पिछले अक्तूबर में जब सत्यपाल मलिक राज्यपाल के तौर पर गोवा गए थे तो उन्हें उम्मीद होगी कि जम्मू-कश्मीर के उठापटक भरे माहौल के बाद उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी.
पर ऐसा हुआ नहीं. महामारी से निपटने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ उनकी असहमति सार्वजनिक हो चुकी है.
हाल में, एक नया राजभवन बनाने के प्रस्ताव पर विवाद को ही उनके बेवक्त मेघालय तबादले की वजह माना जा रहा है.
जिस तरह वे केंद्र को तनाव में डालते रहते हैं उससे तीन साल के भीतर बतौर राज्यपाल चौथी नियुक्ति भी लंबी चल पाएगी, इसमें शक ही है.

