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सर्जरी के बाद पेट में छूटते औजार! क्यों होती हैं ऐसी घटनाएं?

लखनऊ में दो साल पहले एक महिला के ऑपरेशन के दौरान शरीर में औजार छूटने का मामला सामना आया और अब इसमें 15 डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर FIR दर्ज की गई है

doctor performing surgery in OT
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 9 जनवरी , 2026

लखनऊ की एल्डिको सिटी में रहने वाली 57 वर्षीय रश्म‍ि सिंह (बदला हुआ नाम) का मामला सुनते ही सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या ऑपरेशन थिएटर में हुई एक गलती मरीज की जिंदगी सालों तक नरक बना सकती है. जनवरी 2023 में पेट दर्द से शुरू हुई उनकी परेशानी अगस्त 2025 तक चलती रही. लखनऊ के हरदोई रोड पर मौजूद एक निजी अस्पताल में दो सर्जरी, दर्जनों कंसल्टेशन, लाखों रुपये का खर्च और आखिर में यह खुलासा कि पहली सर्जरी के दौरान डॉक्टर उनके पेट में “सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट” छोड़ गए थे. इससे भी गंभीर आरोप यह है कि गलती छिपाने के लिए कथित तौर पर मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर की गई और जानबूझकर गलत इलाज चलता रहा. 

रश्मि‍ सिंह की शिकायत के बाद 7 जनवरी को मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर एक निजी अस्पताल के 15 डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज होना कोई सामान्य घटना नहीं है. इसमें सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट से लेकर सीनियर अधिकारी तक शामिल हैं. पुलिस ने BNS की उन धाराओं में केस दर्ज किया है जो इंसानी जान को खतरे में डालने और गंभीर चोट पहुंचाने से जुड़ी हैं. यह केस अकेला नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में सर्जरी के दौरान बरती जा रही लापरवाही की एक बड़ी और डरावनी तस्वीर का हिस्सा है.

जब इलाज ही बीमारी बन जाए

रश्मि सिंह के अनुसार 27 फरवरी 2023 को उनकी पहली सर्जरी हुई. टांकों में दिक्कत बताकर 17 मार्च को दूसरी सर्जरी की गई. इसके बाद भी पेट दर्द खत्म नहीं हुआ. बार-बार अस्पताल जाने पर सिर्फ पेनकिलर दी जाती रही. अगस्त 2023 में अल्ट्रासाउंड में गड़बड़ी दिखी तो अपेंडिसाइटिस बताकर तीसरी सर्जरी का दबाव बनाया गया. 

शक होने पर उन्होंने दूसरी राय ली और सीटी स्कैन में पेट के अंदर बाहरी सर्जिकल वस्तु मिलने की पुष्टि हुई. 20 अगस्त को दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन कर वह इंस्ट्रूमेंट निकाला गया. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनका आरोप है कि पहले अस्पताल को सब पता था, फिर भी इलाज चलता रहा और करीब पांच लाख रुपये वसूले गए. यही नहीं, ऑपरेशन के बाद की जटिलताओं के चलते उन्हें ICU तक जाना पड़ा. यह मामला सिर्फ मेडिकल नेग्लिजेंस नहीं, बल्कि कथित आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की तरफ इशारा करता है.

ऐसी ही कहानी मेरठ के रासना गांव की रोशनी शर्मा (बदला हुआ नाम) की भी है. 2018 में डिलीवरी ऑपरेशन के दौरान पेट में रुई का बंडल छूट गया. सालों तक दर्द होता रहा. डॉक्टर अल्सर बताकर दवाएं देती रहीं. जब हालत बिगड़ी तो फिर से ऑपरेशन की सलाह दी गई, वह भी लाखों रुपये खर्च बताकर. आखिरकार मेडिकल कॉलेज में जांच हुई तो सच्चाई सामने आई. कोर्ट के आदेश पर 2024 में केस दर्ज हुआ. सवाल वही है कि अगर समय रहते जांच होती तो क्या यह पीड़ा टाली जा सकती थी.

सर्जरी में लापरवाही क्यों होती है

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार सर्जरी के दौरान ऐसी घटनाओं के पीछे कई कारण होते हैं. पहला, ऑपरेशन थिएटर में तय प्रोटोकॉल का पालन न होना. सर्जरी से पहले और बाद में इंस्ट्रूमेंट काउंट करने की प्रक्रिया अनिवार्य है, लेकिन कई निजी अस्पतालों में इसे औपचारिकता बना दिया गया है.

दूसरी वजह है प्रशिक्षित स्टाफ की कमी. नर्सिंग और OT टेक्नीशियन की भूमिका बेहद अहम होती है. कम वेतन और ज्यादा काम के दबाव में अनुभवहीन स्टाफ से गलती की आशंका बढ़ जाती है. इसके अलावा लंबे और जटिल ऑपरेशन भी ऐसे हादसों की वजह बन सकते हैं. घंटों चलने वाली सर्जरी में थकान और टीम के बीच तालमेल की कमी भी लापरवाही का कारण बनती है. चौथी वजह है, मुनाफे का दबाव. विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ निजी अस्पतालों में जल्दी-जल्दी ज्यादा सर्जरी करने का दबाव रहता है, जिससे सावधानी कम हो जाती है.

नियम क्या कहते हैं

मेडिकल काउंसिल में तैनात रहे लखनऊ निवासी एक डॉक्टर बताते हैं, “नेशनल मेडिकल कमीशन और उससे पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सर्जरी से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें शामिल हैं, सर्जरी से पहले, दौरान और बाद में सभी इंस्ट्रूमेंट, स्पॉन्ज और पैड की गिनती हर ऑपरेशन का पूरा रिकॉर्ड और वीडियो लॉग, किसी भी जटिलता या गलती की स्थिति में मरीज और परिजनों को तुरंत जानकारी और पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग और शिकायत मिलने पर स्वतंत्र जांच.” इसके अलावा क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पतालों पर यह जिम्मेदारी है कि वे योग्य डॉक्टर और स्टाफ रखें और तय मानकों का पालन करें. 

किसी भी गंभीर मेडिकल नेग्लिजेंस के मामले में राज्य मेडिकल काउंसिल जांच कर सकती है. दोष साबित होने पर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन निलंबित या रद्द किया जा सकता है, चेतावनी या जुर्माना लगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है. मेडिकल संवेदनहीनता के खि‍लाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले एडवोकेट अभि‍नव सिंह बताते हैं, “समस्या यह है कि इन प्रावधानों का अक्सर सख्ती से पालन नहीं होता. कई मामलों में शिकायतें सालों तक लंबित रहती हैं.  निजी अस्पतालों का प्रभाव और लंबी जांच प्रक्रिया पीड़ितों को कोर्ट का रास्ता अपनाने पर मजबूर कर देती है.” 

नियमों का उल्लंघन कैसे हो रहा है

यूपी स्वास्थ्य विभाग में एडिशनल डायरेक्टर रहे डा. आर. बी. अग्रवाल बताते हैं, “सर्जरी में लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई न होने की कई वजहें हैं. विभागीय आंतरिक ऑडिट और मॉनिटरिंग कमजोर है, निजी अस्पतालों में मरीजों को मेडिकल रिकॉर्ड आसानी से नहीं दिए जाते, शिकायत निवारण तंत्र प्रभावी नहीं है और सरकारी निरीक्षण सीमित और औपचारिक रह गया है.” रश्म‍ि सिंह और रोशनी शर्मा के मामलों में भी यही पैटर्न दिखता है. पहले शिकायतें की गईं, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की. आखिरकार कोर्ट की दखल से FIR दर्ज हुई. 

डा. अग्रवाल सुझाव देते हैं कि मरीज सर्जरी से पहले अस्पताल और डॉक्टर की पृष्ठभूमि जांचें, सभी रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी की कॉपी अपने पास रखें, लंबे समय तक दर्द या असामान्य लक्षण हों तो दूसरी राय जरूर लें और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत लिखित शिकायत करें. चिकित्सकीय लापरवाही के कई मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हुआ है. विभाग ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को लापरवाही के ऐसे मामलों की जांच और निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश जारी किए हैं. 

हालांकि लापरवाही के इन मामलों ने साफ कर दिया है कि सर्जरी सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भरोसे का रिश्ता है. जब यह भरोसा टूटता है तो नुकसान सिर्फ शरीर का नहीं, मानसिक और आर्थिक भी होता है. जरूरत है कि नियम कागजों से निकलकर ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचें. मेडिकल काउंसिल, प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को जवाबदेह बनाना होगा. वरना हर कुछ महीनों में ऐसी ही एक नई केस स्टडी सामने आती रहेगी, और सवाल वही रहेगा कि गलती डॉक्टर की थी या सिस्टम की.

पिछले पांच वर्षों में यूपी में सर्जरी में लापरवाही के चर्चित मामले

  • 2020, कानपुर : निजी अस्पताल में सिजेरियन के दौरान पेट में स्पॉन्ज छूटने का मामला, कोर्ट के आदेश पर FIR. 
  • 2021, वाराणसी : गॉलब्लैडर सर्जरी के बाद मरीज की मौत, जांच में OT प्रोटोकॉल उल्लंघन.
  • 2022, प्रयागराज : हड्डी के ऑपरेशन में गलत इम्प्लांट, डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन अस्थाई रूप से निलंबित.
  • 2023, लखनऊ : हार्निया सर्जरी के बाद संक्रमण, अस्पताल पर मुआवजा.
  • 2024, मेरठ : डिलीवरी ऑपरेशन में रुई का बंडल छूटने का केस, कोर्ट के आदेश पर जांच.
  • 2025, लखनऊ : रश्म‍ि सिंह मामला, 15 डॉक्टरों पर FIR.
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