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क्या हेमंत सोरेन मंईयां सम्मान योजना से एक बार फिर BJP को हरा पाएंगे?

हेमंत सोरेन सरकार मंईयां सम्मान की लाभार्थी महिलाओं को अब बिना किसी गारंटी के लोन देने जा रही है और इस घोषणा से BJP बेचैन है

हेमंत सोरेन
हेमंत सोरेन एक चुनावी रैली में (फाइल फोटो)
अपडेटेड 16 फ़रवरी , 2026

बीते विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले यानी अगस्त 2024 में हेमंत सोरेन ने 'मंईयां सम्मान योजना' की घोषणा की. शुरुआत में 18 वर्ष से अधिक और 50 साल तक की महिलाओं को 1,000 रुपए दिए गए. जवाब में BJP ने 2,100 रुपए देने की बात की. नहले पर दहला मारते हुए हेमंत सरकार ने चुनाव की घोषणा से ठीक एक दिन पहले इसे कैबिनेट से पास कराकर 2,500 रुपए कर दिया. झारखंड में ऐसा कुछ पहली बार हो रहा था. पैसों की इस बारिश ने अपना असर दिखाया और 81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा में हेमंत सरकार 54 सीटों के साथ सत्ता में आ गई.

ऐसा ही कुछ अब नगर निकाय चुनाव में होने की संभावना दिखने लगी है. चुनाव के बीच हेमंत सरकार ने एक बार फिर वैसी ही घोषणा कर दी है. इसे 'मंईयां सम्मान 2.0' कहा जा रहा है. दरअसल, बीते 8 फरवरी को हुई इस नई घोषणा के मुताबिक, मंईयां सम्मान की लाभार्थी महिलाओं को अब 20 हजार रुपए तक का लोन बैंक बिना किसी गारंटी के देने जा रहे हैं. यह उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए दिया जाएगा. कर्ज की किस्तों को महिलाओं को पहले से मिल रही 2,500 रुपए प्रतिमाह की राशि से ही काट लिया जाएगा.

अगर एक ही परिवार में मंईयां सम्मान योजना की एक से ज्यादा लाभार्थी महिलाएं हैं, तो सभी को अलग-अलग 20 हजार का लोन मिलेगा. यानी योजना का लाभ हर पात्र महिला उठा सकेगी, चाहे वह एक ही घर में हो या अलग-अलग. इस योजना को लेकर राज्य सरकार के वित्त विभाग और बैंकर्स समिति के बीच सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है. बीते 7 फरवरी को हुई बैठक में बैंकों ने इस पहल में सहयोग देने पर सहमति जताई है. सरकार का मानना है कि महिलाओं को छोटे व्यवसाय के लिए पूंजी मिलने से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

बेचैन हुई BJP

चुनाव के बीच ऐसी घोषणा ने एक बार फिर BJP को बेचैन कर दिया है. पार्टी ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना है और इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की है. BJP के विधि विभाग के प्रदेश संयोजक सुधीर श्रीवास्तव ने कहा, "अभी 23 तारीख को पूरे प्रदेश में चुनाव होना है. तब तक आदर्श आचार संहिता लागू है. लेकिन सरकार को दिखाना है कि हम राज्य निर्वाचन आयोग को नहीं मानते. चुनाव आयोग से हमने इसकी जांच कराने की मांग की है. आयोग ने भी इसे गंभीर मामला माना है."

हालांकि, सरकार किसी भी जांच से बच निकलेगी, क्योंकि इस फैसले की लिखित या मौखिक जानकारी आधिकारिक तौर पर मीडिया को नहीं दी गई. दरअसल, बीते 7 फरवरी को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैंक समिति के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने बैंकों को ऐसा करने का निर्देश दिया. ऐसे में यह सीधे तौर पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला नहीं दिख रहा है.

BJP यह मानकर चलती है कि शहरी मतदाता उसे ही वोट करते हैं और करेंगे भी. लेकिन इस योजना की घोषणा के साथ BJP को अपने उस मतदाता वर्ग को लुभाने में एक बार फिर दिक्कत आ रही है. शहर की निम्न आय वर्ग की महिलाओं के बीच योजना की खासी चर्चा है. इस घोषणा के सहारे जेएमएम निम्न आय वाले शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने की तरफ कदम बढ़ा रही है. बता दें कि राज्य में मंईयां सम्मान का लाभ 51 लाख से अधिक महिलाएं उठा रही हैं. सरकार प्रत्येक माह 1,250 करोड़ रुपए इस मद में खर्च कर रही है. इस लिहाज से देखें तो सरकार 21,250 करोड़ रुपए अब तक महिलाओं के खाते में डाल चुकी है. अगर सभी महिलाओं ने नई घोषणा के मुताबिक लोन के लिए आवेदन कर दिया, तो विभिन्न बैंकों के माध्यम से लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक की रकम लोगों के खाते में जाएगी.

ऐसे में सवाल यह है कि क्या हेमंत सरकार की मंईयां सम्मान योजना सहित अन्य योजनाएं, जिन्हें धरातल पर उतारा गया है, उनसे काम नहीं बन रहा था जो एक और नई योजना लानी पड़ी? वह भी निकाय चुनाव के दौरान. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रवक्ता मनोज पांडेय कहते हैं, "यह नई योजना बिल्कुल भी नहीं है. इसका प्रस्ताव काफी पहले तैयार कर लिया गया था. बैंकों से पत्राचार और बैठकों के माध्यम से निर्णय की प्रक्रिया चल रही थी. अभी बैंकों ने सहमति दी, तो इसकी खबर मीडिया को लगी." वह आगे कहते हैं, "लेकिन इससे इतर मैं यह कहना चाहता हूं कि चुनाव आयोग के पास वो लोग गए हैं जो बिहार चुनाव में 10 हजार बांट रहे थे और 2 लाख रुपए का सब्जबाग दिखा रहे थे. उन्हें चुनाव परिणाम अभी से पता हैं, इसलिए बेचैनी दिख रही है."

चुनाव पर कितना असर?

चूंकि मंईयां सम्मान योजना की लाभार्थी लगभग सभी कम आय वर्ग वाली महिलाएं हैं, ऐसे में इंडिया गठबंधन सरकार को उम्मीद है कि 'शहर की सरकार' चुनने में ऐसी महिलाएं इस योजना को ध्यान में रखकर मतदान करेंगी. इस वक्त भी प्रत्याशियों को महिला वर्ग को लुभाने में मदद जरूर मिल रही है. क्योंकि यह जांचा-परखा फार्मूला है, जिसका लाभ पहले घोषणा करने वाली पार्टियों को देशभर में मिलता रहा है.

शिबू सोरेन के प्रेस सलाहकार रह चुके शफीक अंसारी कहते हैं, "लाभ मिल सकता है, लेकिन मंईयां सम्मान योजना (नकद राशि) की तरह नहीं. क्योंकि यह लोन है, सीधे नकद नहीं. अगर कोई इसे लेता है तो उसे लौटाना भी होगा. दूसरी बात यह कि जब तक यह तय नहीं हो जाता कि कितनी महिलाएं लोन के लिए आगे आ रही हैं, यह कहना मुश्किल होगा कि नई घोषणा का सीधा और बड़ा फायदा सत्ताधारी दल को मिलेगा. लेकिन दलगत आधार पर चुनाव न होने के बावजूद जेएमएम और कांग्रेस के पक्ष में एक माहौल तो फिर से बन गया है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता."

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