पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने LPG की पैदा हो रही किल्लत के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उनका तर्क है कि पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष से पैदा हुए उर्जा संकट के बीच पाबंदियां लगाने से पहले, केंद्र सरकार कुकिंग गैस और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त रिजर्व बनाने में नाकाम रही.
11 मार्च को एक बंगाली न्यूज़ चैनल से बात करते हुए ममता ने कहा कि अगर केंद्र ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों के लिए पहले से बेहतर तैयारी की होती, तो इस संकट को कम किया जा सकता था. उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को पहले LPG, तेल और गैस का पर्याप्त रिजर्व सुनिश्चित करना चाहिए था. इसके बिना ही, उन्होंने हालात से निपटने की किसी ठोस प्लानिंग के बिना पाबंदियां थोप दीं."
बंगाल में SIR के खिलाफ अपना धरना अभी-अभी खत्म करने वाली ममता, LPG सप्लाई में आई इस रुकावट के मुद्दे पर 16 मार्च को कोलकाता में एक बड़ी रैली की अगुवाई करेंगी.
LPG की इस किल्लत के तार पश्चिम एशिया के जियो-पॉलिटिकल तनाव से जुड़े हैं, जिसका असर अब दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई में दिख रहा है. भारत LPG के लिए विदेशी सप्लायर्स पर बहुत ज्यादा निर्भर है, और इसके शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है.
ममता ने आरोप लगाया कि इस उभरते ऊर्जा संकट को लेकर केंद्र की नीतिगत फैसले नाकाफी थे. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र का ध्यान अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं में भटका हुआ है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) चीफ ने तंज कसते हुए कहा, "केंद्र SIR करवा सकता है और वोटर्स के नाम काट सकता है, लेकिन वह देश के गैस और तेल के रिजर्व को मैनेज नहीं कर सकता."
उनके मुताबिक, इस संकट ने LPG सिलेंडरों की होर्डिंग यानी जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा दिया है. उन्होंने आरोप लगाया, "इस संकट से निपटने के लिए केंद्र के पास किसी ठोस पॉलिसी का न होना परोक्ष रूप से कालाबाजारी करने वालों की मदद कर रहा है."
मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां ऐसे वक्त में आई हैं जब कई राज्यों ने LPG की सप्लाई (खासकर रेस्टोरेंट्स और छोटे बिज़नेस में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडरों की) सख्त कर दी है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि घरों की जरूरतों को बचाने के लिए घरेलू खपत को प्राथमिकता दी जा सके.
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई को स्थिर करने के लिए अतिरिक्त गैस को घरेलू खपत की तरफ मोड़ने का निर्देश दिया है. जमाखोरी को हतोत्साहित करने के लिए रेगुलेटर्स ने घरेलू रिफिल बुकिंग के बीच का गैप बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए हैं.
हालांकि, इस 'री-प्रायोरिटाइजेशन' का असर उन सेक्टर्स पर पड़ा है जो कमर्शियल LPG पर निर्भर हैं, जैसे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे भोजनालय. कई शहरों में इंडस्ट्री बॉडीज ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें अपना बिज़नेस अस्थायी रूप से बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है.
सरकार के इन कदमों के बावजूद, ममता इस बात पर अड़ी रहीं कि इस संकट ने राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा जरूरतों के इंतजाम की गहरी खामियों को उजागर कर दिया है. उनका तर्क था कि सप्लाई पर पाबंदियां लगाने से पहले केंद्र को जियो-पॉलिटिकल खतरे का अनुमान लगा लेना चाहिए था और बड़े रिजर्व बनाने चाहिए थे.
साफ है कि बंगाल चुनावों से पहले LPG का यह मुद्दा TMC और BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बीच चल रही सियासी खींचतान का एक और मुद्दा बन गया है. एक तरफ ममता प्रशासनिक नाकामियों का आरोप लगा रही हैं, तो दूसरी तरफ केंद्र इस बात पर जोर दे रहा है कि सप्लाई चेन को मैनेज किया जा रहा है और घरेलू उपभोक्ता पूरी तरह सुरक्षित हैं.

