scorecardresearch

ओडिशा में वेदांता का विरोध हिंसक झड़प में कैसे बदल गया?

वेदांता लिमिटेड को ओडिशा के रायगढ़ा में बॉक्साइट खनन के लिए एक ब्लॉक आवंटित किया गया है जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं

Odisha tribal police clash
ओडिशा के रायगढ़ा में पुलिस और आदिवासियों के बीच झड़प
अपडेटेड 9 अप्रैल , 2026

ओडिशा में एक बार फिर वेदांता लिमिटेड के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन शुरू हो गया है. 7 अप्रैल को ग्रामीणों और स्थानीय आदिवासी समुदायों ने उस सड़क के निर्माण का विरोध किया था, जो रायगढ़ा जिले के काशीपुर ब्लॉक के एक गांव को सिजिमाली में स्थित एक खनन स्थल से जोड़ने वाली थी. इस झड़प में कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हो गए.

दरअसल 1 मार्च 2023 को वेदांता को रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों में फैले 31.1 करोड़ टन का बॉक्साइट ब्लॉक आवंटित किया गया था. कंपनी ने प्रति वर्ष 90 लाख टन खनन का प्रस्ताव दिया है. अब सरकार यहां बॉक्साइट खदान तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण करने जा रही है. स्थानीय आदिवासी इसी का विरोध कर रहे हैं.

आदिवासियों का कहना है कि इससे स्थाई जल स्रोत खत्म हो जाएंगे और उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा.

इस पूरे घटनाक्रम पर रायगढ़ा की पुलिस अधीक्षक स्वाति एस. कुमार बताती हैं कि एक पुलिस टीम सुबह करीब 5 बजे कुटामल गांव में स्थानीय नेता सुदर्शन माझी के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट को लागू करने के लिए पहुंची थी, जो इस परियोजना का विरोध करने वालों में शामिल हैं. अचानक ग्रामीणों ने हमला कर दिया और पुलिस के लिए पीछे हटना मुश्किल हो गया.

दो घायल पुलिसकर्मी
दो घायल पुलिसकर्मी

इस बवाल में एक उप-विभागीय अधिकारी सहित 58 पुलिसकर्मी घायल हुए. छह कर्मियों की हालत बिगड़ने पर उन्हें विशाखापट्टनम भेजा गया. जबकि स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार पुलिस की पिटाई से आठ ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं. पुलिस का कहना है कि पत्थरबाजी कर रहे ग्रामीणों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े. हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में है.

वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रात करीब 3 बजे घरों से बाहर आने को कहा और फिर लाठीचार्ज किया. इस दौरान आठ ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि इस दौरान पुलिस ने तीन से चार घरों को तोड़ दिया गया. घरों के बाहर सो रहे लोगों की जब नींद खुली, तो उन्होंने पुलिस का विरोध किया.

क्या कह रहे हैं लोग 

पुलिस कार्रवाई को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है, "एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए रात 3 बजे पुलिस की 3 प्लाटून क्यों गईं? लोगों के दरवाजे क्यों खटखटाए गए और उन्हें धमकाया क्यों गया? जब लोग विरोध कर रहे थे, तब तक लाठीचार्ज, आंसू गैस और हवाई फायरिंग के कारण सौ से अधिक पुरुष और महिलाएं घायल हो गए. कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं और खून बह रहा है, लेकिन अस्पताल नहीं जा पा रहे हैं. पूरा इलाका पुलिस छावनी में बदल दिया गया है. सच्चाई छिपाने के लिए पुलिस अपने घायल जवानों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बता रही है. पुलिस ने घायल ग्रामीणों को इलाज के लिए क्यों नहीं पहुंचाया?"

लाठीचार्ज में घायल एक महिला; स्थानीय लोगों का कहना है पुलिस ने उन पर बेवजह लाठियां बरसाईं
लाठीचार्ज में घायल एक महिला; स्थानीय लोगों का कहना है पुलिस ने उन पर बेवजह लाठियां बरसाईं

इस इलाके में काम करने वाले संगठन लोकमुक्ति ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है. संगठन का कहना है कि यह क्षेत्र संविधान के अनुच्छेद 244(1) और पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला अनुसूचित क्षेत्र है, जहां पेसा अधिनियम, 1996 लागू होता है. ऐसे में संसाधनों पर अधिकार ग्राम सभा का है और प्रशासन की कार्रवाई असंवैधानिक है. संगठन ने सरकार से पुलिस बल हटाने और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है.

राज्य के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और लोकशक्ति अभियान के राष्ट्रीय संयोजक प्रफुल्ल सामंता ने कहा, "वेदांता ने कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए वन स्वीकृति (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) हासिल की. जबकि रिकॉर्ड बताते हैं कि जनसुनवाई के दौरान एक ही दिन में सभी आठ ग्राम सभाओं में एक सरकारी अधिकारी मौजूद था. यह कैसे संभव है कि एक ही अधिकारी, एक ही समय में, आठ ग्रामसभा कर ग्रामीणों से अनुमति ले ले? इससे प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य सरकार किस दबाव में सिजिमाली में खनन को आगे बढ़ा रही है."

उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से कॉर्पोरेट आतंक और पुलिस गठजोड़ का गठबंधन है. साल 2023 यानी जब से माइंस आवंटन हुआ है, ग्रामीण तब से विरोध कर रहे हैं. उसी समय से पुलिस बिना कारण ग्रामीणों को उठा रही है. फिलहाल 23 लोग जेल में हैं, जिनमें 11 महिलाएं हैं. एक महिला तो गर्भवती भी है. यही नहीं, एक सरकारी अधिसूचना के जरिए पहले कई कार्यकर्ताओं को रायगढ़ा जिले में प्रवेश से भी रोका गया था."

BJD चुप, कांग्रेस कर रही है विरोध 

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है. ओडिशा कांग्रेस प्रभारी अजय कुमार लल्लू का कहना है कि 'ओडिशा का न्यूज़ीलैंड' कहे जाने वाले इस क्षेत्र में सबसे बड़ा संकट यह है कि अगर खनन शुरू हुआ तो नागावली और वंशधारा जैसी तमाम बारहमासी नदियां बर्बाद हो जाएंगी.
उन्होंने कहा, "जिस तरह ओडिशा में आदिवासियों की ज़मीन और आजीविका को उद्योगपतियों के हाथों बेचा जा रहा है वह अप्रत्याशित है.

रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में फैले सिजिमाली पर्वत में बॉक्साइट खनन के लिए आदिवासियों की ज़मीन सरकार ने वेदांता समूह को बेच दी है. अब वहां का प्रशासन खुलेआम आदिवासियों को धमका रहा है कि ज़मीन छोड़कर भाग जाओ वरना बुरे परिणाम होंगे. जबकि सच्चाई यह है कि धोखाधड़ी करके, सरकार की मिलीभगत से आदिवासियों की ज़मीन हथिया ली गई है."

कांग्रेस विधायक रामचंद्र कदम का कहना है, "भारत के राष्ट्रपति ओडिशा के एक आदिवासी हैं, मुख्यमंत्री भी आदिवासी हैं, और यहां तक कि केंद्रीय जनजातीय कल्याण मंत्री भी ओडिशा से हैं. फिर भी आदिवासी समुदायों के संघर्षों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. सिजिमाली (नियमगिरि), काशीपुर, लांजीगढ़, बाल्डा, कोरापुट, रायगढ़ा, कालाहांडी, सुंदरगढ़, क्योंझर, मयूरभंज, जाजपुर और अन्य खनन क्षेत्रों में जंगल नष्ट किए जा रहे हैं. जमीन छीनी जा रही है और लोगों को विस्थापित किया जा रहा है."

वे आगे कहते हैं, "जो लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं, उनकी आवाज़ को दबा दिया जाता है, उन्हें खामोश कर दिया जाता है और उनके संघर्ष को अपराध बना दिया जाता है. अब जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना ही अपराध बन गया है." चूंकि इस परियोजना की नींव नवीन पटनायक सरकार के समय रखी गई थी, ऐसे में इस हिंसक झड़प को लेकर बीजू जनता दल (BJD) की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

Advertisement
Advertisement