एक समय में अपनी फिरकी गेंदबाजी से दुनिया भर के बल्लेबाजों को नचाने वाले पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन 8 मार्च (शनिवार) को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में चर्चा का विषय थे. हालांकि, उस दिन सदन में सीधे तौर पर तो उनका नाम नहीं लिया जा रहा था, लेकिन विरोधी खेमे के कई विधायक मुरलीधरन को टारगेट कर प्रदेश सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे.
विपक्षी विधायकों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि मुरलीधरन की पेय पदार्थ कंपनी 'सीलोन बेवरेजेज' को बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने के लिए कठुआ जिले में मुफ्त में 25 एकड़ जमीन आवंटित की गई. उनका कहना था कि जब स्थानीय लोगों को पीएम आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए जमीन देने से मना कर दिया गया तो बाहरी लोगों को फ्री में जमीन क्यों दी गई?
हालांकि, इस मुद्दे पर केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुआई वाली सरकार ने कहा कि उसे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुरलीधरन की कंपनी सीलोन बेवरेजेज उन कई बड़े औद्योगिक घरानों में शामिल थी, जिन्हें पिछले साल कठुआ के भागथली औद्योगिक एस्टेट में जमीन आवंटित की गई थी. इससे जमीनी स्तर पर 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ.
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि सीलोन बेवरेजेस को कठुआ में 1,600 करोड़ रुपये की लागत से एल्युमीनियम के कैन्स बनाने और पेय पदार्थ भरने की इकाई स्थापित करने के लिए 206 कनाल (25.75 एकड़) जमीन दी गई है. पिछले साल जून में विभाग के साथ 40 सालों के लिए 'लीज डीड' पर हस्ताक्षर किए गए थे.
शनिवार को विपक्षी कांग्रेस और सीपीआई (एम) के कई विधायकों ने जारी बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान यह सवाल उठाया. मुरलीधरन का नाम लिए बिना सीपीआई (एम) के विधायक एमवाई तारिगामी ने प्रश्न पूछा कि, "एक श्रीलंकाई क्रिकेटर को जम्मू-कश्मीर में जमीन आवंटित की गई है. यह आवंटन कैसे किया गया?" कांग्रेस नेता मीर ने भी हस्तक्षेप करते हुए मामले को "गंभीर" बताया और कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि एक गैर-भारतीय क्रिकेटर को बिना एक पैसा खर्च किए जमीन कैसे उपलब्ध करा दी गई.
विधायकों की चिंताओं का जवाब देते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने कहा कि सरकार को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि किसी पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर को औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश में मुफ्त में जमीन उपलब्ध कराई गई. डार ने कहा, "यह राजस्व विभाग से जुड़ा मामला है. हमारे पास कोई जानकारी नहीं है, हम तथ्यों को जानने के लिए इसकी जांच करेंगे."
डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिशियल रिकॉर्ड से पता चलता है कि मुरलीधरन को वो भूमि 64 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से आवंटित की गई थी, जिसका वार्षिक पट्टा 60,000 रुपये था.
इस आवंटन की मंजूरी जून 2024 में जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लो की अध्यक्षता वाली शीर्ष स्तरीय भूमि आवंटन समिति द्वारा दी गई थी. असल में, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल प्रशासन ने प्रदेश में एक नई औद्योगिक और भू-नीति लागू की थी, जिसने जम्मू-कश्मीर में बाहरी निवेशकों के लिए दरवाजे खोल दिए थे. यह मंजूरी उसी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का हिस्सा थी.
इससे पहले तारिगामी के प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और समाज कल्याण विभाग मंत्री साकिन मसूद (इटू) ने बताया था कि भूमिहीन परिवारों को पीएम आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत आवासीय मकानों के निर्माण के लिए पांच मरला (1,355 वर्ग फीट) जमीन उपलब्ध कराई जा रही है.
उन्होंने बताया कि ये जमीनें राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन के बाद प्रदान की जाती है. उन्होंने कहा कि भूमिहीन परिवारों को पात्रता और योजना के दिशानिर्देशों के आधार पर समय-समय पर जारी किए जाने वाले भूमि आवंटन के लिए विचार किया जा सकता है.
डार ने बताया कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में पीएमएवाई-जी की आवास-प्लस श्रेणी के तहत राजस्व विभाग द्वारा 498 परिवारों को भूमि आवंटित की गई है, जबकि 442 मामलों पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि कुल 3,673 मामलों में से 2,727 मामले खारिज कर दिए गए.
विवाद के बाद मुरलीधरन की कंपनी ने निवेश से खींचा हाथ!
ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा में "मुफ्त" भूमि आवंटन मामले पर बवाल मचने के बाद मुरलीधरन की पेय पदार्थ कंपनी ने जम्मू-कश्मीर में निवेश से पीछे हटने का फैसला किया है. जम्मू-कश्मीर सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि सीलोन बेवरेजेज कैन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इस प्रोजेक्ट से हटने जा रही है.
आधिकारिक सूत्रों ने ईटीवी भारत को बताया कि कंपनी ने परियोजना से वापसी के लिए आवेदन दायर किया है. अब कंपनी पुणे में बॉटलिंग और कैन मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करेगी. सीलोन बेवरेजेज चेन्नई में पहले से ही रजिस्टर्ड है और मैसूर में एक इकाई संचालित कर रही है.
कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, सीलोन बेवरेजेज श्रीलंका की सबसे बड़ी पेय प्रसंस्करण, भराई और निर्यात करने वाली कंपनी है, जो कोका-कोला और नेस्ले जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को अनुबंध पर भराई सेवाएं प्रदान करती है.
सीलोन बेवरेजेज का मालिकाना हक मुख्य रूप से मुथैया मुरलीधरन के पास है. पिछले साल अप्रैल में कंपनी ने भारत में 'कैम्पा कोला' पेय पदार्थ के निर्माण और डिब्बाबंदी के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ साझेदारी की थी.

