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राजस्थान : वसुंधरा राजे अचानक हुईं सक्रिय! क्या है उनके बयानों की राजनीति?

राजस्थान में भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से गायब दिख रहीं वसुंधरा राजे अचानक अपने विरोधियों पर हमलावर हो गई हैं. पिछले कुछ दिनों से पूर्व मुख्यमंत्री की सक्रियता और बयानों ने उनके विरोधियों को सकते में ला दिया है

Former Rajasthan CM Vasundhara Raje Scindia
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया. (Photo: X/@VasundharaBJP)
अपडेटेड 8 जुलाई , 2025

पिछले ढाई दशक से भी लंबे समय से राजस्थान में बीजेपी की सियासत का मुख्य चेहरा रही वसुंधरा राजे इन दिनों अचानक सुर्खियों में हैं. राजस्थान में भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से नेपथ्य में चल रही वसुंधरा राजे अचानक अपने विरोधियों पर हमलावर हो गई हैं. पिछले कुछ दिनों से पूर्व मुख्यमंत्री की सक्रियता और बयानों ने उनके विरोधियों को सकते में ला दिया है. वे कभी शेर-ओ-शायरी तो कभी फिल्मी गीतों के बोल के जरिए अपने विरोधियों पर सियासी तंज कस रही हैं.

अजमेर में 6 जुलाई को बीजेपी के दिग्गज नेता रहे स्व. सांवरलाल जाट के मूर्ति अनावरण समारोह में वसुंधरा राजे ने कहा, ‘‘मौसम और इंसान कब बदल जाए, कोई भरोसा नहीं.’’ एक पुराने गीत के बोल दोहराते हुए राजे आगे यह भी बोलीं, ‘‘आजकल राजनीति में लोग नई दुनिया बसा लेते हैं, एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं.’’ वसुंधरा राजे ने राजस्थान में उनके विरोधी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘प्रो. सांवरलाल जाट स्वार्थी नेता नहीं थे, वो मरते दम तक मेरे साथ रहे. जाट जैसे अंदर थे वैसे ही बाहर थे. वो मेरी मदद को हमेशा तैयार रहते थे. प्रो. सांवरलाल जाट, दिगंबर सिंह और भैरोंसिंह शेखावत के नहीं रहने से बहुत नुकसान हुआ है.’’ 

इसी कार्यक्रम में जाते वक्त वसुंधरा राजे के समर्थकों ने जगह-जगह उनका स्वागत किया और उनके समर्थन में खूब नारे लगाए. दिलचस्प बात यह रही कि इस दौरान ये नारे भी लगे- ‘‘हमारी सीएम कैसी हो, वसुंधरा राजे जैसी हो’’ और ‘’केसरिया में हरा-हरा, राजस्थान में वसुंधरा’’. हैरानी की बात यह कि ये नारे उस समय लगाए गए हैं जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक सार्वजनिक मंच से यह कहा था कि भजनलाल शर्मा की कुर्सी खतरे में है. उनकी पार्टी के लोग ही उन्हें हटाने के लिए षड़यंत्र कर रहे हैं. 

राजनीतिक मामलों के जानकार योगेश शर्मा कहते हैं, ‘‘पिछले कुछ समय से वसुंधरा राजे प्रदेश के सियासी परिदृश्य से गायब हो गई हैं. ऐसे में इन बयानों के जरिए वे अपनी खोई हुई सियासी जमीन फिर पाना चाहती हैं. साथ ही वे अपने विरोधियों को यह सबक देना चाहती हैं कि प्रदेश की सियासत पर उनकी पकड़ अभी कमजोर नहीं हुई है.’’  

पिछले डेढ़ साल से वसुंधरा राजे बीजेपी की सक्रिय राजनीति से अलग-थलग नजर आ रही हैं. बावजूद इसके वे अपने विरोधियों पर गाहे-बगाहे हमला बोल ही देती हैं. राजस्थान में बीजेपी के संस्थापकों में से एक सुंदर सिंह भंडारी चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में वसुंधरा राजे ने मंच से यह कहा था, ‘‘सियासत में वफा का वो अलग दौर था, मगर आज लोग उसी की अंगुली काटने का प्रयास करते हैं, जिसे पकड़कर वे चलना सीखते हैं.’’

दूसरी तरफ वसुंधरा राजे के विरोधी समय-समय पर उनके पार्टी छोड़ने की अफवाहों को हवा देते रहते हैं. इन्हीं के जवाब में 26 जून को आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर आगरा में आयोजित एक कार्यक्रम में वसुंधरा राजे ने कहा, ‘‘मैं विजयराजे सिंधिया की बेटी हूं, हमेशा उनकी बताई राह पर चलूंगी. बीजेपी ही मेरा घर परिवार है, यहीं से मेरी अर्थी निकलेगी.’’

चार महीने पहले 8 मार्च को अपने जन्मदिन पर वसुंधरा राजे ने जैसलमेर के तनोटराय माता मंदिर में शत्रु विनाशक यज्ञ करवाकर सबको चौंका दिया था. इस यज्ञ के बाद प्रदेश में ये चर्चाएं होने लगी थीं कि वसुंधरा राजे के ऐसे कौन-से शत्रु हैं जिनके विनाश के लिए उन्हें देवी की शरण में जाना पड़ रहा है! इससे पहले 3 फरवरी को पाली जिले में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होकर लेकर लौटते समय सादड़ी में बीजेपी के मंडल प्रभारी ने जब कहा कि मैडम आप फिर से सीएम बन जाइए तो वसुंधरा राजे ने जवाब दिया था, “सीएम बनना मेरे हाथ में नहीं है.” 

बीजेपी के नए प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के शपथ ग्रहण समारोह में वसुंधरा राजे ने कहा था, ‘‘हर व्यक्ति की जिंदगी में तीन चीजें जरुर आती हैं पद, मद और कद. पद और मद कभी स्थायी नहीं होते मगर कद स्थायी होता है. यदि किसी को पद का मद हो जाए तो उसका कद कम हो जाता है. आजकल लोगों को पद का मद आ गया है.’’ इसी कार्यक्रम में वसुंधरा राजे ने कहा था, ‘‘राजनीति का दूसरा नाम है उतार-चढ़ाव. हर व्यक्ति को इस दौर से गुजरना पड़ता है.’’  

सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर के सम्मान में पिछले दिनों जयपुर में आयोजित अभिनंदन समारोह में राजे ने कहा था – ‘‘ओम माथुर चाहे कितनी ही बुलंदियों पर पहुंच गए लेकिन इनके पैर हमेशा जमीन पर ही रहते हैं. इसीलिए इनके चाहने वाले भी असंख्य हैं. वरना कई लोग ऐसे भी हैं जिनको पीतल की लौंग क्या मिल जाती है कि वे खुद को सर्राफ समझ बैठते हैं.’’

झालावाड़ में पानी की किल्लत पर वसुंधरा राजे अपनी ही सरकार को घेरने में पीछे नहीं रही. राजे ने कहा, ‘‘अफसर सो रहे हैं, जनता रो रही है, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी. पानी केवल कागजों में नहीं, लोगों के होठों तक भी पहुंचना चाहिए.’’

वसुंधरा राजे की इस बढ़ती सियासी सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरमा दिया है. कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या वसुंधरा राजे राजस्थान की सियासत को फिर से अपने रंग में बदलने की तैयारी कर रही हैं? 

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