झारखंड में 17 मई को विपक्ष के बाबूलाल मरांडी के लिखे एक पत्र ने तहलका मचा दिया. इसमें उन्होंने दावा किया कि रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद एक अल्पसंख्यक महिला कैदी गर्भवती हो गई है. उन्होंने इसका आरोप जेल सुपरिटेंडेंट कुमार चंद्रशेखर पर लगाया है.
बाबूलाल ने दावा किया है कि पीड़िता को बीमारी और इलाज के बहाने गुप्त स्थानों तथा अस्पतालों में ले जाकर गर्भ और फॉरेंसिक साक्ष्यों को नष्ट करने की साजिश रची जा रही है. जेल आईजी इस पूरे मामले को दबाने, फाइलों को गायब करने और संबंधित अधिकारियों को संरक्षण देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
अब इस मामले में झारखंड स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) ने संज्ञान लिया है. उसने डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डालसा) को जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा. 18 मई को जांच के बाद डालसा ने 19 मई की देर शाम रिपोर्ट सौंप दी है. मिली जानकारी के मुताबिक महिला कैदी ने पूछताछ में जांच कमेटी को घटना की पूरी जानकारी दी है. उसने बताया कि उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए हैं. पूछताछ में महिला कैदी ने घटना को अंजाम देने वाले रांची जेल में पदस्थापित दो लोगों के नाम भी टीम को बताए हैं.
पूछताछ के बाद महिला कैदी 17 मई की रात से ही खाना नहीं खा रही है. हालांकि जेल सुपरिटेंडेंट कुमार चंद्रशेखर ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने बस इतना कहा कि वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं. इधर डालसा के अलावा दो अन्य कमेटियां भी जांच कर रही हैं. एक कमेटी का गठन जेल आईजी सुदर्शन कुमार मंडल ने किया है जबकि दूसरी कमेटी का गठन रांची के जिलाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने किया है.
यह कोई पहला मामला नहीं है जब कुमार चंद्रशेखर पर इस तरह के आरोप लगे हैं. BJP के प्रवक्ता अजय शाह के मुताबिक इससे पहले साल 2019 में कोटा में पढ़ाने वाली राजस्थान की एक लड़की ने कुमार चंद्रशेखर पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. तब वे देवघर के जेल अधीक्षक थे. जांच में इन आरोपों की पुष्टि भी हुई थी लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस महिला ने दूसरी बार भी इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की थी और सबूत भी पेश किए थे.
वहीं, देवघर में एक होमगार्ड महिला ने भी उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. हजारीबाग जेल में कुख्यात अपराधी विकास तिवारी को संरक्षण और सहयोग पहुंचाने के मामले में भी वे दोषी पाए गए थे. हजारीबाग में एक सिपाही की पत्नी के शोषण के आरोप भी उन पर लगे थे.
BJP ने कहा- यह कस्टोडियल रेप है
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में हेमंत सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा, "कारागार के भीतर सुरक्षित रखी गई एक असहाय महिला कैदी का वहां के सर्वोच्च पद पर बैठे काराधीक्षक के द्वारा निरंतर मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप वह पीड़ित महिला वर्तमान में गर्भवती हो चुकी है. राज्य की जेलों के भीतर इस स्तर का अनाचार होना आपके शासनकाल की पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी प्रशासनिक नियंत्रण व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है जिसने पूरे झारखंड को देश के समक्ष कटघरे में खड़ा कर दिया है."
पत्र में यह भी लिखा गया है, "इस जघन्य और अक्षम्य संस्थागत अपराध की सूचना मिलने पर तुरंत कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने और अपराधियों को जेल भेजने के बजाय, आपके प्रशासनिक तंत्र के सर्वोच्च अधिकारी इस पूरे कुकृत्य को पूरी ताकत से दबाने में जुट गए हैं."
वहीं BJP प्रवक्ता अजय साह ने सवाल उठाया कि अगर पीड़ित महिला कैदी के साथ यौन शोषण नहीं हुआ था तो 17 मई को गर्भावस्था जांच कराने की जरूरत क्यों पड़ी? जेल के चिकित्सक के बयान से यह स्पष्ट होता है कि 14 अप्रैल को महिला गर्भवती थी. रांची के डीसी को अंतिम समय तक इस घटना की जानकारी नहीं होना साबित करता है कि प्रशासन का जेल पर कोई नियंत्रण नहीं बचा है. उन्होंने कहा, "बिरसा मुंडा जेल को अब माफिया सिंडिकेट चलाता है. जेल में अपराधियों को नृत्य, संगीत और शारीरिक सुख जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं." BJP ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए इसे राष्ट्रीय महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष ले जाने की बात कही है.
मथुरा रेप केस का उल्लेख करते हुए और बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए अजय साह ने इस घटना को 'कस्टोडियल रेप' बताया. उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला ड्रग मामले या किसी अन्य अपराध में जेल में है, तो क्या उसके यौन शोषण का लाइसेंस मिल जाता है?
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार नवंबर 2025 में भी काफी चर्चा में रहा था. तब जेल के अंदर कैदियों के डांस और मौज-मस्ती का वीडियो सामने आया था. इस वीडियो में शराब और जीएसटी घोटाले के हाई-प्रोफाइल आरोपी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते और डांस करते दिखाई दिए थे. इसके बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया था.
वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था. लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक जेलर देवनाथ राम और जमादार विनोद कुमार को निलंबित कर दिया गया था. इसके साथ ही जेल के सुरक्षा सिस्टम और अधिकारियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठे थे.

