बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए जो दस-दस हजार रुपये दिये गये थे, वे वोट डालने की रिश्वत थी या स्वरोजगार की योजना थी, यह बहस अलग है. लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा कर दी है कि बिहार सरकार ने इस योजना के अगले चरण पर काम करना शुरू कर दिया है. जीविका की तरफ से इच्छुक और गंभीर महिलाओं को चार चरणों में दो लाख रुपये तक की सहायता देने की योजना बनाई गई है. इस योजना को तीन से चार साल में पूरा किया जायेगा.
29 जनवरी को जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अगले चरण की शुरुआत की घोषणा की तो इंडिया टुडे ने जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर इस योजना को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा.
हिमांशु शर्मा ने कहा, “आज की तारीख तक लगभग 1.56 करोड़ महिलाओं को हमने इस योजना के पहले किस्त दस-दस हजार की राशि दी है और इनमें से ज्यादातर महिलाओं ने अपना रोजगार शुरू भी कर दिया है. अब 30 से 40 लाख ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने इसके लिए नये सिरे से आवेदन किया है, उनके खाते में भी हम जल्द दस-दस हजार रुपये भिजवाने जा रहे हैं. इस तरह से हम यह मानकर चल रहे हैं कि तकरीबन दो करोड़ महिलाएं इस योजना का हिस्सा बनेंगी. हमारा लक्ष्य है कि इनमें से अधिक से अधिक महिलाएं इस योजना के अंतिम चरण तक पहुंचे, ताकि वे सभी स्वरोजगार से जुड़े. हमारा इरादा इनमें से किसी को छांटना नहीं है.”
हिमांशु शर्मा के मुताबिक जो भी महिला अपने काम-काज से साबित करेगी कि वह रोजगार करने को लेकर गंभीर है, उसे सहायता दी जाएगी और यह पूरी सहायता कर्ज नहीं बल्कि ग्रांट के रूप में होगी.
अभी जिन महिलाओं को दस-दस हजार रुपये दिये गये हैं, जीविका उन महिलाओं की स्किल मैपिंग का काम करवा रही है. प्रारंभिक आंकड़ों बताते हैं कि महिलाओं ने सबसे अधिक कृषि आधारित रोजगार में रुचि दिखाई है. उसके बाद पशुपालन में. वे सब्जियों की खेती, गाय और बकरी पालन को तरजीह दे रही हैं. मगर बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी हैं, जो मसाला, तेल, शहद उत्पादन जैसे मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में भी कोशिश कर रही हैं, इनके अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं ने इन पैसों से सिलाई मशीन खरीदी है. वे सिलाई का काम कर रही हैं. कई महिलाओं ने छोटी-सी किराने की गुमटी भी खोली है.
जीविका का फोकस सिलाई के लिए इच्छुक महिलाओं पर अधिक है. हिमांशु शर्मा कहते हैं, “अभी हमें पूरे राज्य के आंगनबाड़ी के बच्चों के ड्रेस सिलवाने का काम मिला है. आने-वाले दिनों में हम स्कूल ड्रेस सिलने का भी काम लेंगे और ऐसी तमाम महिलाएं जो सिलाई के काम के लिए इच्छुक हैं, उन्हें प्रशिक्षण देकर और उनके समूह बनाकर उनसे यह काम करवाएंगे. आने वाले दिनों में हम हर पंचायत में सिलाई सेंटर खोलेंगे. हमारा लक्ष्य है बिहार को बांग्लादेश की तरह टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करना. अगर सरकार से शुरुआती काम मिलता रहा तो बाहर से भी काम आएगा.”
जीविका ऐसे ही अलग-अलग सेक्टर में समूह बनाकर उद्योग विकसित करने और उन्हें बाजार देने पर विचार कर रही है. हिमांशु कहते हैं, हम इन महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए पंचायत के स्तर पर हाट और प्रखंड-जिला स्तर पर जीविका मार्ट बनाने की तैयारी में हैं. इन उत्पादों का ऑनलाइन पोर्टल भी बनेगा.
हालांकि ये सब आगे की बातें हैं. फिलहाल अगले चरण में कौन जाएगा, इसे लेकर जीविका ने कुछ नियम बनाए हैं. चूंकि इन योजना में शामिल सभी महिलाएं जीविका की सदस्य हैं, इसलिए इन्हें जीविका की साप्ताहिक बैठकों में जाना और नियमित बचत करना होगा. तभी वे अगले चरण की पात्र होंगे. इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि उन्होंने दस हजार रुपये की राशि से रोजगार शुरू किया है या नहीं.
हिमांशु कहते हैं, अगर किसी महिला ने अभी तक रोजगार शुरू नहीं किया है तो वे अभी भी कर लें. समय के साथ उन्हें शामिल करा लिया जाएगा.
दूसरे चरण में बीस हजार रुपये देने के बाद जो महिला रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ेगी, उसे सरकार 40 हजार रुपये देगी, मगर साथ ही उसे भी अपनी तरफ से दस हजार रुपये लगाने पड़ेंगे. फिर चौथे चरण में सरकार 80 हजार रुपये देगी और अपनी तरफ से 20 हजार रुपये लगाने होंगे. पांचवे और आखिरी चरण में मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए सरकार शेष 60 हजार रुपये का ग्रांट देगी.
इसके साथ-साथ अगर दूसरे चरण में दस महिलाएं मिलकर एक साथ रोजगार करना चाहें तो सरकार उन्हें एकमुश्त दो लाख भी दे सकती है. अगर कोई महिला बेहतर रोजगार कर रही है और एकमुश्त दो लाख तक की सहायता चाहती है, तो उसे स्पेशल केस मानकर जीविका मुख्यालय उस पर विचार कर सकता है. यह सब तीन से चार साल में पूरा होगा.
फिलहाल जीविका दूसरे चरण के लाभुकों के लिए इसी माह प्रशिक्षण की तैयारी में है. इसके लिए 15-20 बड़े एनजीओ का चयन किया गया है, वे ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं. हिमांशु शर्मा कहते हैं, इस ट्रेनिंग में महिलाओं को बेसिक लिटरेसी, फाइनेंशियल मैनेजमेंट आदि सिखाया जाएगा और उनका एक्सपोजर विजिट भी कराया जाएगा. यह ट्रेनिंग पांच दिनों की होगी.
हालांकि इस पूरे काम में खासी रकम खर्च होगी. देखना है, सरकार यह राशि कहां से लाती है. इस साल के बजट में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के खर्च का अलग से जिक्र नहीं है. हां, महिला सशक्तीकरण के नाम से नौ हजार करोड़ रुपये का जिक्र है. माना जा रहा है कि यह राशि इसी मद में खर्च होगी. यह भी कहा जा रहा है कि लगभग 40 से 50 लाख महिलाओं को दूसरे चरण की राशि देने की तैयारी है.

