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क्या राजस्थान में खेजड़ी बचाने की लड़ाई अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है?

राजस्थान के राज्यवृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने 2 फरवरी से आंदोलन चल रहा है और इसमें शामिल करीब 100 लोगों की तबीयत बिगड़ चुकी है

खेजड़ी के पेड़
अपडेटेड 10 फ़रवरी , 2026

फरवरी की तीन तारीख को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने खेजड़ी के पेड़ को रक्षा सूत्र बांधते हुए एक फोटो शेयर की और लिखा, ‘‘सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण’’ (अगर पेड़ को बचाने के लिए अपना सिर भी कटवाना पड़े तो भी यह सस्ता सौदा है). पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बात 2 फरवरी को राजस्थान के बीकानेर शहर में शुरू हुए खेजड़ी बचाओ आंदोलन का समर्थन करते हुए कही.

राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली अपनी ही BJP सरकार को आगाह करते हुए वसुंधरा ने यह भी कहा, ‘‘खेजड़ी कोई साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है. राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए और इसे बचाना चाहिए. मैं खेजड़ी और ओरण (गोचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूं.’’

वसुंधरा का यह बयान आते ही सरकार में हलचल हुई और 5 फरवरी को राजस्थान सरकार के केबिनेट मंत्री के.के.विश्नोई को आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए बीकानेर भेजा गया. संतों के साथ हुई बैठक के बाद के.के.विश्नोई ने मंच पर आकर कहा, ‘‘खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह गंभीर है. खेजड़ी बचाने के लिए सरकार लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है.’’ मंच से यह घोषणा होने के साथ ही आंदोलनकारियों के बीच अनशन समाप्त किए जाने की  चर्चाएं शुरू होने लगी मगर उसी वक्त आंदोलन के अगवा रामगोपाल विश्नोई ने खेजड़ी संरक्षण का कानून बनाए जाने तक अनशन जारी रखने का ऐलान कर दिया. ऐसे में राजस्थान सरकार के मंत्री के.के.विश्नोई को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा.

इसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण का कानून लाने की घोषणा कर दी. इंडिया टुडे ने खेजड़ी संरक्षण कानून के बारे में विशेषज्ञों से बातचीत की. सरकारी सूत्रों के मुताबिक खेजड़ी संरक्षण के प्रस्तावित कानून में दंड के कड़े प्रावधान होंगे. अब तक राजस्थान में खेजड़ी या अन्य हरा पेड़ काटने पर एक हजार रुपए के मामूली जुर्माने का प्रावधान है मगर नए कानून में खेजड़ी की अवैध कटाई को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाने की कवायद की जा रही है. इसके साथ ही जुर्माना राशि को दस गुना तक बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है.

इसके तहत पेड़ काटने पर अब एक हजार नहीं बल्कि 10 हजार रुपए का जुर्माना अदा करना पड़ेगा. इसके साथ ही कानून के तहत सरकारी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने पर भी कुछ जरूरी प्रावधान किए जाएंगे. इसके तहत एक पेड़ के बदले 10 नए खेजड़ी के पौधे लगाने और उन्हें पालने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग या एजेंसी की होगी.

राजस्थान में अब तक सख्त कानून नहीं होने के कारण खेजड़ी और अन्य पेड़ों की बेरोकटोक कटाई की जा रही थी. काबिलेगौर है कि पश्चिमी राजस्थान में बड़े पैमाने पर सोलर और विंड एनर्जी के प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं. इन प्रोजेक्ट की आड़ में खेजड़ी और अन्य वृक्षों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है. पर्यावरणविद् प्रो. अनिल कुमार छंगाणी के अनुसार, ‘‘पश्चिम राजस्थान में सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए अब तक 26 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं और अगले पांच साल में 40 लाख पेड़ ओर काटने की तैयारी की जा रही है. अगर पेड़ कटने से नहीं रोके गए तो पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा और पश्चिमी राजस्थान के विनाश को कोई नहीं रोक पाएगा.’’

खेजड़ी बचाओ आंदोलन के अगवा रामगोपाल विश्नोई कई साल से 'ट्री प्रोटेक्शन एक्ट' बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. विश्नोई का कहना है, “सरकार के आश्वासन केवल कागजों तक सीमित हैं. सरकार के आदेश जारी होने के बावजूद सोलर प्लांट क्षेत्रों में खेजड़ी सहित अन्य पेड़ों की कटाई लगातार जारी है. जब ज़मीन पर कटाई नहीं रुक रही तो हम सरकार पर भरोसा कैसे करें? जब तक कानून नहीं बनेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा.”

राजस्थान के राज्यवृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने 2 फरवरी से आंदोलन चल रहा है इसमें बड़ी संख्या में संत समाज के लोग भी शामिल हैं. 450 से ज्यादा लोग अनशन पर बैठे हैं. अब तक 100 से ज्यादा अनशनकारियों की तबीयत खराब हो चुकी है. विश्नोई धर्मशाला को अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है. गंभीर रुप से बीमार हुए कुछ लोगों को जोधपुर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आंदोलन के संयोजक परसराम विश्नोई ने चेतावनी दी है कि सरकार ने 16 फरवरी तक कानून की निर्धारित तिथि का ऐलान नहीं किया तो 17 फरवरी को बीकानेर में पांच लाख लोग अनशन पर बैठेंगे.

खेजड़ी बचाओ संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने, पेड़ काटने को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में शामिल करने, पेड़ों की अवैध कटाई पर तुरंत मुकदमा दर्ज करने और खेजड़ी संरक्षण को धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया जाने जैसे मुद्दे शामिल हैं.
  
बिश्नोई समुदाय के लोग पशु-पक्षी, खेजड़ी और अन्य रेगिस्तानी पौधों से बहुत प्रेम करते हैं तथा इनके संरक्षण के लिए वे किसी से भी टकरा सकते हैं. 1730 में जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी के हरे पेड़ बचाने के लिए अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने बलिदान दिया था. 'सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण' का नारा इसी आंदोलन से निकला था.

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