ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं. फंसी हुई चौथी सीट की लड़ाई बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस हार चुकी है. लेकिन इस हार से कांग्रेस और BJD उबर नहीं पा रही हैं. कांग्रेस ने पार्टी निर्देश के खिलाफ जाकर क्रॉस-वोटिंग करने वाले अपने तीन विधायकों को निलंबित करने के एक दिन बाद, 18 मार्च को कहा कि वह राज्यसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में उसके विधायकों को रिश्वत देने की कोशिशों को अंजाम तक ले जाएगी.
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि कर्नाटक पुलिस ने एक रिसॉर्ट से चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जहां राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायकों को ठहराया गया था. वे दावा करते हैं, “ प्रथम दृष्टया सबूत बताते हैं कि उन्हें हमारे विधायकों को रिश्वत देने के लिए होटल भेजा गया था. हालांकि, सतर्क विधायकों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया. हम इस मामले को लेकर भारत के चुनाव आयोग के पास जाएंगे और उसके दखल की मांग करेंगे.”
चरण दास ने यह दावा भी किया राज्यसभा चुनाव में बड़ी मात्रा में पैसे का लेन-देन हुआ है. इसी कारण एक निर्दलीय उम्मीदवार ने ओडिशा विधानसभा में पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद जीत हासिल की है. भक्त चरण दास से पहले BJD प्रमुख और पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने भी रिश्वतखोरी के आरोप लगाए थे. उन्होंने 16 मार्च को ‘X’ पर लिखा कि ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि बेंगलुरु में चार
लोगों को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया है कि वे विधायकों को खाली चेक सौंपकर BJP समर्थित राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए वोट खरीदने की कोशिश कर रहे थे.
दरअसल कर्नाटक पुलिस ने 15 मार्च को बेंगलुरु के बाहरी इलाके से दो नेताओं को गिरफ्तार किया. आरोपियों की पहचान बीरेन्द्र प्रसाद और ब्यातरायनपुरा सुरेश के रूप में हुई है. वहीं, दो अन्य आरोपी अजीत कुमार साहू और सिमांचल महाकुड़ फिलहाल फरार हैं. बेंगलुरु दक्षिण के पुलिस अधीक्षक श्रीनिवास गौड़ा के मुताबिक, आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 173 (चुनावी रिश्वत) और 352 (जानबूझकर अपमान, जिससे शांति भंग हो) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गिरफ्तार किया गया है.
पूरे मामले को लेकर कर्नाटक के बिदादी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई है. दर्ज शिकायत में ओडिशा कांग्रेस विधायक दल के उपनेता अशोक कुमार दास ने कहा कि चार लोगों ने कुछ विधायकों से संपर्क किया और उन्हें राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के लिए पैसे की पेशकश की. वहीं कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुताबिक, यह रकम प्रति विधायक 5 करोड़ रुपए थी.
अब अहम सवाल यह है कि क्या हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों को साबित किया जा सकेगा? कांग्रेस विधायक अशोक दास कहते हैं, “जिन चार लोगों के नाम मैंने FIR में दर्ज कराए हैं, उनके उसी होटल में होने के सबूत CCTV फुटेज में मिले हैं. दूसरी बात, जो दो लोग गिरफ्तार हुए हैं, उन्होंने पुलिस पूछताछ में कबूला है कि वे यहां विधायकों को ऑफर देने आए थे. उन्होंने यह भी कहा है कि वे ऐसा दिलीप राय के कहने पर कर रहे थे. वे जिस ब्लैंक चेक को लेकर घूम रहे थे, वह किसी जायसवाल के नाम का है.”
वे आगे कहते हैं, “कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को आखिरी अंजाम तक पहुंचाएगी. पुलिस जांच चल रही है और मामला कोर्ट तक जाएगा. हमें कोर्ट के निर्णय का इंतजार है. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे.” इधर दिलीप राय का कहना है कि हॉर्स ट्रेडिंग कराकर कोई एकाध अतिरिक्त वोट तो ले सकता है, लेकिन जितने वोट मुझे मिले हैं, उतने नहीं. यह व्यक्तिगत संबंधों की वजह से संभव हो पाया है. मेरे शुभचिंतक सभी दलों में हैं.
क्या कह रहे हैं निलंबित विधायक
इधर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप पर कांग्रेस के निलंबित विधायक रमेश चंद्र जेना ने तीखा बयान दिया और इसे BJD के खिलाफ ‘बदले’ की कार्रवाई बताया. उन्होंने कहा, “मुझे और मेरे पिता को वर्षों तक BJD द्वारा प्रताड़ित किया गया. मेरा जमीर BJD समर्थित उम्मीदवार का समर्थन करने की अनुमति नहीं देता और सच्चे कांग्रेसी ऐसे अनुभवों को नहीं भूलते.”
वहीं दूसरी निलंबित विधायक सोफिया फिरदौस ने भी हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा, “वोट हम विधायकों को देना था, लेकिन उम्मीदवार तय करने से पहले किसी विधायक से परामर्श नहीं लिया गया. मेरे पिता को BJD सरकार ने हमेशा प्रताड़ित किया. मैं केवल उस जनता के प्रति जिम्मेदार हूं, जिसने मेरे पिता के बाद मुझे चुनकर विधानसभा भेजा है. पूर्व के अनुभवों को देखते हुए कोई कांग्रेसी भला कैसे BJD समर्थित उम्मीदवार को वोट कर सकता है?”
तीसरे निलंबित विधायक दशरथी गमांग ने तो प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास पर ही गंभीर आरोप लगा दिए. उन्होंने कहा कि डील मैंने नहीं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष ने BJD के साथ 200 करोड़ की डील की है. यह किसलिए हुआ, यह मुझे नहीं पता, लेकिन मुझे डील की पूरी जानकारी है. मैं बीते 30 सालों से कांग्रेस में हूं और निकाले जाने के बाद भी सच्चा कांग्रेसी ही रहूंगा. मैं बिका नहीं हूं, बल्कि भक्त चरण दास की वजह से ओडिशा में कांग्रेस हर दिन कमजोर होती जा रही है.
जवाब में प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता स्वाभाविक है और पूर्व में उन्हें भी BJD सरकार द्वारा प्रताड़ित किया गया था. लेकिन इसके आधार पर पार्टी हाईकमान के खिलाफ जाना उचित नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि साझा उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता को समर्थन देने का फैसला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा लिया गया था और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी पार्टी के निर्देशों के अनुसार ही की गई है.
हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप में गिरफ्तार हुए लोगों की पुलिस के सामने स्वीकारोक्ति तब तक बहुत मायने नहीं रखती, जब तक कि उस स्वीकारोक्ति के ठोस सबूत न मिल जाएं. हालांकि, राज्य कांग्रेस यह मानती है कि यह लड़ाई लंबी है.

