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21 महीने, 61 मामले: BJP राज में ओडिशा के सांप्रदायिक तनाव का यह रिकॉर्ड क्या कहता है?

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में बताया है कि जून 2024 के बाद से ओडिशा में सांप्रदायिक दंगे के 54 और सात मॉब लिंचिंग के सात केस दर्ज किए गए हैं

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी
अपडेटेड 13 मार्च , 2026

ओडिशा में सांप्रदायिक तनाव और भीड़ की हिंसा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. इसकी वजह मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का वह बयान है जिसमें उन्होंने विधानसभा को बताया कि राज्य में जून 2024 से लेकर इस साल फरवरी के बीच दंगों की 54 घटनाएं और मॉब लिंचिंग के 7 मामले दर्ज किए गए हैं.

यह जानकारी 8 मार्च को चल रहे बजट सत्र के दौरान बीजू जनता दल (BJD) के विधायक गौतम बुद्ध दास के एक सवाल के लिखित जवाब में विधानसभा के सामने रखी गई. ये आंकड़े जून 2024 में BJP की पहली सरकार बनने के बाद से राज्य में हुए सांप्रदायिक बवाल की अब तक की सबसे साफ आधिकारिक तस्वीर पेश करते हैं.

मुख्यमंत्री की तरफ से पेश आंकड़ों के मुताबिक, सांप्रदायिक दंगों की ये 54 घटनाएं पांच जिलों से सामने आई हैं, जो यह बताता है कि तनाव कुछ खास इलाकों तक ही सीमित रहा है. बालासोर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां के 24 मामले कुल घटनाओं का लगभग आधा हिस्सा हैं. इसके बाद खुर्दा में 16, कोरापुट में 8, मलकानगिरी में 4 और भद्रक में 2 मामले दर्ज किए गए.

बालासोर और खुर्दा में इतने ज्यादा मामलों का होना काफी अहम है. बालासोर में हाल के सालों में समय-समय पर कम्युनल टकराव देखने को मिले हैं. वहीं, राज्य की राजधानी भुवनेश्वर को समेटने वाला खुर्दा जिला अपने प्रशासनिक और प्रतीकात्मक महत्व के कारण ऐसे मामलों में राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हो जाता है.

माझी के लिखित जवाब में बताया गया कि पुलिस ने इन सांप्रदायिक दंगों के सिलसिले में 298 गिरफ्तारियां की हैं. हालांकि, विधानसभा में दी गई इस जानकारी में यह साफ नहीं किया गया कि इनमें से कितने मामलों में मुकदमा चला या कितनों में सजा हुई.

दंगों की घटनाओं के साथ-साथ, मुख्यमंत्री ने मॉब लिंचिंग के आंकड़े भी रखे. हिंसा की इस कैटेगरी ने हाल के सालों में राष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान खींचा है. राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान चार जिलों में मॉब लिंचिंग की सात घटनाएं सामने आईं.

रायगड़ा जिले में तीन मामले दर्ज किए गए, इसके बाद ढेंकनाल में दो घटनाएं हुईं, जबकि बालासोर और देवगढ़ में एक-एक मामला सामने आया. इन घटनाओं के सिलसिले में 61 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां रायगड़ा से ही हुईं.

इन आंकड़ों का सामने आना राजनीतिक रूप से एक बहुत ही संवेदनशील समय पर हुआ है. जब से 2024 में BJP की चुनावी जीत ने नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली सरकार के लंबे कार्यकाल को खत्म किया है, विपक्षी पार्टियां लगातार आरोप लगा रही हैं कि ओडिशा के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा है.

विपक्षी नेताओं ने तटीय और उत्तरी जिलों में छिटपुट झड़पों के साथ-साथ धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले तनाव का हवाला देते हुए यह तर्क दिया है कि ओडिशा का पारंपरिक रूप से शांत रहा है लेकिन अब वह सांप्रदायिक दबाव में है. हालांकि, सरकार लगातार यह कहती रही है कि ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जा रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है.

विधानसभा में अपने जवाब में, माझी ने कहा कि प्रशासन ने सांप्रदायिक बवाल को रोकने और सद्भाव बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें इंटेलिजेंस जुटाने के सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों की करीब से निगरानी करना और स्थानीय विवादों को बढ़ने से पहले ही सुलझाने के लिए थाना स्तर पर 'शांति समितियों' को एक्टिव करना शामिल है.

अधिकारियों को सोशल मीडिया की उन गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखने को कहा गया है जो सांप्रदायिक तनाव भड़का सकती हैं. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासनों को ऐसी अफवाहों या भड़काऊ कंटेंट पर तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया गया है जिससे झड़पें हो सकती हैं.

विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े आने वाले हफ्तों में राजनीतिक बहस को और भड़काने वाले हैं, क्योंकि विपक्षी पार्टियां सरकार के कानून-व्यवस्था संभालने के तरीके पर लगातार सवाल उठा रही हैं. वहीं, यह खुलासा BJP के सत्ता में आने के बाद से ओडिशा में सांप्रदायिक दंगों और मॉब लिंचिंग पर पहली बार इतने विस्तार से आंकड़ों के जरिए हालात पेश करता है.

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