
बिहार में नई सरकार बन गई है, मगर उस सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत की गैर-मौजूदगी को लेकर ज्यादातर लोग हैरत में हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथग्रहण से पहले लगभग ऐसा मान लिया गया था कि सीएम भले ही BJP का होगा, लेकिन डिप्टी सीएम निशांत ही बनेंगे. नीतीश की पार्टी JDU उनमें भविष्य देख रही थी और कहा जा रहा था कि वे ही पार्टी को संभालेंगे.
मगर जब शपथ ग्रहण हुआ, तो डिप्टी सीएम के तौर पर सरकार में JDU के दो नेता शामिल हुए. पहले बिजेंद्र प्रसाद यादव और दूसरे विजय कुमार चौधरी. ऐसे में लोगों का हैरत में पड़ जाना स्वाभाविक था. अब ज्यादातर लोग कह रहे हैं कि निशांत ने खुद ही मंत्री पद ठुकरा दिया है. वे अभी कुछ समय ठहरकर बिहार की राजनीति को समझना चाहते हैं. वे बिहार घूमना चाहते हैं, क्योंकि वे अभी खुद को प्रशासनिक तौर पर तैयार नहीं मानते.
कहा यह भी जा रहा है कि निशांत बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री पद स्वीकारना नहीं चाहते. हालांकि ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि पिछले एक महीने में निशांत की राजनीतिक सक्रियता महज उस नाराजगी को दबाने के लिए थी. अब यह काम पूरा हो गया है और वे अब फिर से पुराने जीवन में लौट जाएंगे. हालांकि अतीत की कुछ घटनाओं यह इशारा जरूर मिलता है कि निशांत आगे क्या करेंगे.
राजनीति और प्रशासन से असहजता
बचपन से सीमित दायरे में रहने वाले निशांत बाद के दिनों में एकांतप्रिय होते चले गए. उनका घर जरूर राजनीति का केंद्र रहा, मगर वे राजनीति से दूरी बनाकर रहते थे. उनकी रुचि अध्यात्म और किताबों में रहती थी. इसका जिक्र हमने इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स (निशांत कुमार अपने व्यक्तित्व और पिता की विरासत के बीच कैसे साधेंगे संतुलन?) में किया है. मगर जब पिता नीतीश कुमार का स्वास्थ्य खराब रहने लगा, तो उन्हें अपने सीमित दायरे से बाहर निकलना पड़ा. पिछले साल जनवरी से वे सार्वजनिक जगहों पर नजर आ रहे हैं और मीडिया के सवालों का संक्षिप्त जवाब दे रहे हैं. हालांकि अब भी वे मीडिया को इंटरव्यू देने के लिए राजी नहीं हैं. इंडिया टुडे ने भी कई बार इसके लिए प्रयास किए हैं.

मार्च महीने के पहले हफ्ते में अचानक ऐसी स्थिति बनी कि उन्हें पार्टी की सदस्यता लेनी पड़ी. यह स्थिति उनके पिता नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा जाने के फैसले के बाद बनी थी. तब पार्टी में इस फैसले के खिलाफ गहरा आक्रोश था. निशांत के JDU की सदस्यता लेने और पार्टी में सक्रिय होने से यह आक्रोश लगभग खत्म हो गया.
नई सरकार की चर्चा के साथ ही निष्क्रिय हो गए हैं निशांत!
बिहार में जैसे ही नई सरकार की चर्चा शुरू हुई, निशांत निष्क्रिय नजर आए. उनकी तस्वीरें कहीं नजर नहीं आ रही थीं. वे सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं दिखे. इसके पहले हाल के दिनों में सम्राट कई दफा नीतीश कुमार के आवास पर गए. उन तस्वीरों में नीतीश तो दिखे लेकिन निशांत कहीं नजर नहीं आए. ऐसा क्यों हुआ, यह बड़ा सवाल है. राजनीति में छवियों का अपना महत्व होता है. एक सक्रिय राजनेता खुद को छवियों से गायब नहीं करता. अगर निशांत को आगे राजनीति में सक्रिय होना है, तो वे ऐसा नहीं करते.
हालांकि 16 अप्रैल को जब वे JDU ऑफिस पहुंचे तब उन्होंने चुप्पी तोड़ी. यहां पत्रकारों से बात करते हुए निशांत कुमार ने कहा, “मैं हमारे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जो कि मेरे बड़े भाई हैं, उनको बधाई देता हूं. मुझे उम्मीद है कि वे बिहार के विकास को नई राह दिखाएंगे.” इसके साथ उन्होंने JDU से उपमुख्यमंत्री बनने वाले दोनों विधायकों को भी बधाई दी.

इस बीच यह खबर लगातार मीडिया में है कि निशांत अभी कम से कम छह महीने के लिए बिहार घूमना और राज्य को समझना चाहते हैं. उसी के बाद वे राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं. मीडिया से बात करते हुए पार्टी विधायक चेतन आनंद भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि निशांत फिलहाल लोगों के बीच जाकर जनता से संवाद स्थापित करना चाहते हैं.
यह सच है कि निशांत अभी खुद को राजनीति के लिए तैयार नहीं पाते. जब नीतीश कुमार के करीबी लोग बताते हैं कि जब उनके राज्यसभा जाने की खबर सामने आई थी तब 3 मार्च के दिन निशांत ने अपने पिता से यही कहा था, "आप मुझे पार्टी में रख लीजिए, मगर मैं न पार्टी में कोई पद लूंगा न सरकार में." उनकी यह बात अभी सच होती मालूम हो रही है.
कहा जा रहा है कि आखिरी रात तक उन्हें समझाने की कोशिश की गई, मगर वे तैयार नहीं हुए. नीतीश के करीबी लोगों ने उन्हें हर तरह से समझाया कि यही सही मौका है, राजनीति में अवसर चूक जाने के बाद कुछ नहीं मिलता.
एक नजदीकी सूत्र ने यह भी बताया था कि निशांत की अनिच्छा को देखते हुए उन्हें यह ऑफर भी दिया गया था कि उनके साथ ललन सिंह भी डिप्टी सीएम बनेंगे, ताकि उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहे. मगर बाद में खबर मिली कि निशांत इस पर भी तैयार नहीं हुए.
क्या इसी वजह से डिप्टी सीएम बने हैं बिजेंद्र प्रसाद यादव
कहा जा रहा है कि चूंकि निशांत छह महीने का समय चाहते हैं, इसलिए तात्कालिक तौर पर 79 साल के बिजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी दी गई है. ताकि जब निशांत पद संभालने के लिए तैयार हो जाएं, तब वे पद छोड़ दें. इस बात में इसलिए भी थोड़ी सच्चाई लगती है, क्योंकि बिजेंद्र प्रसाद यादव लंबे अरसे से नीतीश कुमार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए.
जिस दिन नीतीश कुमार राज्यसभा जाने का फैसला कर रहे थे, उस दिन भी बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उन्हें समझाया था कि वे पद से इस्तीफा देकर उनके साथ मिलकर समाज का कुछ काम करें. नीतीश कुमार के कुछ पुराने सहयोगी शिकायत करते हैं कि नीतीश ने उन्हें बेवजह सरकार के काम में उलझा रखा है. अब वे मुक्त होना चाहते हैं.
फैसला कितना सही
इस मसले पर बात करने पर टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान के पूर्व प्राध्यापक पुष्पेंद्र कहते हैं, "अगर निशांत ने अगले छह महीने बिहार घूमकर राज्य को समझने का फैसला किया है, तो यह सही फैसला है. बिना तैयारी के सत्ता में आने का कोई अर्थ नहीं है. संयोग से मिली सत्ता और तैयारी के बाद मिली सत्ता में फर्क होता है. यह अच्छा है कि वे लंबा मगर सीधा रास्ता अपनाना चाह रहे हैं. इससे दो फायदे होंगे. पहला यह कि निशांत जब सरकार में आएंगे, तो उनकी समझ विकसित रहेगी. दूसरा उनके पिता को भी तत्काल वंशवाद के आरोपों से निजात मिल जाएगी."

