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चुनावी हार के बाद क्या अब TMC बिखरने की कगार पर है?

ममता बनर्जी की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक में ज्यादातर विधायकों के शामिल न होने से अब TMC के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं

ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
अपडेटेड 2 जून , 2026

पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद ममता बनर्जी एक बार फिर से पार्टी को संगठित करने की कोशिश कर रही हैं. हालांकि ममता की बैठकों में कई विधायकों के अनुपस्थित रहने से उनकी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.

दरअसल 31 मई को TMC पार्टी की ओर से नवनिर्वाचित विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई गई थी. कम विधायकों की मौजूदगी के कारण बैठक रद्द करनी पड़ी. TMC के विधायक दल के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने यह बैठक ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई थी.

इसका मकसद 80 विधायकों के बीच बेहतर समन्वय बनाना और आने वाले समय में विपक्ष की भूमिका पर रणनीति तैयार करना था. ममता बनर्जी विधायकों को संबोधित करने वाली थीं लेकिन इस बैठक में सिर्फ 20 विधायक ही पहुंचे. इसके कारण नेतृत्व को बैठक टालनी पड़ी.

यह घटनाक्रम TMC के लिए बहुत मुश्किल वक्त में सामने आया है. पार्टी की विधानसभा में सीटें 2011 के बाद सबसे कम हो गई हैं, जबकि BJP ने 208 सीटों के भारी बहुमत से सरकार बना ली है. 31 मई की बैठक में तीन-चौथाई विधायकों के न आने से अटकलें और तेज हो गई हैं. चुनाव हारने के बाद पार्टी में बेचैनी बढ़ रही है. साथ ही सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नेतृत्व पार्टी को एकजुट रख पाएगा या नहीं.

कई तृणमूल नेताओं ने निजी तौर पर चुनावी हार की जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व पर डाली है. साथ ही कुछ विधायकों के दूसरी पार्टियों से संपर्क करने की खबरें भी आई हैं, जिससे पार्टी के अंदर चिंता बढ़ गई है. BJP नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं को नहीं लेंगे लेकिन चुनाव के बाद का माहौल बदल गया है. TMC नेतृत्व के सामने पिछले कई सालों का सबसे बड़ा आंतरिक संकट देखने को मिल रहा है.

TMC के प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने ममता बनर्जी की बैठक में कम विधायकों की उपस्थिति को पार्टी में बगावत मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने इस तरह की खबरों को भी सिरे से खारिज कर दिया. घोष ने कम लोगों के आने की वजह पिछले दो दिनों में वरिष्ठ तृणमूल नेताओं पर हुए हमलों को बताया.

कुणाल घोष ने पत्रकारों से कहा, “अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हमला होने के बाद विधायक अलग-अलग कार्यक्रमों में व्यस्त हैं. इसके अलावा कई जिलों में चुनाव के बाद हिंसा में TMC के विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है. कई लोगों को पुलिस के जरिए झूठे मुकदमों में गिरफ्तार भी किया जा रहा है. इसी स्थिति को देखते हुए 30 मई की शाम से ही कई विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से फोन करके बैठक की तारीख बदलने की अपील की थी.”

कुणाल ने आगे कहा, "अभिषेक बनर्जी के अलावा कल्याण बंद्योपाध्याय (कल्याण बनर्जी) पर भी हमला हुआ. इसी वजह से बैठक टाल दी गई. 31 मई वाली बैठक रद्द हो गई, इसलिए विधायक नहीं आ सके.” कुणाल घोष का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब TMC के दो बड़े नेताओं पर हमले के बाद पार्टी और BJP के बीच बहुत तनाव बढ़ गया है.

30 मई को अभिषेक बनर्जी सोनारपुर (दक्षिण 24 परगना) में हिंसा से पीड़ित परिवारों से मिलने गए थे. वहां नाराज भीड़ ने उन्हें घेर लिया, अंडे-पत्थर-ईंटें फेंकीं. कुछ लोगों ने उन्हें थप्पड़ और मुक्के भी मारे. सुरक्षा बलों ने किसी तरह उन्हें बचाकर निकाला.

वीडियो में दिख रहा है कि भीड़ के बीच से गुजरते समय अभिषेक बनर्जी क्रिकेट हेलमेट पहने हुए थे. तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि उनकी आंख के पास चोट आई है. इस घटना में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उन्हें बारुईपुर कोर्ट में पेश किया गया है. BJP ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. पार्टी का कहना है कि यह घटना TMC के खिलाफ जनता के गुस्से को दिखाती है.

31 मई को एक और झड़प हुई, जिसमें तृणमूल के लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला किया गया. इससे तनाव और बढ़ गया. कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि हुगली जिले में एक पुलिस स्टेशन के बाहर उन्हें भीड़ ने घेर लिया और उनपर जानलेवा हमला किया. वे चुनाव के बाद TMC कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ ज्ञापन देने गए थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि BJP समर्थकों ने उन्हें घेरकर हमला किया, जिसमें उनके सिर पर चोटें आईं. इन घटनाओं पर ममता बनर्जी ने बहुत गुस्से में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने BJP पर विपक्षी नेताओं पर हमले करवाने का आरोप लगाया. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, “कल BJP समर्थकों ने हमारे लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी पर बर्बर हमला किया और उन्हें लिंच करने की कोशिश की. इस घटना से जुड़े डरावने वीडियो सार्वजनिक हो चुके हैं. आज हमारे लोकसभा चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी भी BJP के योजना बनाकर किए गए हमले का शिकार बने. भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है.”

TMC ने इन दोनों घटनाओं को पूरे राज्य में राजनीतिक अभियान का रूप देने की कोशिश शुरू कर दी है. प्रवक्ता कुणाल घोष ने बताया कि पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे ब्लॉक स्तर पर विरोध में मार्च निकालें और अभिषेक बनर्जी तथा कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों की निंदा करें.

ममता बनर्जी भी सड़कों पर वापस लौटने की तैयारी कर रही हैं. वे 2 जून को कोलकाता के रानी रश्मोनी एवेन्यू पर धरना प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगी. 31 मई की बैठक में विधायकों की कम उपस्थिति के बावजूद कुछ वरिष्ठ नेता जरूर पहुंचे थे. उनमें पूर्व विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी, वरिष्ठ नेता मदन मित्रा, पलाशीपाड़ा के विधायक रुकबानुर रहमान, बूजबूज के विधायक अशोक देब, पांचला के विधायक गुलशन मलिक, मालतीपुर के विधायक अब्दुल रहीम बख्शी और कुमारगंज के विधायक तोराफ हुसैन मंडल शामिल थे.

हालांकि 60 विधायकों के इस बैठक में नहीं आने से पार्टी नेतृत्व पर कई असहज सवाल उठने लगे हैं. चुनाव के बाद कई जिलों में जनता के गुस्से और विधायकों में बढ़ते असंतोष की खबरों के बीच यह बैठक रद्द होना ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

अब उन्हें विपक्ष की बेंच से बैठकर पार्टी को फिर से मजबूत करना है. 1 जून को TMC ने दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधि के आरोप में बाहर कर दिया है. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने यह जानकारी बाहर लीक की थी कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए विधायक दल के हस्ताक्षर जालसाजी से लिए गए थे. इस मामले की जांच CID कर रही है.

अगले कुछ दिन बताएंगे कि TMC हार के बाद फिर से मजबूत हो पाएगी या नहीं. खास तौर पर पार्टी के विरोध प्रदर्शन और 2 जून को ममता बनर्जी का धरना इसकी पहली परीक्षा होगा. यह TMC की अब तक की सबसे बड़ी चुनावी हार है.

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