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सीबीआई अदालत में सुनवाई से एक दिन पहले BJP में क्यों शामिल हुए पूर्व BJD सांसद

बीजू जनता दल (BJD) के नेता रवींद्र कुमार जेना 11 मार्च को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. उन पर करीब 600 करोड़ रुपए के कथित पोंजी स्कीम घोटाले में शामिल होने का आरोप है

Rabindra jena with CM Mohan charan majhi
BJP में शामिल होने के बाद रवींद्र कुमार जेना मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ
अपडेटेड 13 मार्च , 2026

ओडिशा के बालासोर के पूर्व सांसद और बीजू जनता दल (BJD) के नेता रवींद्र कुमार जेना 11 मार्च को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. यह घटनाक्रम उनके सीबीआई अदालत में पेश होने से ठीक एक दिन पहले हुआ है. सीबीआई ने ओडिशा के 'सीशोर चिटफंड घोटाले' में कथित संलिप्तता को लेकर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.

10 मार्च को इस्तीफा देने के बाद अगले दिन BJP में शामिल होते हुए जेना ने कहा, “ओडिशा के साथ-साथ पूरे भारत के विकास की क्षमता केवल BJP में है.” इस्तीफे पर पहले उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया, लेकिन बाद में आरोप लगाया कि नवीन पटनायक ने अगली पीढ़ी तैयार नहीं की. उन्होंने कहा, "किसी क्षेत्रीय दल के लिए नई पीढ़ी के नेताओं को नेतृत्व सौंपे बिना टिके रहना मुश्किल होता है." जेना ने दावा किया कि उन्होंने यह मुद्दा कई बार पार्टी नेतृत्व के सामने उठाया था, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला. जेना के साथ बस्ता और बालासोर ब्लॉक के अध्यक्षों के अलावा जिले के छह जिला परिषद सदस्यों ने भी BJP का दामन थाम लिया है.

इधर, 12 मार्च को सीबीआई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व सांसद को अंतरिम संरक्षण जारी रखने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति विभु प्रसाद राउताराय ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई को 17 दस्तावेजों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को निर्धारित की गई है. बता दें कि 21 जुलाई 2025 को ओडिशा हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था और निर्देश दिया था कि अगर वे जांच में सहयोग करते हैं, तो उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

जेना ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी. कहा जाता है कि वे साल 2009 में ही लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उस वक्त कांग्रेस ने उनकी जगह श्रीकांत जेना को टिकट दिया था. इसके बाद वे BJD में शामिल हुए और साल 2014 में बालासोर लोकसभा सीट जीती. पांच साल बाद 2019 में वे BJP के प्रताप सारंगी से यह सीट हार गए थे. 2024 के आम चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, हालांकि उनकी पत्नी सुबासिनी जेना को विधानसभा का टिकट दिया गया. वे वर्तमान में पार्टी की विधायक हैं.

क्या है सीशोर चिटफंड घोटाला और जेना का कनेक्शन

ओडिशा का सीशोर चिटफंड घोटाला एक बड़ा पोंजी स्कीम धोखाधड़ी मामला है, जिसमें निवेशकों से अनुमानित 578 करोड़ से 650 करोड़ रुपए जुटाए गए थे. यह पैसा सेबी या आरबीआई जैसे नियामक संस्थानों की अनुमति के बिना लिया गया था. सीशोर ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीएमडी प्रशांत दास ने निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर हजारों लोगों को ठगा था. साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. जांच के दौरान सीशोर ग्रुप के निदेशक प्रभात कुमार दास, पूर्व BJD विधायक प्रभात बिस्वाल और रवींद्र कुमार जेना को गिरफ्तार किया गया था. जेना पर आरोप है कि साल 2011-12 में उन्होंने सीशोर कंपनी से लगभग 1 करोड़ 75 लाख रुपए का ऋण लिया था.

कटक स्थित 'ओडिशा प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स' (OPID) कोर्ट ने सीशोर ग्रुप की 650 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है. इसमें 197 एकड़ जमीन, सोना और चांदी शामिल हैं. इस मामले में कई आरोप तय किए जा चुके हैं और सीबीआई ने 2018 व 2023 में भी चार्जशीट दाखिल की है. ओडिशा हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद रवींद्र कुमार जेना के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिससे उनके खिलाफ जांच जारी है.

क्या सीबीआई जांच से बच निकलने के लिए आप BJP में शामिल हुए हैं?

इस सवाल पर रविंद्र जेना कहते हैं, “ये बचकानी बातें हैं, जिन पर चर्चा करना बेकार है. 12 साल से अधिक पुराने मामले की आज कोई प्रासंगिकता नहीं है. हमने एजेंसी (सीबीआई) के खिलाफ अपना पक्ष रखा है और सीबीआई भी इस मामले को अदालत में नियमित रूप से आगे बढ़ा रही है. हर महीने हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई होती है. दो मामलों का निपटारा हो चुका है. एक में सीबीआई की जीत हुई है और दूसरे में हमारी. जो मामले अभी न्यायालय में लंबित हैं, उन पर अंतिम फैसला आने के बाद हम विस्तार से जानकारी देंगे.”

वे आगे कहते हैं, “मैं चाहता तो पहले भी BJP में शामिल हो सकता था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में मैंने ऐसा नहीं किया. आलोचकों और विरोधियों के तर्कों का कोई आधार नहीं है, लोग उनकी बातों पर हंस रहे हैं. मैं सस्ती राजनीति में नहीं पड़ना चाहता. समय आने दीजिए, सब कुछ साफ हो जाएगा.”

क्या राज्यसभा चुनाव में हो सकता है खेल

कांग्रेस नेता अमीय पांडव कहते हैं, “यह पूरी तरह केवल पैसों का खेल है. भ्रष्ट लोगों को पता है कि जब तक वे BJP में नहीं जाएंगे, सुरक्षित नहीं रह पाएंगे. जेना केवल अपने पैसे और व्यापार को सुरक्षित करने के लिए BJP में शामिल हुए हैं. वे प्रतीक कंस्ट्रक्शन सहित कई अन्य बिजनेस चलाते हैं.” साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए हलफनामे के मुताबिक रविंद्र जेना की कुल घोषित संपत्ति 72 करोड़ रुपए थी.

पांडव एक अहम बात की तरफ इशारा करते हैं, “ओडिशा में अब हर कोई जानता है कि उनकी पत्नी भले ही BJD से विधायक हैं, लेकिन आगामी राज्यसभा चुनाव में वे BJD-कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की जगह प्रत्यक्ष रूप से BJP समर्थित प्रत्याशी और कारोबारी दिलीप राय को ही वोट करेंगी. जेना दावा कर रहे हैं कि 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी. वे इसे राजनीति का टर्निंग पॉइंट बता रहे हैं.”

क्या पार्टी लाइन से अलग जाकर सुबासिनी जेना के लिए विपक्षी प्रत्याशी को वोट करना आसान होगा? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे ऐसा कर सकती हैं. अगर BJD उनके खिलाफ कार्रवाई करती है और उनकी सदस्यता जाती है, तो उपचुनाव का रास्ता खुला है. मशीनरी और माहौल फिलहाल BJP के पक्ष में है, जिससे वे दोबारा चुनकर आ सकती हैं.

क्या BJD इस संभावित खतरे से बच पाएगी?

पार्टी प्रवक्ता लेनिन मोहंती कहते हैं, “कोई खतरा नहीं है. जिस खतरे की बात की जा रही है, वह कोरी कल्पना मात्र है. सुबासिनी जेना से पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक की बात हुई है और वे पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. खुद सुबासिनी ने प्रेस में आकर बयान दिया है कि वे पार्टी लाइन से बाहर नहीं जाएंगी.”

इधर BJP के भीतर भी कुछ लोग पार्टी में रविंद्र जेना के शामिल होने का विरोध कर रहे हैं. बालासोर के वर्तमान सांसद प्रताप चंद्र सारंगी, जिन्होंने 2019 में जेना को हराया था, उनका मानना है कि जेना के आने से पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने कहा, “मुझे जेना के शामिल होने से पहले बताया गया था और मैंने इसका विरोध किया था. यह पार्टी का सामूहिक निर्णय है और फिलहाल मैं इसके साथ हूं. हालांकि स्थानीय नेता विरोध में पार्टी छोड़ने की बात कर रहे हैं, जिन्हें मैं समझाऊंगा. विचारधारा पर चलने वाली एकमात्र पार्टी BJP ही है.”

वे आगे कहते हैं, “उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और मामला अभी कोर्ट में है. अंतिम निर्णय आने पर देखा जाएगा. जहां तक BJP के नफे-नुकसान की बात है, तो समुद्र में एक गिलास पानी डालने या निकालने से कोई फर्क नहीं पड़ता.”

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