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शुभेंदु अधिकारी मोदी सरकार की मदद से 'सुधारेंगे' बंगाल की नौकरशाही!

बंगाल में प्रशासनिक ढांचे को ‘रीसेट’ करने की कोशिश तेज हो गई है. शुभेंदु सरकार अफसरों को केंद्र से जोड़ने और पुराने सिस्टम को बदलने में जुटी

suvendu adhikari press conference
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (फाइल फोटो)
अपडेटेड 15 मई , 2026

पश्चिम बंगाल में नई BJP सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के आने के बाद प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है. अफसरों की ट्रेनिंग, केंद्र सरकार में डेपुटेशन और नौकरशाही में फेरबदल पर अब खास जोर दिया जा रहा है.

11 मई को अधिकारी ने ऐलान किया था कि राज्य कैबिनेट ने मुख्य सचिव को यह अधिकार दे दिया है कि वे राष्ट्रीय और राज्य कैडर के अफसरों के लिए केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर सकें. कैबिनेट ने यह भी तय किया कि IAS, IPS और राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को केंद्रीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में भेजा जाएगा. इसे राज्य की पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था से बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

इसकी शुरुआत 12 मई से हो गई जब पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के 8 अधिकारियों को नई दिल्ली में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. यही संस्था केंद्र की आयुष्मान भारत योजना लागू करती है. इस ट्रेनिंग में खास तौर पर आईटी से जुड़े अधिकारियों पर फोकस था और उन्हें आयुष्मान भारत लागू करने के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई.

शहरी विकास और नगर मामलों के विभाग के अधिकारी भी ट्रेनिंग ले रहे हैं और आने वाले समय में दूसरे विभागों के लिए भी ऐसे कार्यक्रम शुरू हो सकते हैं.

कई मौजूदा और रिटायर्ड अफसरों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान अधिकारियों को बाहर ट्रेनिंग, पढ़ाई या केंद्र में डेपुटेशन के मौके बहुत कम मिलते थे. एक युवा IAS अधिकारी ने कहा था कि बंगाल के अफसर खुद को पेशेवर तौर पर थमा हुआ महसूस करते थे क्योंकि उन्हें राज्य से बाहर सीखने या काम करने के ज्यादा मौके नहीं दिए जाते थे.

अफसरों का मानना है कि ऐसी ट्रेनिंग और एक्सपोजर सिर्फ करियर के लिए नहीं बल्कि बेहतर प्रशासन के लिए भी जरूरी है.

इसका एक व्यावहारिक असर भी है. बंगाल के अधिकारियों को अक्सर केंद्र सरकार के साथ परियोजनाओं और प्रशासनिक मामलों पर बातचीत करनी पड़ती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में दिल्ली में अहम पदों पर बंगाली या बंगाल कैडर के अफसरों की संख्या काफी कम हो गई क्योंकि राज्य की तरफ से केंद्र में अफसर भेजने को लेकर अनिच्छा दिखाई जाती थी. अब माना जा रहा है कि नई सरकार की नीति से यह स्थिति धीरे-धीरे बदल सकती है.

इसी के साथ, बंगाल सरकार ने रिटायर हो चुके अफसरों को दोबारा सरकारी पदों पर रखने की पुरानी व्यवस्था खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. 12 मई को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी करके 243 ऐसे अफसरों को हटा दिया जिनका कार्यकाल तो खत्म हो चुका था लेकिन उन्हें फिर से अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया था या वे सरकारी वेतन के साथ नामित पदों पर बने हुए थे.

इस फैसले का कई मौजूदा IAS और IPS अधिकारियों, खासकर युवा अफसरों ने स्वागत किया है. उनका मानना है कि रिटायर्ड अफसरों को बार-बार एक्सटेंशन मिलने से प्रमोशन और प्रशासनिक बदलाव की प्रक्रिया रुक जाती थी.

हालांकि इस फैसले से कुछ अफसर नाराज भी हैं. जिन अधिकारियों के नाम हटाए गए लोगों की सूची में थे, उनका कहना है कि उन्होंने 12 मई को पहले ही इस्तीफा दे दिया था. इसके बावजूद सूची में नाम आने को कुछ लोगों ने अपमानजनक बताया.

भले ही BJP सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह कामकाज के तौर-तरीकों में सुधार कर रही है और नए चेहरों को आगे ला रही है फिर भी साफ दिख रहा है कि बड़े पदों पर बैठे पुराने लोग ही कमान संभाले हुए हैं. ऐसी संभावना है कि मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल को रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार मिल सकता है.

इन सब बातों से ऐसा लगता है कि नई सरकार पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने और उसमें सुधार करने, दोनों के बीच एक बैलेंस बनाने की कोशिश कर रही है. एक तरफ वह अफसरों की ट्रेनिंग और उन्हें केंद्र में काम करने का मौका दे रही है, तो दूसरी तरफ रिटायरमेंट के बाद सालों से टिके रहने वाले जुगाड़ू सिस्टम को भी साफ कर रही है.

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