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राजस्थान में नेता और अधिकारी लड़ते-झगड़ते क्यों दिख रहे हैं?

बीते साल ऐसे कई मौके आए जब विधायकों से लेकर मंत्रियों तक की सार्वजनिक जगहों पर अधिकारियों से बहसबाजी हुई

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (फाइल फोटो)
अपडेटेड 3 जनवरी , 2026

साल 2025 का आखिरी दिन था और जगह थी सीकर का जिला परिषद कार्यालय. जिले के प्रभारी मंत्री संजय शर्मा वहां चल रहे शिविर का औचक निरीक्षण करने आए थे. इस दौरान किसी पीड़ित ने मंत्री को ज्ञापन देकर उनका काम नहीं होने की शिकायत की. 

उसी वक्त सीकर जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा उस संबंध में मंत्री को कुछ जानकारी देने लगे तो वे उखड़ गए और कलेक्टर को सार्वजनिक मंच से ही लताड़ना शुरू कर दिया. मंत्री ने तैश में आकर हाथ में थामे हुए कागज फेंक दिए और कलेक्टर से कहा, ''आप करोगे क्या सारे निर्णय, हम किसी की सुनेंगे नहीं क्या. यह क्या तरीका है आपका, मुझे निर्देश देने वाले आप कौन होते हैं,  इस मामले में मैं सीएम से बात करूंगा.'' माहौल में अचानक तनाव पसर गया हालांकि लोग इस घटना से ज्यादा हैरान नहीं हुए क्योंकि राजस्थान में इन दिनों सत्ता और प्रशासन के बीच संवाद की जगह टकराव अब कोई नई बात नहीं है. 

कुछ ऐसा ही नजारा 7 दिसंबर 2025 को बाड़मेर जिले की रामसर पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक में दिखा. साफ-सफाई के मसले पर स्थानीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) आमने-सामने हो गए. विधायक ने अपने फोन में गंदगी के वीडियो दिखाते हुए विकास अधिकारी से पूछा था कि जब पंचायत समिति कार्यालय के पीछे ही गंदगी के ढेर लगे हैं तो सफाई के पैसे कहां जा रहे हैंॽ इस पर अधिकारी ने दावा किया कि यह किसी शादी में बचे हुए खाने की गंदगी है. 

भाटी ने जब साफ-सफाई के टेंडर और भुगतान का ब्यौरा मांगा तो बीडीओ ने कहा कि आज छुट्टी है, अकाउंटेंट ऑफिस नहीं आया है, इसलिए टेंडर और भुगतान के कागज नहीं मिलेंगे. इस पर विधायक ने कहा - हम यहीं बैठे हैं, जब कागज आ जाएंगे तभी जाएंगे. इसके बाद काफी समय तक विधायक और बीडीओ के बीच बहस चलती रही. 

राजस्थान में साल 2025 के गुजरते लम्हे सियासत और नौकरशाही के बीच गहरी तल्खी छोड़ गए.  बीते कुछ महीनों में मंत्री, विधायक और अफसर खुले मंचों पर जिस तरह आमने-सामने आए, उसने प्रशासनिक संतुलन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 16 नवंबर 2025 को श्रीगंगानगर जिले के गंगासिंह चौक पर विधायक और कलेक्टर के बीच काफी समय तक नोक-झोंक हुई. मामला इतना बढ़ गया कि विधायक ने कलेक्टर को शिष्टाचार सीखने की नसीहत दे डाली. दरअसल, सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150 जयंती के अवसर पर 16 नवंबर को जिले में यूनिटी मार्च का आयोजन किया गया था. 

उस कार्यक्रम के लिए विधायक जयदीप बिहाणी वहां तय समय पर पहुंच गए मगर उन्हें कोई अफसर नजर नहीं आया. इसी दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर (एडीएम) सुभाषचंद्र उनके सामने आए तो विधायक ने गुस्से में पूछा कि यह कोई वक्त है आने काॽ इस पर एडीएम ने विधायक से जब यह कहा कि मुझे यहां नहीं रहना, आप मेरा तबादला करवा दीजिए, तो विधायक ओर गुस्सा हो गए. कुछ समय बाद ही कलक्टर डॉ. मंजू वहां पहुंची तो विधायक ने गुस्से में कहा - एमएलए क्या होता है यह समझ लेना आप, लगता है आपको डेकोरम समझाना पड़ेगाॽ इसके बाद कलेक्टर और विधायक के बीच काफी समय तक बहस होती रही. इन घटनाओं पर प्रशासनिक मामलों के जानकार गजेंद्र सिंह फोगाट कहते हैं, ''राजस्थान में जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच बढ़ते विवाद सत्ता और प्रशासन के बीच घटते आपसी विश्वास का संकेत हैं. जब विवाद बंद कमरों की बजाय सार्वजनिक मंचों पर सुलझाए जाने लगें समझ लेना चाहिए कि शासन व्यवस्था की डोर कमजोर हो रही है.'' 

जनप्रतिनिधियों पर जनसमस्याओं के तुरंत निराकरण का दबाव भी ऐसे मामलों को हवा दे रहा है. मसलन, 23 सितंबर 2025 को वन मंत्री संजय शर्मा जब नीम का थाना में चल रहे शहरी सेवा शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे तो उस वक्त वहां एसडीएम और तहसीलदार की जगह सिर्फ एक जेईएन (जूनियर इंजीनियर) ही मौजूद था. इस पर मंत्री भड़क उठे और वहां मौजूद कर्मचारियों को जमकर डांट पिलाई. कुछ ऐसा ही नजारा 7 सितंबर 2025 को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के जोधपुर दौरे के दौरान दिखाई पड़ा. मंत्री ने एक गांव में साफ-सफाई नहीं होने से नाराज होकर एक बीडीओ की क्लास लगा दी. मदन दिलावर ने बीडीओ से पूछा था कि मंडोर पंचायत समिति के सडेल की ढाणी गांव में साफ-सफाई की क्या स्थिति हैॽ इस पर बीडीओ ने कहा कि वहां हर दिन साफ-सफाई होती है और कचरे की गाड़ी जाती है. इस पर मंत्री भड़क गए और कहा - इस बीडीओ से झूठा आदमी मैनें दुनिया में नहीं देखा. मैं आज ही वहां जाकर आया हूं, वहां कभी साफ-सफाई नहीं हुई, कभी कचरे की गाड़ी नहीं आई. 

ऐसा भी नहीं है कि जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच इसी सरकार में विवाद हो रहे हैं. राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के वक्त भी मंत्रियों और अफसरों के बीच विवादों की गहरी खाई नजर आई थी. तत्कालीन खेल मंत्री अशोक चांदना ने तो यहां तक कह दिया था कि उनकी विभाग में कुछ नहीं चलती, सारा काम मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका देखते हैं. तत्कालीन खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचिरयावास ने जयपुर के कलक्टर अतर सिंह नेहरा पर जनप्रतिनिधियों को सम्मान नहीं दिए जाने के आरोप लगाए थे. पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा अरोड़ा, जलदाय मंत्री बीडी कल्ला और विभाग के प्रमुख सचिव संदीप शर्मा, खान मंत्री प्रमोद जैन भाया व आईएएस गौरव गोयल, महेश जोशी और विभाग के प्रमुख सचिव सुधांश पंत के बीच विवादों की खबरें सुर्खियों में रही थी.

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