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क्या हैं वे फैसले जो सीएम मोहन यादव के सामने बड़ा मौका बनने वाले हैं?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का आने वाला सप्ताह काफी व्यस्त रहने वाला है, जिसकी प्रमुख वजह मंत्रिमंडल विस्तार और राज्यसभा चुनाव हैं

मोहन यादव (फाइल फोटो)
मोहन यादव (फाइल फोटो)
अपडेटेड 16 फ़रवरी , 2026

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए आने वाला सप्ताह राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त रहने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाले दिनों में उन्हें कई बड़े राजनीतिक फैसले लेने हैं.

इनमें सबसे प्रमुख राज्य सरकार के बोर्डों-निगमों में अध्यक्षों की नियुक्तियां हैं. राज्य में लगभग 30 ऐसे सरकारी निकाय हैं, जहां राजनीतिक प्रमुखों का चयन बाकी है.

सूत्रों के मुताबिक, BJP केंद्रीय नेतृत्व से इन सरकारी निकायों के अहम पदों पर नियुक्ति के लिए हरी झंडी मिल चुकी है. इन पदों के लिए जिन नेताओं पर विचार किया जा रहा है उनमें 2023 के विधानसभा चुनावों में हारने वाले BJP नेता और भविष्य में निर्वाचित पदों के लिए तैयार किए जा रहे नेता शामिल हैं.

अगले कुछ दिनों में ही एक और अहम फैसला जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर होगा. मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं. दो BJP के पास हैं और एक कांग्रेस के. BJP सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन 21 जून को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

विधानसभा के गणित के मुताबिक, BJP को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी. BJP के भीतर पिछले चुनाव हार चुके कुछ नेता राज्यसभा सीट के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं. पार्टी नेतृत्व की तरफ से अन्य राज्यों के नेताओं को भी मौका दिए जाने की प्रबल संभावना है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री BJP में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने कुछ उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ा सकते हैं.

सीएम मोहन यादव के लिए एक और सबसे अहम मुद्दा प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार है. BJP शासित गुजरात और छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल में फेरबदल हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हुआ है. मोहन यादव स्वयं एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि मंत्रिमंडल में BJP के कई वरिष्ठ चेहरे मौजूद हैं.

राज्य सरकार के दो साल से अधिक पूरे होने के बाद जब भी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा, क्षेत्रीय के अलावा लैंगिक और जातिगत प्रतिनिधित्व हमेशा की तरह प्रमुख कारक होने की उम्मीद है. इन तीन फैसलों के बाद ही जाहिर होगा कि क्या सचमुच मोहन यादव ने अपनी पूरी क्षमता हासिल कर ली है.

इन राजनीतिक निर्णयों के अलावा, कई अन्य प्रशासनिक मामले भी हैं. उदाहरण के लिए सरकार को अगले कुछ सप्ताह में ही करीब आधा दर्जन महत्वपूर्ण जिलों में जिला मजिस्ट्रेटों का ट्रांसफर और पोस्टिंग करना है. जिलाधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को लंबे समय से टाला जा रहा है.

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