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राजस्थान में दो जिलों की सीमाएं बदलने का फैसला कैसे बदलेगा थार की राजनीति?

राजस्थान सरकार ने बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में जो फेरबदल किया है उससे इन इलाकों में BJP को कांग्रेस पर बढ़त मिलने की संभावना है

भजनलाल शर्मा (फाइल फोटो)
CM भजनलाल शर्मा (फाइल फोटो)
अपडेटेड 9 जनवरी , 2026

राजस्थान के बाड़मेर और बालोतरा जिलों का भूगोल बदलने को लेकर थार की सियासत गरमा गई है. भजनलाल सरकार की ओर से 31 दिसंबर 2025 की रात दोनों जिलों की सीमाएं तय करने का एक आदेश जारी किया गया, इसी को लेकर इन इलाकों में राजनीतिक गुबार उठा हुआ है. 

दरअसल इस फैसले से सत्ताधारी BJP ने सीमाओं के पुनर्गठन के जरिए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की है. सरकार के इस फैसले के पीछे आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की छाया भी नजर आ रही है.

सरकार का दावा है कि यह फैसला प्रशासनिक वजहों से लिया गया है हालांकि इसमें सियासी कारण ज्यादा नजर आते हैं. दरअसल बाड़मेर संसदीय क्षेत्र व गुढ़ामालानी, बायतु और बालोतरा विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के सियासी गढ़ रहे हैं. बायतु में कांग्रेस के हरीश चौधरी, गुढ़ामालानी में हेमाराम चौधरी और बालोतरा में मदन प्रजापत मजबूत नेता हैं. बाड़मेर और बालोतरा की सीमाएं तय करने से अब बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र का भी भूगोल बदल जाएगा. इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का वोट बैंक रहे धोरीमन्ना, गुढ़ामालानी, गिड़ा, कल्याणपुर और पाटोदी जैसे इलाके अब बालोतरा में शामिल हो जाएंगे. 

राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने साल 2023 में 17 नए जिलों का गठन किया था उसमें बालोतरा को भी नया जिला घोषित किया गया था. उस समय बायतु तहसील को बालोतरा में शामिल किया गया था जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बाड़मेर जिले में ही रखा गया. थार की राजनीति के जानकार दिनेश बोहरा कहते हैं. ''बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं का पुनर्निधारण दरअसल BJP की सीट बचाओ और सीट बनाओ रणनीति का हिस्सा नजर आता है. इस  बदलाव से पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं. जाट, मेघवाल और मुस्लिम (JMM) मतदाताओं के समर्थन से यह सीट कांग्रेस का गढ़ बन गई थी मगर अब पुनर्गठन से इन वोटों में जो सेंध लगाई गई है उसका असर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में स्पष्ट तौर पर दिखाई देगा.'' 

सीमाओं के पुनर्गठन को बाड़मेर–जैसलमेर संसदीय क्षेत्र की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है. BJP की कोशिश रही है कि इस विशाल और रणनीतिक रूप से अहम लोकसभा सीट को अपना स्थाई गढ़ बनाया जाए. फिलहाल इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. इस संसदीय क्षेत्र के अधीन 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें से 5 पर BJP का कब्जा होने के बाद भी इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी. इसकी मुख्य वजह बायतु, गुढ़ामालानी और बालोतरा जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस को मिली बड़ी बढ़त थी.  

गुढ़ामालानी विधानसभा क्षेत्र हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है. आजादी के बाद से ही BJP को इस सीट पर सिर्फ दो बार जीत मिली है बाकी समय कांग्रेस का कब्जा रहा है. इसी तरह बायतु विधानसभा क्षेत्र भी कांग्रेस का गढ़ बन गया है. 

बायतु से कांग्रेस के हरीश चौधरी विधायक हैं. बायतु के जाट बहुल क्षेत्र गिडा और पाटोदी को बालोतरा में शामिल किया गया है वहीं बायतु शहर को बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है. राजनीतिक जानकार इसे जाट राजनीति पर भी प्रहार बता रहे हैं. बोहरा कहते हैं, ''पश्चिमी राजस्थान में जाट समुदाय की राजनीति लंबे समय से निर्णायक रही है. हरीश चौधरी जैसे नेता न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि प्रदेश स्तर पर जाट राजनीति का चेहरा रहे हैं. सीमा पुनर्गठन हरीश चौधरी जैसे नेताओं का सियासी कद कमजोर करने की रणनीति भी है.''   

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां त्रिकोणीय मुकाबले में BJP के पूर्व मंत्री कैलाश चौधरी को हराया था. यही वजह है कि इस पुनर्गठन के जरिए उन इलाकों को अलग किया गया जो कांग्रेस का सियासी गढ़ रहे हैं. इन इलाकों को अलग किए जाने और कुछ नए हिस्से जोड़ने से जातीय और क्षेत्रीय समीकरण BJP के पक्ष में आएंगे और लोकसभा व विधानसभा चुनावों में इसका सीधा लाभ BJP को मिलेगा. 

सरकार भले ही जो दावा करे लेकिन जिला चयन मापदंडों के अनुसार भी उसका यह फैसला अव्यवहारिक नजर आता है क्योंकि गुढ़ामालानी और धोरीमन्ना जैसे क्षेत्रों की दूरी अब जिला मुख्यालय से बढ़ जाएगी. जबकि जिलों का गठन करते हुए पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने यह दावा किया था कि अब जिला मुख्यालयों के बीच अधिकतम दूरी 100 किलोमीटर से कम रहेगी. 

धोरीमन्ना को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा में शामिल किए जाने से अब वहां की जिला मुख्यालय से दूरी 122 किलोमीटर हो जाएगी. अगर धोरीमन्ना तहसील के अंतिम गांव की दूरी देखें तो वह 150 किलोमीटर से भी ज्यादा होगी. पहले धोरीमन्ना तहसील बाड़मेर जिले का हिस्सा थी जिसकी जिला मुख्यालय से दूरी 68 किलोमीटर है. इसी तरह गुढ़ामलानी की बाड़मेर जिला मुख्यालय से दूरी 75 किलोमीटर थी मगर अब उसे बालोतरा जिले में शामिल किए जाने से यह दूरी 103 किलोमीटर हो जाएगी. सरकार के इस फैसले पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं, ''बायतु को बाड़मेर और गुढ़ामालानी व धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने का फैसला तुगलकी फरमान है. इस फैसले से धोरीमन्ना और गुढ़ामालानी की जिला मुख्यालयों से दूरी घटने की जगह ओर बढ़ जाएगी जो आमजन के साथ घोर अन्याय है. '' 

इधर, सीट बचाने की लड़ाई 

BJP के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है. थार में कांग्रेस के दिग्गज नेता हेमाराम चौधरी पुनर्गठन के विरोध में सड़क पर उतर आए हैं. जिलों की सीमाओं का पुनर्गठन वापस लेने की मांग को लेकर 75 वर्षीय कांग्रेसी नेता हेमाराम चौधरी ने धोरीमन्ना तहसील मुख्यालय पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया है. हेमाराम चौधरी का कहना है, ''यह आंदोलन राजनीतिक नहीं बल्कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है. जनता को जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर दूर कर देना जन विरोधी फैसला है.''

बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु विधायक हरीश चौधरी भी सरकार के इस फैसले की मुखालफत कर रहे हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है जनता की राय लिए बिना किया गया यह बदलाव लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है.

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