अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है, लोगों की उत्सुकता नवनिर्मित राम मंदिर में प्रतिष्ठित होने वाली रामलला की मूर्ति को लेकर बढ़ती जा रही है. प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान राम (चल मूर्ति) को अस्थायी मंदिर स्थल से नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह (गर्भगृह) तक ले जाएंगे. उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी आने की संभावना है.
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल होंगे. दोपहर को 11.30 बजे से 12.30 बजे के बीच 'प्राण प्रतिष्ठा' की मुख्य पूजा होगी, जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी 'यजमान' के रूप में करेंगे. 'चल मूर्ति' (जिसकी पूजा मौजूदा अस्थायी मंदिर में की जा रही है) को प्रार्थना के बाद एक पवित्र स्थान पर रखा जाएगा इसके बाद रामलला की तीन पांच फुट की मूर्तियों में से एक को नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला की तीन अलग-अलग मूर्तियां बनाने के लिए तीन मूर्तिकारों को काम सौंपा था. रामलला की अचल मूर्ति निर्माण के लिए नेपाल की गंडकी नदी समेत कर्नाटक, राजस्थान व उड़ीसा से उच्च गुणवत्ता वाले 12 पत्थर ट्रस्ट ने मंगाए थे. इन सभी पत्थरों की कई स्तरों पर जांच की गई तो कर्नाटक की श्याम शिला व राजस्थान के मकराना के संगमरमर शिला ही मूर्ति निर्माण के लायक मिली.
मकराना की शिला बहुत कठोर होती है और नक्काशी के लिए सर्वोत्तम होती है. इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है. वहीं कर्नाटक की श्याम शिला पर नक्काशी आसानी से होती है. इन दोनों शिलाओं पर हवा-पानी का असर नहीं होता और इनकी आयु लंबी होती है. इसके बाद देश के तीन प्रसिद्ध मूर्तिकारों को इन शिलाओं पर रामलला के बाल स्वरूप को जीवंत करने की जिम्मेदारी मिली. रामसेवक पुरम् में भारी सुरक्षा के बीच टिनशेड के भीतर मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय ने संगमरमर की शिला पर विग्रह तैयार किया. कर्नाटक की श्याम रंग की एक शिला पर मूर्तिकार गणेश भट्ट व दूसरी शिला पर अरुण योगीराज ने रामलला की अद्भुत छवि उकेरी है.
रामलला की मूर्तियां बनाने वाले तीनों मूर्तिकार अपने फन में माहिर हैं. मूर्तिकार अरुण योगीराज शिल्पी मैसूर के रहने वाले हैं. इनका परिवार पांच पीढ़ियों से मूर्ति बनाने के काम में लगा है. अरुण खुद एक हजार से ज्यादा मूर्तियां बना चुके हैं. इन्होने केदारनाथ में आदिशंकराचार्य की मूर्ति बनाई थी. इंडिया गेट पर स्थापित नेताजी की मूर्ति भी अरुण द्वारा बनाई गई है. इनके काम को लेकर कई बार पीएम ने अरुण की तारीफ की है.
अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के लिए बनीं तीन मूर्तियों में से अरुण ने रामलला की श्याम मूर्ति बनाई है. यह मूर्ति पांच साल के बाल स्वरूप की है. मूर्ति की ऊंचाई 51 इंच है. इसे बनाने में छह महीने लगे. इस बालरूपी मूर्ति के हाथ में धनुष और तीर बनाया गया है.
दूसरे मूर्तिकार सत्यनारायण पांडे राजस्थान के प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं. सत्यनाराणयण पारंपरिक कला, समकालीन महत्व के मिश्रण की मूर्तियां बनाते हैं. सत्यनारायण ने भी मकराना की शिला से भगवान राम के बाल स्वरूप की ही मूर्ति बनाई है. इस मूर्ति में भगवान राम मुस्कुरा रहे हैं. इस मूर्ति के जरिए सत्यनारायण ने कटिंग, पॉलिशिंग और फेसिंग की कला का बखूबी प्रदर्शन किया है.
तीसरे मूर्तिकार बेंगलुरू के रहने वाले गणेश भट्ट पिछले पांच दशकों से मूर्ति बना रहे हैं. गणेश देश विदेश में 100 से ज्यादा प्रदर्शनियों में भारतीय शिल्पकला का प्रदर्शन कर चुके हैं. इन्हें 50 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुका है. गणेश भट्ट ने भी भगवान राम की श्याम वर्ण मूर्ति बनाई है जिसकी उंचाई 4 फीट है. ये मूर्ति बाल स्वरूप में है. इसमें भगवान राम का मुस्कुराता चेहरा झलक रहा है. भगवान हाथ में धनुष लिए हुए हैं. राममंदिर के ट्रस्टी युगपुरुष परमानंद के मुताबिक रामलला की तीनों मूर्तियों को देखकर लगता है कि मूर्तिकारों ने रामायण व शास्त्रों का गहन अध्ययन करने के बाद इनका निर्माण किया है. तीनों मूर्तियों में रामलला की बाल सुलभ कोमलता झलक रही है.
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने 29 दिसंबर को रामलला की तीनों मूर्तियों के दर्शन किए और गुप्त मतदान के जरिए प्राण प्रतिष्ठा के लिए चयन की जाने वाली मूर्ति के संबंध में अपनी राय दी. मतदान का निर्णय ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के पास सुरक्षित रखा गया है. माना जा रहा है कि पांच से दस जनवरी के बीच मूर्ति चयन किए जाने का निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा. हालांकि ट्रस्ट के पदाधिकारी रामलला की मूर्ति के बारे में कोई जानकारी देने से इंकार करते हैं लेकिन ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि श्याम शिला से निर्मित रामलला की मूर्ति ही प्राण प्रतिष्ठा के लिए चयनित होगी. मूर्तिकार अरुण द्वारा निर्मित इस मूर्ति सबसे ज्यादा पसंद किया गया है.
नवनिर्मित रामलला की सर्वश्रेष्ठ चयनित मूर्ति को को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा. शेष दोनों मूर्तियां प्रथम तल व द्वितीय तल में स्थापित किए जाने की योजना है. रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पूजन के वक्त नेत्र मिलन की विधि होगी. इसके बाद ही भक्त रामलला के दर्शन कर पाएंगे. नेत्रमिलन की विधि में यजमान पीएम नरेंद्र मोदी मूर्ति के पीछे खड़े होकर और मूर्ति के सामने लगे दर्पण में देखते हुए सोने के तार से घी और शहद मिश्रित विशेष काजल मंत्रोच्चार के साथ मूर्ति के नेत्रों में लगाएंगे.
राममंदिर में रामलला के दो विग्रह स्थापित किए जाएंगे. एक विग्रह की स्थापना चल मूर्ति के रूप में तो दूसरे विग्रह की स्थापना अचल मूर्ति के रूप में होगी. अस्थाई मंदिर में विराजमान रामलला चल मूर्ति के रूप में पूजित-प्रतिष्ठित होंगे जबकि अचल मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है. अचल मूर्ति की कुल ऊंचाई 8.5 फीट होगी. मंदिर ट्रस्ट के एक पदाधिकारी बताते हैं कि ऊंचाई वैज्ञानिक के मत के आधार पर तय की गई है ताकि हर रामनवमी पर रामलला के मुख पर सूर्य की किरणें पड़ सकें, इसे लेकर वैज्ञानिकों के सुझाव पर ही मूर्ति की कुल ऊंचाई 8.5 फीट रहेगी ताकि तकनीकी रूप से रामलला का सूर्य रश्मियों से अभिषेक हो सके.

