scorecardresearch

राजस्थान में कांग्रेस के सबसे दिग्गज आदिवासी नेता के भाजपा में जाने की असल कहानी

बांसवाड़ा जिले की बागीदोरा सीट से विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय 19 फरवरी को भाजपा में शामिल हो गए हैं

महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा में शामिल होने के मौके पर
महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा में शामिल होने के मौके पर
अपडेटेड 21 फ़रवरी , 2024

9 अगस्त 2022 का दिन था. बांसवाड़ा के आदिवासी कुंभ कहे जाने वाले मानगढ़ धाम में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में एक सभा चल रही थी. कांग्रेस के आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय की सभा को संबोधित करने की बारी आई तो उन्होंने कहा, ‘‘मेरे शरीर में जब तक खून और पानी है, मैं अशोक गहलोत और कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ूंगा.’’ इस बयान के 9 माह बाद अब महेंद्रजीत सिंह मालवीय अशोक गहलोत और कांग्रेस दोनों का साथ छोड़ दिया है. 

19 फरवरी 2024 को राजस्थान के भाजपा कार्यालय में प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह की मौजूदगी में मालवीय ने भाजपा का दामन थाम लिया. भाजपा का केसरिया पट्टा में गले में पहनते ही मालवीय ने कहा, ‘‘कांग्रेस आज कुछ लोगों के बीच घिर गई है. कांग्रेस के पास अब न पहले जैसा नेतृत्व है न विजन. कांग्रेस ने जब रामलला के दर्शन का न्यौता ठुकरा दिया तो मुझे बहुत ठेस लगी. भाजपा की नीतियों की वजह से मैं एक बार फिर घर लौटा हूं.’’

मालवीय ने जब वापस घर लौटने की बात कही तो वहां मौजूद भाजपा नेताओं ने आश्चर्य से मालवीय की तरफ देखा. मालवीय ने उनकी शंका दूर करते हुए कहा, ‘‘मेरी राजनीति की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई है. विद्यार्थी परिषद के बैनर तले मैं बांसवाड़ा कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुना गया.” 

मालवीय का यह बयान राजस्थान की सियासत पर नजर रखने वालों के लिए भी चकित करने वाला था क्योंकि पिछले चार दशक से मालवीय की पहचान राजस्थान में कांग्रेस के आदिवासी नेता के तौर पर रही है. 1980 के दशक में बांसवाड़ा जिले की नाहरपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच से अपने सियासी जीवन की शुरुआत करने वाले महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने कांग्रेस के साथ जुड़कर ही जिला परिषद, विधानसभा और संसद तक का सफर तय किया है. मालवीय 1998 में बांसवाड़ा सीट से सांसद चुने गए और 2013 से लेकर 2023 तक लगातार चार बार बांसवाड़ा जिले की बागीदोरा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं. 

मालवीय ही नहीं उनका पूरा परिवार बांसवाड़ा जिले की राजनीति में सक्रिय है. मालवीय की पत्नी रेशम मालवीय पिछले 13 साल से लगातार बांसवाड़ा की जिला प्रमुख हैं और उनका बेटा कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय है.

मालवीय कांग्रेस की सरकारों में तकनीकी शिक्षा, जनजाति क्षेत्रीय विकास, ग्रामीण विकास विभाग और जल संसाधन जैसे विभागों को संभाल चुके हैं. ऐसे यह समझना जरूरी है कि आखिर उन्होंने किन वजहों से भाजपा का दामन थामा होगा.  

ईडी का डर

कांग्रेस सरकार में महेंद्रजीत सिंह मालवीय जल संसाधन विभाग के मंत्री रहे हैं. राजस्थान में जल जीवन मिशन में अनियमितताओं को लेकर भूजल विभाग मंत्री रहे महेश जोशी के ठिकानों पर ईडी कई बार धावा बोल चुकी है. 

जल संसाधन विभाग में हुई गड़बड़ियों को लेकर पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ईडी की राडार पर थे. इसके अलावा राजस्थान में पेपर लीक मामलों में उनके खास माने जाने वाले दिनेश खोड़निया का नाम सामने आने के बाद महेंद्रजीत सिंह भी निशाने पर थे. माना जा रहा है कि ईडी की कार्रवाई हो इससे पहले ही मालवीय ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया. 

नेता प्रतिपक्ष का पद  

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय नेता प्रतिपक्ष बनने की दौड़ में शामिल थे, लेकिन जब इस पद के लिए दलित समुदाय से आने वाले टीकाराम जूली का नाम तय हो गया तो मालवीय नाराज हो गए. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा कहते हैं, ‘‘कांग्रेस ने मालवीय को इतना सब कुछ दिया, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के लिए क्या किया. मालवीय ने हमेशा अपनी पार्टी के नेताओं को हराने का काम किया है, उनका आचरण संदिग्ध रहा है. पिछली बार मालवीय को ढाई साल तक इसलिए मंत्री नहीं बनाया गया क्योंकि उन्होंने पार्टी के नेताओं को हराने का काम किया था. जब उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से माफी मांगी तब उन्हें मंत्री बनाया गया.’’   

सियासी भविष्य की चिंता  

आदिवासी क्षेत्र में भारतीय आदिवासी पार्टी के कारण कांग्रेस व भाजपा का जनाधार लगातार खिसक रहा है. 2023 के विधानसभा चुनाव में बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की आठ सीटों पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप) ने भाजपा के बराबर वोट हासिल किए हैं. भाजपा इस सीट को सी श्रेणी की सीट मान रही थी. ऐसे में मालवीय को अपने पाले में शामिल करके पार्टी ने यहां अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. बांसवाड़ा में अपना सियासी भविष्य सुरक्षित रखने के लिए भाजपा के पाले में जाना मालवीय की भी मजबूरी थी. 

‘बाप’ का बढ़ता जनाधार  

आदिवासी क्षेत्र में भारतीय आदिवासी पार्टी का बढ़ता जनाधार भी मालवीय व उनके परिवार के सियासी भविष्य के लिए बड़ा संकट माना जा रहा है. विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बात को और ज्यादा पुख्ता कर देते हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस को 5 लाख 97 हजार, भाजपा को 5 लाख 30 हजार और भारतीय आदिवासी पार्टी को 5 लाख 25 हजार वोट हासिल हुए हैं. 

बांसवाड़ा जिले की पांच विधानसभा सीटों पर भारतीय आदिवासी पार्टी ने दो लाख 56 हजार 973 वोट हासिल किए. 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय आदिवासी पार्टी ने 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे जिनमें से 3 सीटों पर पार्टी को जीत मिली और 5 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे. 12 सीटें ऐसी थी जहां भारतीय आदिवासी पार्टी तीसरे नंबर पर रही और 4 सीटों पर वह चौथे स्थान पर रही. 15 सीटों पर भारतीय आदिवासी पार्टी ने 20 हजार से लेकर एक लाख तक वोट हासिल किए. 

Advertisement
Advertisement