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गोवा की पुर्तगाली विरासत वाली ब्रेड अब बन सकती हैं ग्लोबल ब्रांड!

गोवा की परंपरागत ब्रेड को जल्दी ही GI टैग मिल सकता है जो इनकी ग्लोबल मार्केट तक पहुंच को आसान बना देगा

गोवा ब्रेड को मिलेगा GI टैग
गोवा ब्रेड को मिलेगा GI टैग
अपडेटेड 21 मई , 2026

गोवा में कई प्रकार की पारंपरिक ब्रेड बनाई जाती हैं, जिन्हें पुर्तगाली संस्कृति की देन माना जाता है. इनमें 'पोई' (Poiee or Poi), 'पाओ' (Pao) और 'उंडो' (Undo) बेहद लोकप्रिय हैं. ये ब्रेड्स गोवा के ज्यादातर लोगों के रोज के खान-पान का मुख्य हिस्सा हैं.

अब राज्य की इन पारंपरिक ब्रेड्स को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल सकता है. गोवा स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने इसके लिए आवेदन किया है. दीपक परब गोवा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के पेटेंट सुविधा केंद्र (IPR Cell) में GI टैग के राज्य नोडल अधिकारी हैं.

उन्होंने कहा, “GI टैग दो तरीकों से मदद करेगा. टैग के मिलने से इन ब्रेड्स को बनाने की पारंपरिक विधियां संरक्षित होंगी. उनके मार्केटिंग व ब्रांडिंग को बढ़ावा होगा. उपभोक्ताओं को भी गुणवत्ता का भरोसा मिलेगा. बेहतर कीमत का फायदा उत्पादकों (बेकर्स) तक पहुंचेगा.”

इसके साथ ही परब ने कहा कि इन तीनों पारंपरिक ब्रेड्स के लिए संयुक्त GI टैग का आवेदन पिछले महीने दाखिल किया गया है. GI सर्टिफिकेशन से पारंपरिक बेकरियों को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और अन्य मानकों का पालन करने में भी मदद मिलेगी. परब ने कहा कि GI टैग से इन ब्रेडों के निर्यात की संभावना भी बढ़ेगी, खासकर यूरोपीय देशों और खाड़ी देशों में जहां गोवा के प्रवासी समुदाय की अच्छी खासी संख्या है.

पाव बनाने की शुरुआत गोवा में पुर्तगाली उपनिवेशवादियों ने की थी. इस ज्ञान के साथ गोवा के बेकर मुंबई जैसे शहरों में चले गए. गोवा में कई पारंपरिक बेकरियां हैं, जहां बेकर पीढ़ियों से एक ही विधि का पालन कर रहे हैं. हालांकि, इन रोटियों को परंपरागत रूप से ताड़ी का उपयोग करके तैयार किया जाता रहा है जो इन्हें इनका खास स्वाद, मीठापन और सुगंध प्रदान करती है. हालांकि इसे बनाने के लिए कुछ बेकरियों ने व्यावसायिक खमीर का उपयोग करना शुरू कर दिया है.

ऑल गोवा बेकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अगापितो मेनेजेस ने बताया कि पारंपरिक बेकरियों को ताड़ी की अनुपलब्धता और बढ़ती लागत जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ताड़ी निकालने वालों की कमी के कारण ताड़ी की उपलब्धता घट गई है. यही कारण है कि राज्य के कुछ हिस्सों, जैसे मार्गाओ में केवल कुछ ही बेकरियां ताड़ी का इस्तेमाल करती हैं. पणजी के पास स्थित दिवर द्वीप पर रहने वाले मेनेजेस ने कहा, "हम पुरानी ताड़ी को स्टोर करके उसका उपयोग नहीं कर सकते. इसे ब्रेड बनाने में उसी दिन इस्तेमाल करना पड़ता है."

गोवा में लगभग 800 बेकरी और मिठाई की दुकानें हैं, जिनमें से लगभग 700 इन ब्रेड को बनाती हैं. हालांकि, कई पारंपरिक गोअन बेकरों ने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आए प्रवासियों को अपनी दुकानें बेच दी थीं. जहां पोई जैसी पारंपरिक ब्रेड में साबुत गेहूं का इस्तेमाल होता था. वहीं, कई बेकरों ने मैदा मिलाना शुरू कर दिया था, जिससे गुणवत्ता और स्वाद में कमी आ गई थी.

गोवा के करीब 15 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है. इनमें गोवा खजेम, काजू फेनी, खोला मिर्च, मनकुराड आम, अगासाइम बैंगन, हरमल मिर्च, मिंडोली केला, सेवन रिज ओकरा, गोवा बेबिंका, गोवा काजू कर्नेल, गोवा काजू सेब, मुसरद/मुसरत आम, हिलारियो आम, खोरगुट चावल और तलेइगाओ बैंगन शामिल हैं.

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