scorecardresearch

अब राजस्थान इन्वेस्टमेंट का नया हब! कैसे पछाड़ा दक्षिणी राज्यों को?

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक निवेश के क्षेत्र में राजस्थान एक साल के भीतर ही आठवें स्थान से छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर आ गया है

bhajanlal sharma
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
अपडेटेड 6 मई , 2026

पानी की कमी, रेगिस्तानी भूगोल और सीमित उद्योगों के कारण पिछड़े निवेश क्षेत्र के तौर पर पहचाने जाने वाले राजस्थान ने अब आर्थिक दौड़ में बड़ी छलांग लगाई है. महज एक साल में राजस्थान ने निवेश के मामले में ऐसा उछाल दर्ज किया कि वह सीधे 8वें स्थान से तीसरे नंबर पर पहुंच गया. नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में निवेश के क्षेत्र में राजस्थान की इस ऊंची छलांग की सराहना की गई है.

इसके अनुसार साल 2023-24 तक राजस्थान में निवेश का आंकड़ा 1.10 लाख करोड़ रुपए था, जो अब करीब चार गुना बढ़कर 4.65 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. इस रिपोर्ट से यह भी तय हो गया है कि अब केवल पर्यटन और परंपरा ही राजस्थान की पहचान नहीं हैं, बल्कि उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी का भी वह नया पावरहाउस बनता जा रहा है.

पिछले एक साल में राजस्थान में निवेश राशि ही नहीं बढ़ी, बल्कि प्रोजेक्ट्स की संख्या में भी 57 फीसदी का उछाल आया है. साल 2024 में प्रदेश में 501 प्रोजेक्ट चल रहे थे, जो अब बढ़कर 873 तक पहुंच गए हैं. प्रोजेक्ट्स का बढ़ना यह साबित करता है कि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेज हुई हैं और विभिन्न क्षेत्रों में नई परियोजनाएं जमीन पर उतर रही हैं.

महाराष्ट्र और गुजरात जैसे औद्योगिक दिग्गज राज्यों से प्रतिस्पर्धा करते हुए राजस्थान का देश के टॉप-3 राज्यों में पहुंचना सूबे की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक माहौल में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. निवेश के मोर्चे पर राजस्थान ने केवल अपनी रैंकिंग ही नहीं सुधारी, बल्कि कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे परंपरागत औद्योगिक राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है.

राजस्थान में निवेश बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण राज्य में तेजी से विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर को माना जा रहा है. पिछले कुछ सालों में प्रदेश में सड़क, परिवहन और औद्योगिक कनेक्टिविटी पर बड़े स्तर पर काम हुआ है. राजस्थान में निवेश बढ़ाने में दो बड़े प्रोजेक्ट्स की अहम भूमिका बताई जा रही है. उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के नेतृत्व वाले सार्वजनिक निर्माण विभाग में 57 हजार करोड़ रुपए के आठ मेगा हाईवे प्रोजेक्ट्स के कारण निवेश में यह ऊंची छलांग दर्ज की गई है. मेगा हाईवे के इन प्रोजेक्ट्स ने देशभर के निवेशकों को राजस्थान की तरफ आकर्षित किया. राजस्थान में तेजी के साथ विकसित हुए बेहतर सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी ने उद्योगों के लिए राजस्थान को रणनीतिक रूप से अधिक उपयोगी बना दिया है.

राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स भी प्रदेश की इस आर्थिक उड़ान का बड़ा आधार बने हैं. हालांकि, राजस्थान पहले से ही सौर ऊर्जा उत्पादन में देश का अग्रणी प्रदेश रहा है, मगर पिछले एक वर्ष में इस सेक्टर में भारी निवेश आया है. एसीएमई क्लीनटेक सॉल्यूशन्स समेत कई बड़ी कंपनियों ने हजारों करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव दिए. प्रदेश में भूमि की उपलब्धता, साल में 310 से 325 दिनों तक तेज धूप और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों ने राजस्थान को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है.

राज्य सरकार की नई औद्योगिक और निवेश नीतियों को भी इस बदलाव का अहम कारण माना जा रहा है. राज्य की मौजूदा भजनलाल सरकार ने एमएसएमई नीति-2024, निर्यात प्रोत्साहन नीति, लॉजिस्टिक नीति, टेक्सटाइल नीति और डेटा सेंटर नीति जैसी कई नई नीतियां लागू की हैं, जिनसे निवेशकों का ध्यान खींचा गया है. सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में भी राजस्थान में काफी काम हुआ है.

भजनलाल सरकार की ओर से 9-11 दिसंबर 2024 तक आयोजित की गई ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ भी निवेश की सफलता का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी है. इस समिट में देश-विदेश के निवेशकों ने 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिए थे. सरकार का दावा है कि इनमें से करीब 6 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू भी हो चुका है. इस समिट की खास बात यह रही कि इसमें हुए एमओयू केवल कागजों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनकी लगातार मॉनिटरिंग की गई और कई परियोजनाएं धरातल पर उतरने लगीं.

केंद्र सरकार की ओर से मिले सहयोग ने भी राजस्थान की विकास रफ्तार को बल दिया है. अमृत योजना के बजट में 2,341 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बढ़ोतरी, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और विभिन्न आधारभूत परियोजनाओं के लिए सहायता ने प्रदेश में निवेश माहौल को और मजबूत किया है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अब "विकसित राजस्थान @2047" विजन के तहत राज्य को 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं. सरकार औद्योगिक विकास के साथ रोजगार सृजन, स्टार्टअप्स, पर्यटन, ग्रीन एनर्जी और शहरी विकास पर समान रूप से फोकस कर रही है.

देखा जाए तो राजस्थान की यह छलांग केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है. यह उस बदलती आर्थिक सोच का संकेत है, जिसमें अब प्रदेश खुद को केवल खनिज, पर्यटन या कृषि आधारित राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, ऊर्जा और निवेश के नए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.

Advertisement
Advertisement