ओडिशा में पिछले जनवरी महीने से शुरू हुई मतदाता मैपिंग प्रक्रिया में करीब 9 लाख 80 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. वहीं दूसरी तरफ, राज्य चुनाव आयोग के पास 2 अप्रैल के बाद करीब 2 लाख फॉर्म-7 के आवेदन भी प्राप्त हुए हैं.
इसको देखते हुए राज्य के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुशांत कुमार मिश्रा ने सभी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसरों (ERO) को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में दोबारा क्षेत्र स्तर पर जांच कर आवश्यक कदम उठाएं.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से बताया गया है कि बूथ स्तर अधिकारी यानी BLO द्वारा सही ढंग से सर्वेक्षण नहीं करने के कारण कई नाम सूची से हटा दिए गए हैं.
इस साल जनवरी से मार्च के बीच चलाए गए घर-घर मतदाता मैपिंग अभियान के दौरान बूथ स्तर अधिकारियों ने लगभग 9.8 लाख नाम हटाने के लिए चिह्नित किए थे. इन मतदाताओं को मृत्यु, पलायन, डुप्लीकेट प्रविष्टियों या संदिग्ध मिलान जैसे कारणों से चिह्नित किया गया था, जबकि BLO को मतदाता सूची से नाम हटाने का अधिकार नहीं है.
पूरी स्थिति को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी योग्य मतदाता का नाम न कटे और मृत व्यक्तियों के परिजनों की सहमति फॉर्म-7 में ली जाए. जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर हैं, उन्हें नोटिस देकर ही नाम हटाया जाए. साथ ही, फॉर्म-7 देने वाले कम से कम 50 प्रतिशत आवेदकों से उनके अंतिम पते पर संपर्क कर जांच की जाए.
अब इस मामले को लेकर बीजू जनता दल (BJD) ने आक्रामक रुख अपनाया है. 21 अप्रैल को भुवनेश्वर स्थित पार्टी मुख्यालय शंख भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्र, सदन में उपनेता प्रसन्न आचार्य और महासचिव विजय नायक ने पूरे मसले पर पार्टी का पक्ष रखा.
BJD नेताओं ने कहा, “निर्वाचन आयोग हर साल जनवरी में मतदाता सूची का पुनरीक्षण करता है, जिसके दौरान ओडिशा में लगभग 7 लाख नाम हटाए जाते हैं. इस साल वार्षिक प्रक्रिया में करीब 3 लाख अतिरिक्त नाम हटाए जाने से गंभीर चिंता पैदा हुई है.” साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि SIR के दौरान और अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं.
BJD नेताओं ने आगे कहा कि पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल 19 अगस्त, 2025 को नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग से मिला था और आग्रह किया था कि काम के लिए राज्य से बाहर जाने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से न हटाए जाएं. नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाना उन्हें उनके मौलिक अधिकार से वंचित करना है.
करीब 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 5 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा करते हुए BJD नेताओं ने चिंता जताई कि ओडिशा में SIR के दौरान पात्र मतदाता सूची से बाहर किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा, “सिर्फ एक साल चार महीने के भीतर 9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाया जाना, जबकि वे पहले सूची में थे, गंभीर चिंता का विषय है.”
पार्टी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने केंद्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि तैयारी चरण में हटाने के लिए चिह्नित सभी नामों की फिर से जांच कराई जाए. प्रस्तावित नाम काटने को लेकर संबंधित विधानसभावार, क्षेत्रवार तथा श्रेणीवार आंकड़े जारी किए जाएं. साथ ही जिन कारणों से नाम हटाए जा रहे हैं, उन्हें भी सार्वजनिक किया जाए ताकि पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.
वहीं पूर्व मंत्री और BJD विधायक रणेंद्र प्रताप सवाईं ने मतदाता सूची से नाम हटाने को राजनीतिक साजिश बताया है. वे कहते हैं, “ओडिशा में वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) के तहत करीब दस लाख मतदाताओं के नाम हटाया जाना केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक साजिश है, जो पिछले कुछ महीनों से देश के विभिन्न राज्यों में सामने आ रही है.”
उन्होंने कहा, “SSR प्रक्रिया पर इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दो लाख फॉर्म-7 जमा किए गए हैं. यह एक साजिश प्रतीत होती है, क्योंकि इसी फॉर्म का इस्तेमाल अन्य राज्यों में विपक्षी दलों के मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाने के लिए किया गया है.”
रणेंद्र कहते हैं, “पिछले विधानसभा सत्र में मैंने यह मुद्दा सरकार के सामने उठाया था. सरकार के जवाब और अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या में दो लाख का अंतर है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह गहरा गया है. पिछले कुछ महीनों में देशभर में SSR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और आम जनता के बीच जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं, वह लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी शुभ संकेत नहीं है.”
प्रदेश कांग्रेस भी BJD के सुर में सुर मिलाती दिखी. प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, “मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाने में कोई गलत बात नहीं है, लेकिन इसकी जांच होनी चाहिए. रोजगार के लिए बाहर गए लोगों के नाम नहीं हटाए जाने चाहिए. मतदाता सूची से 9.8 लाख नाम हटाया जाना बहुत बड़ी संख्या है.”
इधर BJP ने दोनों ही दलों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि BJD और कांग्रेस पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की तरह हर चीज़ में साजिश देखती है. यह संकेत देता है कि हटाए गए नामों में अधिकतर घुसपैठिए थे. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ओडिशा में घुसपैठियों की संख्या मतदाता सूची से हटाए गए नामों से भी अधिक है.”
ओडिशा में SIR की प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होने वाली थी, लेकिन पांच राज्यों में चल रहे चुनावों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है. यह प्रक्रिया अब मई में शुरू होने की संभावना है. बीते विधानसभा चुनाव के वक्त राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य में कुल 3,32,36,360 मतदाता हैं. इसमें पुरुष मतदाता 1,68,50,949, महिला मतदाता 1,63,82,031 और 3,380 थर्ड जेंडर मतदाता हैं.

