गोवा में पिछले महीने हुए जिला पंचायत चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है. चुनाव परिणाम आने के कुछ दिनों बाद ही पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर समेत कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है.
ऐसी अटकलें हैं कि पालेकर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने दो विधानसभा सीटें जीती थी.
इनमें से एक पर वेंजी विएगास ने बेनौलिम से पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ को हराया था, जबकि क्रूज सिल्वा ने वेलिम सीट जीती थी.
अब, जिला पंचायत चुनाव में AAP 42 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन केवल एक सीट ही जीत सकी. यह हार AAP के केंद्रीय नेताओं, जैसे कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आतिशी के जरिए किए गए जोरदार प्रचार अभियान के बावजूद हुई है.
AAP को एकमात्र जीत कोल्वा से मिली, जहां एंटोनियो लियो फर्नांडीस ने मात्र 73 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की. हालांकि, AAP बेनौलिम सीट हार गई, जिसे उसने 2020 में जीता था, जो अब कांग्रेस को मिल गई है. 2020 में हारने वाले उम्मीदवार जोसेफ पिमेंटा की जीत ने पार्टी को गोवा में एक अच्छा मौका दिया था.
जिला पंचायत चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद AAP के केंद्रीय नेतृत्व ने पालेकर को गोवा इकाई के प्रमुख पद से हटा दिया था. 2021 में AAP में शामिल होने से पहले वे BJP से जुड़े हुए थे. पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किए जाने के बावजूद पालेकर 2022 के विधानसभा चुनाव में सेंट क्रूज से कांग्रेस के रोडोल्फो फर्नांडीस से हार गए.
फर्नांडीस, चार बार की विधायक और पूर्व मंत्री विक्टोरिया फर्नांडीस के बेटे हैं. सेंट क्रूज निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कभी यूनाइटेड गोअन्स पार्टी के डॉ. जैक डी सेक्वेरा ने किया था.
सेक्वेरा गोवा विधानसभा में विपक्ष के पहले नेता थे. पालेकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भंडारी समुदाय से आते हैं. यह समुदाय गोवा में बहुजन समाज का सबसे बड़ा समूह है.
उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का निर्णय भंडारी समुदाय को एकजुट करने के तौर पर देखा गया था. इससे AAP को लगा था कि वे गोवा की लगभग एक तिहाई आबादी का वोट हासिल कर पाएंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.
अब तक भंडारी समुदाय से गोवा के एकमात्र मुख्यमंत्री कांग्रेस के दिवंगत रवि नाइक बने हैं. बाद में वे BJP में शामिल हो गए और डॉ. प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली कैबिनेट में कृषि मंत्री बने. नाइक का निधन पिछले साल हो गया.
पालेकर की बर्खास्तगी के बाद, AAP के राज्य महासचिव (संगठन) श्रीकृष्णा परब को राज्य इकाई का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी है. अपनी बर्खास्तगी के कुछ ही दिनों बाद पालेकर ने केजरीवाल और आतिशी को पत्र लिखकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपलोड किए गए अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “मैंने सार्वजनिक जीवन में पद या ओहदे की लालच में राजनीति में प्रवेश नहीं किया था. मैं पार्टी में इस विश्वास के साथ शामिल हुआ था कि यह एक वैकल्पिक राजनीति का वादा करती है. एक ऐसी राजनीति जो पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी स्तर की आवाजों के सम्मान पर आधारित है. हालांकि, समय के साथ इन आदर्शों को वर्तमान में लिए जाने वाले फैसलों के साथ सामंजस्य बिठाना मुश्किल होता जा रहा है. इसीलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं.”
पालेकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “जब किसी दल में कार्यकर्ताओं से संवाद और परामर्श सीमित होते हैं और फैसले केवल शीर्ष स्तर से आते हैं, तो इससे संगठन कमजोर होता है." इसके आगे उन्होंने लिखा, "मैंने क्रोध या जल्दबाजी में नहीं, बल्कि काफी सोच-समझ कर आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए बिना पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है.”
इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि पालेकर कांग्रेस में शामिल होंगे. उन्होंने एक स्थानीय टीवी समाचार चैनल को बताया, "मैं कहीं न कहीं जरूर जाऊंगा. मैं अपने लिए सबसे अच्छा विकल्प चुनूंगा, लेकिन यह सेंट क्रूज़ की जनता से सलाह मशवरा करने के बाद ही होगा."
उन्होंने कहा, “मैं 2027 में विधायक बनना चाहता हूं. मैंने इसके लिए अपना निजी जीवन, राजनीतिक करियर, पेशा कारोबार, बचत सबकुछ दांव पर लगा दिया है.” पालेकर ने कहा कि उन्होंने जिला पंचायत चुनावों में BJP का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के गठबंधन का समर्थन किया था, लेकिन पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
कई बार फोन करने और मैसेज भेजने के बावजूद इंडिया टुडे पालेकर से संपर्क नहीं कर पाया. हालांकि, आम आदमी पार्टी ने वरिष्ठ नेता वाल्मीकि नाइक को गोवा का अध्यक्ष नियुक्त किया है. पालेकर के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी विधायक विएगास ने कहा कि वे पालेकर को शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन AAP की लड़ाई BJP की संस्कृति के खिलाफ है. उन्होंने आगे कहा, “हम BJP की बदले की राजनीति और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ हैं और यह लड़ाई जारी रखेंगे.”
राजनीतिक विश्लेषक विठ्ठलदास हेगड़े ने कहा, "पालेकर के इस्तीफे से AAP पर असर पड़ेगा, क्योंकि वे 2022 से पार्टी के गोवा अध्यक्ष थे. ऐसी खबरें हैं कि वे कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. इससे कांग्रेस को फायदा हो सकता है क्योंकि पालेकर AAP के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे. उनका निर्वाचन क्षेत्र सेंट क्रूज़ कांग्रेस का गढ़ रहा है.”
इस निर्वाचन क्षेत्र में हिंदू और कैथोलिक दोनों समुदाय के लोग हैं. मुसलमानों की भी अच्छी खासी संख्या है. जिला पंचायत चुनावों से संकेत मिला है कि अल्पसंख्यक समुदाय कांग्रेस की ओर वापस लौट सकता है. विपक्ष के नेता यूरी अलेमाओ ने कहा कि कांग्रेस पालेकर का अपने दल में स्वागत करती है. अलेमाओ ने कहा, "जो भी गोवा के विनाश के खिलाफ है, जो भी BJP की गलत नीतियों के खिलाफ है, हम सभी को एकजुट होना चाहिए." अलेमाओ को जिला पंचायत चुनावों में BJP के खिलाफ एक बड़े विपक्षी गठबंधन के लिए जोर देने वाले कांग्रेस नेताओं में से एक माना जा रहा था.
जब अलेमाओ से पूछा गया कि क्या पालेकर वाकई कांग्रेस में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा, "बिल्कुल, हमारी विचारधाराएं मिलती हैं. पार्टी फैसला करेगी." कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पालेकर का स्वागत है, लेकिन सवाल यह है कि संगठन में उन्हें कहां जगह दिया जाएगा. एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने कहा, "अपने निर्वाचन क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या वे अन्य सीटों के नतीजों को प्रभावित कर पाएंगे."
जिला पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ BJP-महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (MGP) ने उत्तरी और दक्षिणी गोवा की 50 जिला पंचायतों में से 32 सीटें (एक निर्दलीय सहित) जीतीं. BJP को 29 सीटें और MGP को दो सीटें मिलीं. जीतने वालों में BJP नेताओं के रिश्तेदार शामिल थे, जैसे केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाइक के बेटे सिद्धेश, राज्य के जल संसाधन मंत्री सुभाष शिरोडकर की बेटी डॉ. गौरी और राज्य सरकार का समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायक एंटोनियो वास की पत्नी मार्सियाना.
कांग्रेस और उसकी सहयोगी गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने क्रमशः 10 और 10 सीटें जीतीं. इस चुनाव में रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) ने दो सीटें हासिल कीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने चार सीटें जीतीं. उत्तरी गोवा की जिला पंचायत में BJP ने 18 सीटें जीतीं, उसके बाद कांग्रेस और RGP (दो-दो), RGP-MGP (एक) और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटें जीतीं.
दक्षिणी गोवा में BJP ने 11 सीटें हासिल कीं, जबकि MGP ने दो सीटों पर जीत दर्ज की. कांग्रेस को आठ सीटें और RGP को एक सीट मिली. निर्दलीय उम्मीदवारों को दो सीटें और आम आदमी पार्टी (AAP) को एक सीट मिली. उत्तरी और दक्षिणी गोवा की जिला पंचायतों में 25-25 सदस्य हैं.
कांग्रेस, जो 2012 से राज्य में सत्ता से बाहर है और 2017 से अब तक कम से कम छह बार टूट चुकी है. इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस को दक्षिण गोवा में खुशी मनाने का मौका मिला, जो कभी उसका गढ़ हुआ करता था. महत्वपूर्ण बात तो यह है कि सालसेट तालुका में कांग्रेस-GFP ने नौ जिला पंचायत सीटों में से एक को छोड़कर बाकी सभी पर जीत हासिल की है. सिवाय उस एक सीट के जो AAP के खाते में गई है.
2020 में कांग्रेस ने नौ जिला पंचायत सीटों में से केवल तीन सीटें जीती थीं. सालसेट में कैथोलिक और मुस्लिम आबादी काफी अधिक है. AAP का उम्मीद से कम प्रदर्शन यह ये दिखाता है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस की ओर लौट गया है. 2020 में जीती हुई दावोरलिम और गुइरदोलिम सीटों पर BJP की हार भी उसके अल्पसंख्यक मतदाता आधार में आई गिरावट को उजागर करती है.
कांग्रेस ने जिला पंचायत चुनावों में BJP के खिलाफ एक संयुक्त विपक्षी मोर्चे के रूप में महागठबंधन (गोवा) का विचार रखा था. उम्मीद थी कि यह गठबंधन इस साल की शुरुआत में होने वाले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों और उससे भी महत्वपूर्ण, जनवरी-फरवरी 2027 में होने वाले गोवा विधानसभा चुनावों तक रहेगा.
हालांकि, सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर RGP ने कांग्रेस और GFP से अलग रास्ता अपना लिया. RGP के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले और दो सीटों पर GFP के साथ हुए फ्रेंडली फाइट से अनुमान है कि कांग्रेस को पांच से ज्यादा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा.
हालांकि, बेहतर प्रदर्शन के चलते कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनावों में अपनी बेहतर संभावनाओं की उम्मीद जगी है. 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के कैप्टन विरियातो फर्नांडीस ने दक्षिण गोवा की लोकसभा सीट जीती थी. विपक्ष को लगता है कि वह राज्य में 2021 में किए गए वादों के पूरे नहीं होने के कारण बढ़ रहे असंतोष का फायदा उठा सकता है.
कांग्रेस सत्ता विरोधी वोटों को बिखरने से बचाने के लिए एक संयुक्त विपक्षी मोर्चा बनाने पर अडिग है. AICC सचिव और गोवा की प्रभारी डॉ. अंजली निम्बालकर ने एक बयान में कहा, "कांग्रेस ने राज्य भर में महत्वपूर्ण सीटें जीतकर हाल के चुनावों से मिली गति को बरकरार रखा है और यह साबित कर दिया है कि स्थिति बदल रही है."

