्र को भी संकटग्रस्त बताया गया है. आरोपपत्र में आलू और चावल क्षेत्रों में संकट और चाय बागान श्रमिकों की उपेक्षा का जिक्र भी है.

इस आरोपपत्र में शायद सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील हिस्सा महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित है. BJP के इस डॉक्यूमेंट्स में आंकड़े और प्रशासनिक उदासीनता के कथित उदाहरण सूचीबद्ध किए गए हैं. इनके माध्यम से यह तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रही है.

कुल मिलाकर, BJP का आरोपपत्र कई मोर्चों पर सरकार की नाकामी से राज्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को दिखाता है. इस आरोपपत्र का मकसद यह साबित करना है कि शासन की विफलता छोटे नहीं बल्कि काफी बड़े स्तर पर है.

BJP के आरोपपत्र के जवाब में TMC ने भी BJP के खिलाफ आरोपपत्र जारी किया है. TMC ने BJP के आरोपपत्र को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए तुरंत और तीखी प्रतिक्रिया दी है. इसके जवाबी आरोपपत्र में न केवल आरोपों का खंडन किया गया है, बल्कि पूरी कहानी को ही उलट दिया गया है.

TMC के आरोपपत्र में भी BJP के पतन की बात की गई है. यह आरोपपत्र एक ओर BJP पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाता है तो वहीं TMC राज्य सरकार के कल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रसार और प्रशासनिक पहुंच का दावा भी करता है.

TMC का तर्क है कि बंगाल में कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार देश के बाकी राज्यों से ज्यादा रहा है. इससे महिलाओं, किसानों, छात्रों और हाशिए पर पड़े समुदायों को सीधे लाभ मिला है. पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार की योजनाएं केंद्र की तरह लोकलुभावनवाद नहीं है, बल्कि इन योजनाओं ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्थाओं को नया रूप दिया है.

TMC के मुताबिक BJP के आरोप पत्र में जानबूझकर शासन के इस पहलू को नजरअंदाज किया गया है, क्योंकि इससे विफलता की कहानी जटिल हो जाती है. तृणमूल कानून-व्यवस्था के तर्क का भी कड़ा विरोध करती है. TMC का कहना है कि BJP ने अपने आरोपपत्र में अपने फायदे के हिसाब से आंकड़े लोगों के बीच रखे हैं. TMC ने प्रशासनिक नियंत्रण और अपराध प्रबंधन के BJP के दावों का खंडन किया है.

TMC का कहना है कि महिलाओं से जुड़ी हिंसा और सामाजिक तनाव का मामला केवल बंगाल तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कुछ मामलों में अन्य जगहों पर स्थिति और भी गंभीर हैं.

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर TMC दोहरी रणनीति अपनाती है. वह आरोपों के सामने आने की बात स्वीकार करती है, लेकिन इस बात पर जोर देती है कि कानूनी प्रक्रिया जारी है. TMC का कहना है कि किसी एक मामले के आधार पर पूरी सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. साथ ही, ममता बनर्जी की पार्टी ने केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिकरण पर भी सवाल उठाए हैं.

TMC ने जवाबी आरोपपत्र में घुसपैठ को लेकर BJP के दावे पर भी सवाल खड़े किए हैं. तृणमूल का तर्क है कि बॉर्डर सिक्योरिटी एक साझा जिम्मेदारी है, जिसमें केंद्रीय एजेंसियां ​​भी शामिल हैं. TMC विपक्षी दल BJP के इस दावे को खारिज करती है कि राज्य सरकार या तो लापरवाह है या मिलीभगत कर रही है. वह घुसपैठ पर BJP के आरोपपत्र को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास मानती है, खासकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में.

आर्थिक दृष्टि से अगर बात करें, तो TMC बंगाल के पतन के वर्णन को खारिज करती है. यह प्रगति के प्रमाण के रूप में बंगाल के इंफ्रा प्रोजेक्ट, शहरी विकास और सामाजिक संकेतकों में सुधार का हवाला देती है. साथ ही TMC ने अपने आरोपपत्र में केंद्रीय समर्थन में कमी के कारण पैदा होने वाली समस्याओं का भी जिक्र किया है. राज्य की आर्थिक चुनौतियों को केवल राज्य की विफलता के बजाय TMC ने केंद्र-राज्य के टकराव का परिणाम बताया है.

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