पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 19 अप्रैल को इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी यानी I-PAC को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को दूर करने की कोशिश की. विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस राजनीतिक सलाहकार फर्म के कामकाज अस्थाई रूप से रुकने की खबरों के बीच, उन्होंने इसके कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी आजीविका सुरक्षित रहेगी.
एक रैली को संबोधित करते हुए ममता ने आश्वासन और सख्त रुख, दोनों का संकेत दिया. I-PAC या BJP का नाम लिए बिना उन्होंने इस विवाद को राजनीतिक डराने-धमकाने का मामला बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी TMC से जुड़ी संस्थाओं पर दबाव डाला जा रहा है.
उन्होंने कहा, “आपको चुनावों के दौरान ही यह (केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी) क्यों याद आता है? आप हमारी एजेंसियों और हमारी पार्टी के लिए काम करने वालों को पश्चिम बंगाल छोड़ने के लिए कह रहे हैं.” उन्होंने आरोप लगाया: “आपके पास 50 एजेंसियां हैं. हमारे पास केवल एक है. अगर उन्हें धमकाया गया, तो वे मेरी पार्टी में शामिल हो जाएंगे और हम उन्हें नौकरी देंगे. मैं किसी की नौकरी नहीं जाने दूंगी.”
ममता ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर अपने भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से बात की है.
ममता का यह दखल उन खबरों से पैदा हुए भ्रम के बीच आया है, जिनमें कहा गया था कि I-PAC ने बंगाल के अपने कर्मचारियों को लगभग 20 दिनों की छुट्टी पर जाने को कहा है. यह कदम एजेंसियों की कार्रवाई और एक चल रही जांच से जुड़ी पूछताछ के बाद उठाया गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में I-PAC के निदेशकों में से एक, विनेश चंदेल को मनी-लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में गिरफ्तार किया था. एक अन्य निदेशक, ऋषि राज सिंह को भी एजेंसी ने तलब किया है.
TMC ने बंगाल में I-PAC के बंद होने की खबरों को गलत सूचना बताकर खारिज कर दिया. पार्टी ने कहा कि इसका उद्देश्य पार्टी के चुनावी तंत्र को बाधित करना है. पार्टी के बयान में कहा गया, “हमें एक मीडिया रिपोर्ट मिली है जिसमें दावा किया गया है कि I-PAC ने पश्चिम बंगाल में अपना काम रोक दिया है. यह दावा पूरी तरह निराधार है.”
I-PAC विवाद की एक व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि है. यह फर्म TMC की चुनावी रणनीति से गहराई से जुड़ी रही है. यह केंद्रीय जांच एजेंसियों की नजर में है. इसके कोलकाता कार्यालय और इसके नेतृत्व से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की गई है.
ममता ने बार-बार कहा है कि ये कार्रवाइयां BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक बदले के तहत की जा रही हैं. 19 अप्रैल की रैली में उनकी टिप्पणियों में भी यही हमला दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि TMC के साथ काम करने वाले संगठनों पर जांच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है. पार्टी के कई उम्मीदवारों को ED के समन मिले थे. आयकर विभाग ने एक उम्मीदवार के साथ-साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट और ममता के चुनावी नामांकन के प्रस्तावक मिराज शाह के घर पर भी छापेमारी की थी. 19 अप्रैल को ED ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास पर छापेमारी की, जिन्हें ममता का भरोसेमंद माना जाता है.
ममता ने एक अन्य रैली में कहा, “जो व्यक्ति मुझे सुरक्षा देता है, उसे ED के जरिए परेशान किया जा रहा है. आप मेरी हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर आपमें हिम्मत है, तो मुझ पर गोली चलाएं. लेकिन मैं झुकूंगी नहीं. मुझे पता है कि धमकियों का करारा जवाब कैसे देना है.”
यह घटना सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि I-PAC ने काम रोका या नहीं, बल्कि इसके इर्द-गिर्द छिड़ी धारणा की लड़ाई इसे अहम बनाती है. काम रुकने और कर्मचारियों को छुट्टी पर जाने की खबरों ने चुनाव के पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल) से कुछ दिन पहले TMC के अभियान ढांचे में गड़बड़ी का आभास दिया.
I-PAC, TMC की चुनाव प्रबंधन रणनीति का एक मुख्य स्तंभ है. कामकाज में रुकावट का कोई भी संकेत विपक्षी BJP के उन दावों को बल देता है कि ममता की पार्टी का संगठन कमजोर हो रहा है. यह BJP को TMC के चुनावी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठाने का मौका भी देता है, खासकर I-PAC नेतृत्व के खिलाफ चल रही जांच के संदर्भ में. जैसा कि केंद्रीय मंत्री और राज्य BJP के पूर्व अध्यक्ष सुकान्त मजूमदार ने कहा, “I-PAC एक निजी कंपनी है और वह तय कर सकती है कि उसे कैसे काम करना है. लेकिन सवाल स्वाभाविक रूप से तब उठते हैं जब एक चुनावी रणनीति बनाने वाली फर्म किसी राजनीतिक पार्टी से गहराई से जुड़ जाती है और कोयला तस्करी व अवैध धन से जुड़े आरोपों में फंस जाती है.”

