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बिहार : हर टोले में मिलती है शराब और ये सबको पता है! सीवान-सारण से ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार के सीवान और सारण जिलों में जहरीली शराब पीने से कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई है. इंडिया टुडे की इस ग्राउंड रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य के इन इलाकों में शराबबंदी नाममात्र की भी नहीं है

सीवान के कौड़िया में शव के अंतिम संस्कार की तैयारी
सीवान में जहरीली शराब पीने से मारे गए व्यक्ति के अंतिम संस्कार की तैयारी
अपडेटेड 18 अक्टूबर , 2024

सर्दी शुरू होने से पहले खेतों में खिले कास के जंगल के बीच पांच चिताएं एक साथ सजाई जा रही हैं. इनमें तीन पुरुष और दो महिलाओं की चिताएं हैं. ये सभी चिताएं सीवान जिले के कौड़िया पंचायत के मुसहर टोली की हैं. इन चिताओं को सजाने में जुटे टोले के लोगों में एक नागेंदर मुसहर अपने पिता बैद्यनाथ मुसहर का शव लेकर आए हैं. 

वे बताते हैं, "मेरे पिता की मौत जहरीली शराब पीने से हो गई. दो रोज पहले कहीं से शराब का पाउच पी लिया था. फिर दिखाई देना बंद होने लगा. हम लोग उनको सीवान सदर अस्पताल ले गए. वहां नहीं संभला तो उनको पटना रेफर कर दिया. लेकिन पटना पहुंचने से पहले ही कल शाम आठ बजे वो मर गए." 

मगर बिहार में तो शराबबंदी है, ऐसे में उनको शराब कहां से मिल गई? यह पूछते ही नागेंदर बिफर पड़े. वे कहने लगे, "शराबबंदी कहां है, शराबबंदी होता तो ऐसे शराब मिलता? हर जगह शराब मिलता है, कहां नहीं मिलता? प्रशासन चाहता तो शराब मिलता? ऐसे हर जगह मिलता है?"

मोहन साह के पुत्र पप्पू साह
मोहन साह के पुत्र पप्पू साह

वहीं इसी टोले से दो किमी दूर माघर गांव के पप्पू साह कहते हैं, "दारू नहीं मिलता तो मेरे पिताजी रोज कैसे दारू पीते? एक दिन बिना दारू के नहीं रहते थे, टोले में ही पोखर के पास दारू मिल जाता था. इतने दिन पीते थे तो कुछ नहीं हुआ, मगर इस बार जान ही चली गई."

कौड़िया और माघर की ये दो जानलेवा कहानियां बिहार में शराबबंदी की हकीकत को उजागर करती हैं. सीवान और सारण जिले के सीमावर्ती इलाके के दस किमी. के दायरे में बुधवार (16 अक्टूबर) से जो मौतों का सिलसिला शुरू हुआ उसमें कम से कम 37 लोगों की जान जा चुकी है और 27 लोग जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हैं. इनमें सीवान में 28, सारण में सात और गोपालगंज में दो लोगों की मौत की पुष्टि की गई है. 

बहरहाल, दो जिलों में बंटा यह पूरा इलाका बमुश्किल दस किमी. की परिधि में फैला है, जिसमें सीवान के भगवानपुर हाट और सारण के मशरक को अवैध शराब के गढ़ के रूप में बताया जा रहा है. माघर गांव के लोग दबे स्वर में बताते हैं कि गांव के पोखर टोला के पास हमेशा से शराब मिलती रही है. पोलीथीन के पाउच में दो सौ ग्राम शराब पहले 50 रुपए में मिलती थी, अब पचास में दो पाउच मिलने लगा है. गांव में शराब पीने वाले लोग जब चाहे उन्हें आसानी से शराब मिल जाती है.

गांव के सुनर देव राय कहते हैं कि उन्होंने भी अपने गांव के ही रुदल मांझी से शराब खरीदी थी. जिस पाउच में उन्होंने शराब खरीदी थी, वे उसे भी दिखाते हैं. वे बताते हैं, "हमको तो कुछ नहीं हुआ मगर टोले के लोगों ने पकड़ कर अस्पताल में भर्ती करा दिया. वहां पानी चढ़ाकर वापस भेज दिया." रुदल मांझी को पुलिस पकड़कर ले गई है.

प्रभुनाथ राम के घर मातम
प्रभुनाथ राम के घर मातम

गांव के लोग एक अन्य व्यक्ति प्रभुनाथ राम का भी नाम लेते हैं. लोग बताते हैं कि यह शराब का लोकल वेंडर है. उसे दो बार पुलिस पकड़कर ले जा चुकी है. इस बार के जहरीली शराब कांड में प्रभुनाथ राम की भी मौत हो गई है. उसके घर से उसकी पत्नी की रोने की आवाज लगातार आती है. वह शराब को कोसते-कोसते बेहोश हो जाती है. आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला प्रभुनाथ मांझी का बेटा अमरेश यह दबे स्वर में स्वीकार करता है कि उनके पिता को एक बार शराब के मामले में जेल जाना पड़ा था.

दक्षिण सागर सुल्तानपुर पंचायत के मुखिया मनमोहन मिश्रा कहते हैं, "आबकारी विभाग ने अगर सही तरीके से काम किया होता तो ऐसी घटना नहीं होती. एक डेढ़ साल पहले भी मशरक में ऐसी घटना हो चुकी है. मुखिया का काम तो लोगों को समझाना है, हम लोग प्रशासन को हमेशा सजग करते रहे हैं. हम फोन करते रहे हैं. अगर प्रशासन सजग रहता तो ऐसी घटना नहीं घटती. मशरक से हमारे यहां शराब आती है, प्रशासन उसे रोकने की कोशिश नहीं करता."

अगस्त 2022 में इसी इलाके में जहरीली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हो गई थी. इस साल भी मशरक में जहरीली शराब से पांच लोगों के मरने की खबर है. लोग बताते हैं कि शराबबंदी के बाद मशरक स्पिरिट से नकली शराब बनाने का अड्डा बन गया है. इसलिए इस इलाके में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं. 

गांव के राजू कुमार कहते हैं, "यह तो हमलोगों ने घर-घर जाकर शराब पीने वालों को जबरदस्ती अस्पताल भेजा नहीं तो मरने वालों की संख्या और अधिक होती." गांव में जैसे ही प्रभुनाथ राम के जहरीली शराब से मरने की खबर आई, गांव के युवाओं ने घर-घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान की जो नियमित शराब पीते थे. उनमें से जिन लोगों ने मंगलवार या बुधवार को शराब पी थी उन्हें जबरन अस्पताल भेजा.

ये घटनाएं बताती हैं कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब हर जगह आसानी से उपलब्ध है. मगर इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी पुलिस ने सारण के एक चौकीदार और एक एएसआई के खिलाफ ही कार्रवाई की है. चौकीदार महेश राय और एएसआई रामनाथ झा को निलंबित कर लाइन हाजिर किया है.

इस मामले में जब हमने सीवान के डीएम मुकुल कुमार गुप्ता से बातचीत की तो उन्होंने कहा, "हमारे जिले से 63 लोग एडमिट हुए, जिनमें 20 लोगों की मृत्यु हुई है. 13 लोगों को बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया है. पोस्टमार्टम में शराब की पुष्टि और जांच में सहयोग करने के वायदे के बाद सरकार की तरफ से मृतकों को चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा. इस मामले में लगातार कार्रवाई हो रही है, गिरफ्तारी हो रही है. फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज का पता लगा लिया गया है." मगर डीएम गुप्ता रोजाना सार्वजनिक रूप से शराब की बिक्री के सवाल को टाल गए.

वहीं, सारण के डीएम अमन समीर ने कहा, "हमारे जिले में 31 लोग शराब से प्रभावित थे, जिनमें 14 इलाजरत हैं, 12 स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं. पांच की मृत्यु हो गई है. हमने शराब की खाली पाउच के ड्रॉपलेट की जांच कराई है, उसमें 80 फीसदी मिथाइल एल्कोहल मिला है."

बसंतपुर में पहुंचा सरकारी अमला
बसंतपुर में पहुंचा सरकारी अमला

इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए डीजीपी आलोक राज ने कहा कि नौ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. पटना से मद्यनिषेध विभाग के अधिकारी इस घटना की प्रोफाइलिंग के लिए भेजे गए हैं. उनका काम यह पता करना है कि कहां से शराब की आपूर्ति हो रही है, कौन-कौन माफिया इसमें संलग्न हैं, सबके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सीवान और सारण में हुई जहरीली शराब कांड की उच्चस्तरीय समीक्षा की है. उन्होंने मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे घटनास्थल पर जाकर पूरी स्थिति की जानकारी लेकर सभी बिन्दुओं पर सघन जांच करें. मुख्यमंत्री ने एडीजी (प्रोहिबिशन) की पूरी टीम को घटनास्थल पर जाकर उसकी सघन जांच कर इस कांड में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा, उन्होंने डीजीपी को भी निर्देश दिया कि पूरे घटनाक्रम की अपने स्तर से लगातार मॉनीटरिंग करते रहें और इस घटना के लिये जो भी दोषी हों उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें.

इधर, इस मसले पर विपक्ष लगातार राज्य सरकार को घेर रहा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, "बिहार में कथित शराबबंदी है लेकिन सत्ताधारी नेताओं-पुलिस और माफिया के गठजोड़ के कारण हर चौक-चौराहों पर शराब उपलब्ध है. क्या यह गृह विभाग और मुख्यमंत्री की विफलता नहीं है? क्या मुख्यमंत्री जी होशमंद है? क्या सीएम ऐसी घटनाओं पर एक्शन लेने व सोचने में सक्षम और समर्थ है? इन हत्याओं का दोषी कौन? कितने भी लोग मारे जाए लेकिन मजाल है किसी वरीय अधिकारी पर कोई कार्रवाई हो?"

तेजस्वी के अलावा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "बिहार में शराबबंदी लागू है लेकिन जहरीली शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे आये दिन मौतें होती हैं. सरकार को इस पर लगाम लगानी चाहिए."

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