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राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतें क्यों बन रहीं राजनीतिक मुद्दा?

तेलंगाना और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला वेट और सेस सबसे ज्यादा है यानी कीमत बढ़ने पर सरकार की कमाई लगातार बढ़ रही है

Petrol Diesel Price Hike
सांकेतिक फोटो
अपडेटेड 27 मई , 2026

राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें अब सिर्फ आम आदमी की जेब पर बोझ नहीं डाल रहीं, बल्कि सरकार की कमाई का बड़ा जरिया बन गई हैं. तेल की हर नई बढ़ोतरी के साथ जहां जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं राज्य सरकार की वैट से होने वाली कमाई भी रोज करोड़ों रुपए बढ़ रही है.

हालात यह हैं कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स और सेस से सरकार को प्रतिदिन करीब 100 करोड़ रुपए का राजस्व मिल रहा है और पिछले 12 दिनों में तेल के दामों में चार बार हुई बढ़ोतरी के बाद हर दिन 3.5 से 4 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय अलग से हो रही है.

राजस्थान में फिलहाल पेट्रोल पर 29.04 प्रतिशत वैट और डीजल पर 17.30 प्रतिशत वैट लगाया जा रहा है. इसके अलावा रोड डेवलपमेंट सेस के नाम पर पेट्रोल पर 1.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 1.75 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं. यह टैक्स प्रतिशत आधारित होने के कारण जैसे-जैसे तेल कंपनियां बेस प्राइस बढ़ाती हैं, वैसे-वैसे सरकार की टैक्स से होने वाली आय भी अपने आप बढ़ जाती है.

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक प्रदेश में हर साल करीब 612 करोड़ लीटर डीजल और 276 करोड़ लीटर पेट्रोल की बिक्री होती है. यानी सूबे में रोजाना लगभग 1.68 करोड़ लीटर डीजल और 76 से 80 लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती है. इसी भारी खपत की वजह से तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी सरकार के राजस्व में करोड़ों रुपए का इजाफा कर देती है. एसोसिएशन का दावा है कि वर्तमान में सरकार को पेट्रोल-डीजल से हर दिन करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिल रहा है जबकि हालिया मूल्य वृद्धि के कारण प्रतिदिन लगभग 3.5 से 4 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय अलग से होने लगी है.

आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल को पेट्रोल और डीजल से सरकार को प्रति लीटर करीब 39.51 रुपए राजस्व मिल रहा था, जो 15 मई तक बढ़कर 40.70 रुपए और 19 मई तक 41.04 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया. पेट्रोल पर वैट संग्रह 23.22 रुपए से बढ़कर 24.17 रुपए और डीजल पर 13.04 रुपए से बढ़कर 13.62 रुपए प्रति लीटर हो गया है. यानी तेल के हर दाम बढ़ने के साथ सरकार की कमाई भी बढ़ती चली गई. देश में तेलंगाना और मध्य प्रदेश ही ऐसे राज्य हैं जहां पेट्रोल व डीजल पर वैट और सेस राजस्थान से ज्यादा है.

पिछले 11 से 12 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है. इस दौरान पेट्रोल करीब 7.94 रुपए और डीजल 7.57 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया. जयपुर में पेट्रोल 112 से 114 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है, जबकि डीजल भी 97 से 99 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है.

राजस्थान का श्रीगंगानगर देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहां पेट्रोल व डीजल के दाम सबसे ज्यादा हैं. 27 मई को श्रीगंगानगर में पेट्रोल 114.16 रुपए प्रति लीटर और डीजल 99.31 रुपए प्रति लीटर था. हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम के बाद श्रीगंगानगर में देश का सबसे महंगा तेल बिक रहा है. तेलंगाना के हैदराबाद में पेट्रोल 115.73 रुपए और डीजल 103.82 रुपए प्रति लीटर, केरल के तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 115.49 रुपए प्रति लीटर और डीजल 104.41 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है.

तेल महंगा होने के कारण राजस्थान के अन्य राज्यों से सटे सीमावर्ती जिलों में पेट्रोल व डीजल की तस्करी भी बड़े पैमाने पर हो रही है. हरियाणा में वैट की दर राजस्थान से कम होने के कारण पेट्रोल 9 रुपए व डीजल करीब 4 रुपए सस्ता है. इसी तरह पंजाब में डीजल 2 रुपए और पेट्रोल 7 रुपए सस्ता है. इसी तरह गुजरात में पेट्रोल 11 रुपए और डीजल 2 से 5 रुपए सस्ता है. इसी वजह से सीमावर्ती राज्यों से सटे लोग राजस्थान की जगह दूसरे राज्यों से पेट्रोल व डीजल भरवाते हैं. राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का दावा है कि अन्य राज्यों से तेल महंगा होने के कारण इन क्षेत्रों में कई पेट्रोल पंपों की बिक्री प्रभावित हुई है और कुछ पंप बंद हो चुके हैं.

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव शशांक कोरानी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर वैट में कटौती की मांग की है. शशांक कोरानी कहते हैं, "अगर कीमतों में और बढ़ोतरी हुई तो आमजन पर बोझ और बढ़ेगा. 1 जून तक यदि सरकार ने हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और पेट्रोल पंपों की हड़ताल भी शुरू की जा सकती है." संगठन ने इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम समेत संबंधित विभागों को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है.

तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों के जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है. परिवहन महंगा होने से फल-सब्जियां, राशन, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की लगभग हर वस्तु की कीमत बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल महंगा होने का सीधा असर महंगाई दर पर पड़ता है क्योंकि माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा डीजल आधारित परिवहन पर निर्भर है.

राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा अब गर्माने लगा है. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है, "भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर वाहनों का काफिला घटाने, ट्रेन, बस में सफर जैसे नाटक बंद कर पेट्रोल व डीजल की कीमतें घटाने के प्रयास करने चाहिए. राज्य सरकार अगर अपना मुनाफा ही घटा दे तो जनता को बहुत राहत मिलेगी."

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, "कांग्रेस नेताओं को पेट्रोल-डीजल के दामों पर बोलने का हक नहीं है क्योंकि अशोक गहलोत सरकार ने वैट बढ़ाकर 36 प्रतिशत तक कर दिया था. दूसरे देशों में तेल की कीमतों को लेकर हाहाकार मचा है मगर हमारी केंद्र सरकार ने देश को संभाला है."

कुल मिलाकर राजस्थान में पेट्रोल-डीजल अब सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि राजनीति, महंगाई और टैक्स नीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है. सवाल यह है कि क्या राज्य की भाजपा सरकार जनता की बढ़ती नाराजगी और महंगाई के दबाव के बीच वैट में कटौती कर राहत देगी या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ जनता पर बोझ और बढ़ता जाएगा?

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