राजस्थान विधानसभा चुनाव में हिंसा और गड़बड़ी रोकने के लिए इस बार आदिवासी क्षेत्रों में किया गया एक प्रयोग खूब सराहना बटोर रहा है. दरअसल, प्रतापगढ़ पुलिस ने ई-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए मोबाइल ऐप और जीयो टैगिंग के जरिए संवेदनशील मतदान केंद्रों तक तुरंत सहायता पहुंचाने में कामयाबी हासिल की. मसलन, प्रतापगढ़ जिले के सुहागपुरा मतदान केंद्र पर दो पक्षों के बीच झगड़े की नौबत आ गई. सूचना मिलते ही सेक्टर पुलिस अधिकारी को मतदान केंद्र पर भेज दिया गया, लेकिन वहां झगड़ा शांत नहीं हुआ. सुहागपुरा थानाधिकारी वहां से 16 किलोमीटर दूर थे ऐसे में उनका समय पर पहुंचना मुश्किल था.
ऐप के जरिए पता चला कि पीपलखूंट थाना प्रभारी वहां से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर है. ऐसे में उन्हें तुरंत मौके पर भेज दिया गया और किसी तरह की अनहोनी होने से पहले ही झगड़े पर काबू पा लिया गया. इसी तरह पारसोला थाना क्षेत्र के एक बूथ पर झगड़े की शिकायत मिली तो ऐप पर चेक करने पर पता चला कि क्यूआरटी टीम उस बूथ के आस-पास ही मौजूद थी. ऐसे में तुरंत क्यूआरटी टीम को मौके पर भेजकर हालात पर काबू पा लिया गया.
सुहागपुरा और पारसोला ही नहीं पूरे जिले में ऐसे 8 मतदान केंद्र थे जहां से शिकायत मिलने के पांच मिनट के भीतर पुलिस की रेस्पांस टीम भेज दी गई. इससे न केवल संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सका बल्कि 2-5 मिनट के भीतर रेस्पांस भी पहुंचाया जा सका. प्रतापगढ़ पुलिस अधीक्षक अमित बुडानिया ने बताया – "पहले मतदान केंद्रों पर सुरक्षा टीम और पोलिंग अधिकारी भेजने के लिए आधे से एक घंटे का समय लग जाता था. उस दौरान यह पता करना मुश्किल होता था की किस पोलिंग बूथ के पास कौनसी पुलिस टीम है तथा जरूरत पड़ने या आपात स्तिथि में सब से पहले किस टीम को कॉल या मौके पर भेजा जाए. ऐसी स्तिथि में जरूरत पड़ने पर सबको मैन्युअली कॉल या वायरलेस करके ही पता किया जा सकता था, जिसमे काफी समय लग जाता था."
इस तरह पाई सफलता
प्रतापगढ़ पहाड़ी इलाका है, ऐसे में यहां सहायता पहुंचने में काफी मुश्किले आती हैं. इसी को ध्यान में रखकर प्रतापगढ़ जिले के सभी 560 बूथों के लिए लगाई गई 200 गाड़ियों जीयो लोकेशन के आधार पर उनकी प्रत्येक बूथ से दूरी और उनके मूवमेंट की रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई. इससे कॉल सेंटर पर बैठी टीम को यह पता लगाने में आसानी हुई कि किस बूथ के पास कौनसी टीम मौजूद है.
प्रत्येक ग्राउंड टीम को सभी सदस्यों के मोबाइल में एक एप डाउनलोड किया गया जिसमें पूरी टीम के मोबाइल नंबर सुरक्षित थे. इसके अलावा मोबाइल टीम को एडिमन डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया. जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्रों की मॉनिटरिंग के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बनाए गए वॉर रूम से निगरानी की गई.
इसके तहत प्रत्येक पोलिंग बूथ के आस-पास स्थित सभी पुलिस गाड़ियों, सेक्टर मेजिस्ट्रेट, क्विक रेस्पॉन्स टीम एवं अन्य सभी टीम जो की चुनाव के दौरान ग्राउंड पर है, उनकी हर एक पोलिंग बूथ से दूरी के साथ उनके मूवमेंट की रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई. किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि या झगड़ा होने पर सबसे पास वाली टीम को तुरंत उक्त मतदान केंद्र पर पहुंचा कर तुरंत सहायता पहुंचाई गई.

