वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार का 10वां बजट न सिर्फ आकार में ऐतिहासिक होने जा रहा है, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है.
11 फरवरी को विधानसभा में पेश होने वाला यह बजट योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा. ऐसे में यह बजट सरकार के अब तक के शासन का लेखा-जोखा भी पेश करेगा और अगले चुनावी मुकाबले के लिए दिशा भी तय करेगा.
अब तक का सबसे बड़ा बजट
कहा जा रहा है कि योगी सरकार का यह 10वां बजट ₹9 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर सकता है, जो उत्तर प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट होगा. फरवरी 2025 में सरकार ने ₹8,08,736.06 करोड़ का मूल बजट पेश किया था, जबकि दिसंबर 2025 में ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट लाया गया. इस तरह वित्तीय वर्ष 2025-26 का कुल बजट आकार ₹8,33,233.03 करोड़ तक पहुंच गया. अगर इस आधार पर 9 फीसदी की औसत वृद्धि को देखा जाए तो 2026-27 के लिए बजट करीब ₹9.08 लाख करोड़ तक जा सकता है.
वहीं, अगर गणना केवल मूल बजट से की जाए तो भी यह आंकड़ा ₹8.8 लाख करोड़ के आसपास बैठता है. आर्थिक मामलों के जानकार और लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अरविंद मोहन कहते हैं, “उत्तर प्रदेश का बजट आकार लगातार बढ़ रहा है. यह सिर्फ महंगाई या प्रशासनिक खर्च का असर नहीं है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत व्यय में लगातार बढ़ोतरी का नतीजा है. 9 लाख करोड़ रुपए का बजट राज्य की अर्थव्यवस्था के स्केल को दर्शाता है.”
'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' और विकसित यूपी-2047 पर फोकस
इस बजट से सरकार के 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी विजन' और ‘विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ डॉक्यूमेंट की झलक साफ दिखने की उम्मीद है. बीते कुछ वर्षों में योगी सरकार ने एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया है. 2026-27 के बजट में इन योजनाओं को और गति देने के लिए भारी पूंजीगत आवंटन की संभावना जताई जा रही है. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का यह बयान कि “यह बजट इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि यह राज्य में सभी को खुश करेगा”, इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार संतुलन साधने की कोशिश में है. एक ओर विकास और निवेश, दूसरी ओर कल्याण और लोकलुभावन फैसले. चूंकि यह बजट 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आ रहा है, इसलिए इसे स्वाभाविक रूप से चुनावी चश्मे से देखा जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी सरकार के पास 2022 के BJP संकल्प पत्र में किए गए अधूरे वादों को पूरा करने का यह आखिरी बड़ा मौका है. राजनीतिक विश्लेषक सुशील पांडेय कहते हैं, “यह बजट BJP के लिए बहुत निर्णायक है. सरकार इसे अपने पांच साल के शासन की उपलब्धियों के रूप में पेश करेगी और साथ ही किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीब वर्ग को सीधे संदेश देने की कोशिश करेगी.”
किसान से लेकर महिला, युवाओं पर नजरें
किसानों के लिए मुफ्त बिजली, फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाएं और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही योगी सरकार की प्राथमिकता में रहे हैं. आने वाले बजट में किसानों को मुफ्त बिजली देने की योजना के लिए आवंटन जारी रहने की पूरी संभावना है. इसके अलावा, कृषि यंत्रीकरण, वेयरहाउसिंग और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी फंड बढ़ाया जा सकता है. कृषि अर्थशास्त्री नीरज वर्मा का मानना है, “सरकार जानती है कि पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड जैसे इलाकों में किसान बड़ा वोट बैंक हैं. ऐसे में बिजली, सिंचाई और सब्सिडी से जुड़े प्रावधानों को कमजोर करना सरकार के लिए राजनीतिक जोखिम होगा. इसलिए बजट में कृषि पर खर्च बनाए रखा जाएगा.”
BJP के 2022 के संकल्प पत्र में वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए मासिक पेंशन 500 रुपए से बढ़ाकर 1,500 रुपए करने का वादा किया गया था. लोकसभा चुनाव 2024 से पहले इसे बढ़ाकर 1,000 रुपए किया गया. अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीद है कि सरकार इस वादे को पूरा करते हुए पेंशन को 1,500 रुपए प्रति माह तक ले जाएगी. समाज कल्याण विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए अतिरिक्त बजटीय मांग वित्त विभाग को भेजी जा चुकी है. अगर यह फैसला बजट में शामिल होता है तो लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा.
महिलाओं को साधने के लिए योगी सरकार पहले ही उज्ज्वला योजना, मिशन शक्ति और कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं पर जोर देती रही है. उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की योजना के लिए भी बजट में फंड जारी रहने की संभावना है. इसके अलावा, रानी लक्ष्मी बाई महिला सशक्तिकरण योजना को फिर से रफ्तार मिलने की उम्मीद है. इस योजना के तहत 12वीं पास कर कॉलेज में दाखिला लेने वाली मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटर देने का ऐलान पिछले बजट में हुआ था, लेकिन जमीनी स्तर पर वितरण शुरू नहीं हो पाया. माना जा रहा है कि इस बार बजट में इसके लिए फिर से प्रावधान किया जाएगा और चुनावी साल में वितरण सुनिश्चित किया जाएगा. युवा वर्ग के लिए स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, रोजगार मेले और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी योजनाओं के लिए भी बजट में हिस्सेदारी बढ़ सकती है.
इंफ्रास्ट्रक्चर योगी सरकार के दौरान एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स पर लगातार खर्च बढ़ा है. लखनऊ मेट्रो के फेज-1B के लिए हाउसिंग डिपार्टमेंट पहले ही फंड का प्रस्ताव भेज चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि शहरी परिवहन को लेकर सरकार गंभीर है. शहरी विकास विशेषज्ञ मानते हैं कि मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स न सिर्फ शहरी मतदाताओं को आकर्षित करते हैं, बल्कि सरकार की विकासशील छवि को भी मजबूत करते हैं.
मुफ्त परिवहन और अधूरे वादे
2022 के विधानसभा चुनाव में BJP के संकल्प पत्र में 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को UPSRTC की बसों में मुफ्त यात्रा देने का वादा भी किया गया था. इसके अलावा, सभी गांवों को बस सेवा से जोड़ने की बात कही गई थी. अभी तक ये वादे पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं. अब खबर है कि UPSRTC ने इसके लिए बजटीय मांग भेज दी है और आने वाले बजट में इस दिशा में कदम उठाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह ग्रामीण और बुजुर्ग महिला मतदाताओं के लिए बड़ा संदेश होगा.
आर्थिक विशेषज्ञ इन योजनाओं को लेकर एक चेतावनी भी देते हैं कि इतने बड़े और लोकलुभावन बजट के साथ वित्तीय अनुशासन साधना बड़ी चुनौती होगा. हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि बजट में लोगों की भलाई और विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन भी बनाए रखा जाए.
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगर पूंजीगत व्यय और राजस्व व्यय के बीच संतुलन बना रहता है, तो बड़ा बजट राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है. लेकिन अगर केवल सब्सिडी और मुफ्त योजनाओं पर जोर बढ़ा, तो राजकोषीय दबाव भी बढ़ेगा.

