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'मुझसे ही जुड़ो' PM मोदी के CM रेवंत रेड्डी को दिए इस ऑफर की असल कहानी

हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को मजाकिया अंदाज में अपने साथ जुड़ने का प्रस्ताव दिया

प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीएम रेड्डी (बाएं)
प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीएम रेड्डी (बाएं)
अपडेटेड 14 मई , 2026

तेलंगाना में चुनाव अभी ढाई साल दूर हैं लेकिन PM मोदी के हैदराबाद दौरे ने यहां की सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘अब की बार तेलंगाना सरकार’ का नारा देकर राज्य की BJP इकाई को तुरंत सक्रिय हो जाने के लिए प्रेरित किया है.

पश्चिम बंगाल में BJP की बड़ी चुनावी जीत के बस कुछ दिन बाद 10 मई को मोदी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पहुंचे. यह उनके तीसरे कार्यकाल में तेलंगाना का पहला दौरा था. वहां उन्होंने कांग्रेस के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में लगभग ₹9,400 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया.  

बाद में सिकंदराबाद में BJP की रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने हैरानी जताते हुए कहा कि जब तेलंगाना की जनता की भावनाएं BJP के साथ है तो आखिर तेलंगाना में उनकी पार्टी को सत्ता हासिल करने से क्या रोक रहा है? पीएम मोदी ने बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा, "BJP सरकारें उन जगहों पर बन रही हैं, जहां पहले कोई भी इसका झंडा उठाने की हिम्मत नहीं करता था." इसके बाद मोदी ने सिकंदराबाद की जनता से कहा कि तेलंगाना में तो BJP का हमेशा से मजबूत जनाधार रहा है.

उन्होंने कहा कि 1984 में पार्टी ने लोकसभा की केवल दो सीटें जीती थीं, जिनमें से एक वर्तमान तेलंगाना में थी. उनका इशारा अविभाजित आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा संसदीय क्षेत्र की ओर था. पीएम मोदी ने आगे कहा, “अभी भी तेलंगाना के आधे सांसद BJP से हैं. यहां के लोग BRS (भारत राष्ट्र समिति) और कांग्रेस के शासन से तंग आ चुके हैं और बदलाव चाहते हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि मतदाता BJP को भारी बहुमत से सत्ता में लाएंगे.”

प्रधानमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार तेलंगाना में उद्योग और रोजगार सृजित करने के लिए किस प्रकार सहायता कर रही है. विश्लेषकों का कहना है कि तेलंगाना के मतदाता पांच साल पहले भी BRS और कांग्रेस दोनों से नाखुश थे. इस स्थिति ने BJP को उपचुनावों में दो विधानसभा सीटें जीतने में मदद की. ये सीटें दुब्बाका और हुज़ूराबाद थीं.

पिछली विधानसभा में BJP की सीटों की संख्या तीन तक पहुंच गई. वर्तमान विधानसभा में पार्टी के 8 विधायक हैं. BJP ने 2020 के ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनावों में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया था, जिसमें वह चार से बढ़कर 48 वार्डों तक पहुंच गई थी. BJP को सत्तारूढ़ BRS के मुख्य विरोधी के रूप में उभरते हुए देखा जा रहा था.

हालांकि करीमनगर सांसद बंडी संजय कुमार के नेतृत्व में BJP को जो तेज गति मिली थी, वह उतनी ही तेजी से खत्म हो गई. पार्टी के अंदरूनी झगड़ों ने उसकी छवि और कामकाज दोनों को खराब कर दिया. परिणाम यह हुआ कि नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव से सिर्फ चार महीने पहले BJP हाई कमान ने आक्रामक बंडी संजय कुमार को हटाकर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को उनकी जगह यह जिम्मेदारी सौंपी.

दूसरी ओर तेलंगाना कांग्रेस को 2021 के मध्य में रेवंत रेड्डी के रूप में एक नया नेता मिला जब कांग्रेस नागार्जुन सागर विधानसभा सीट हार गई. राज्य में पिछली विधानसभा के कार्यकाल में यह कांग्रेस की लगातार तीसरी उपचुनाव हार थी.

हाई कमान से मिले समर्थन के साथ रेवंत रेड्डी ने राज्य कांग्रेस इकाई को एकजुट करने का काम शुरू किया, जो लगातार अंदरूनी झगड़ों से परेशान थी. तेलुगु देशम पार्टी से कांग्रेस में आने की वजह से उन्हें पहले बाहरी का ताना सुनना पड़ा. इन तानों को झेलते हुए रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस को पूरी तरह व्यवस्थित कर दिया. उन्होंने पूरे राज्य में तेज-तर्रार दौरे किए और चुनाव से पहले लोगों को छह बड़ी कल्याणकारी गारंटी देने का वादा किया. इन प्रयासों से उन्होंने कांग्रेस को 2023 में तेलंगाना में सत्ता दिलवा दी.

रेड्डी समय-समय पर अगले कार्यकाल में भी मुख्यमंत्री बने रहने को लेकर आत्मविश्वास जताते रहे हैं. इसी को देखते हुए 10 मई को पीएम मोदी का उनसे यह कहना कि 'मुझसे ही जुड़ो' तुरंत अटकलों का कारण बन गया. दरअसल तेलंगाना में 9,400 करोड़ रुपए की परियोजनाओं के शुभारंभ कार्यक्रम में इस बात का जिक्र हुआ. मंच पर इस बात का भी जिक्र हुआ कि पीएम मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए गुजरात को मनमोहन सिंह सरकार से कितना कम फंड मिला था.  

पीएम मोदी ने उन दिनों की बात को याद करते हुए कहा कि अगर उनकी सरकार भी वही तरीका अपनाए तो तेलंगाना को मिलने वाला फंड आधा हो जाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर उतना कम फंड मिला तो तुम वहां नहीं पहुंच पाओगे, जहां पहुंचना चाहते हो. इसलिए बेहतर है कि तुम मेरे साथ जुड़ जाओ.” यह कहते हुए मोदी मुस्कुराए, रेड्डी की तरफ देखा और पूछा कि क्या वे ध्यान दे रहे हैं. मुख्यमंत्री रेड्डी प्रधानमंत्री मोदी के इस बात को मंच सुनकर घबराए हुए नजर आए.

अगले दिन रेड्डी ने मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी की टिप्पणियों को मजाकिया बयान बताया. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के विकास के लिए जो सुझाव दिए थे और उन्हें पूरा करने के लिए जो न्योता दिया था उसमें कोई राजनीति नहीं थी.”
 
अपनी पार्टी के पहले के नेताओं और BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव के उलट सीएम रेड्डी अक्सर पीएम मोदी के साथ मंच साझा करते रहे हैं. मार्च 2024 में आदिलाबाद में एक कार्यक्रम में उन्होंने मोदी को बड़ा भाई कहकर संबोधित किया था और इस बात पर जोर दिया था कि तेलंगाना जैसे युवा राज्यों को तीव्र विकास के लिए केंद्र के समर्थन की आवश्यकता है.

इन सबके बावजूद पीएम मोदी की "मुझसे ही जुड़ो" वाली टिप्पणी तेलंगाना BJP में चर्चा का विषय बन गई है. तेलंगाना BJP के एक नेता ने इंडिया टुडे को बताया, "पहली नजर में तो ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री से विकास कार्यों में उनका साथ देने का आग्रह कर रहे हैं. हालांकि, अगर राजनीतिक नजरिये से पीएम के बयान को देखें, तो यह रेवंत रेड्डी के लिए एक खुला प्रस्ताव भी लगता है."

इस संदर्भ में बात करते समय हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस में शामिल होने और मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले, सीएम रेड्डी ने BJP से संबंध रखने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेता के रूप में राजनीतिक विचारधारा में अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी. 

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