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हरियाणा : कांग्रेस का ईवीएम की बैटरियों से छेड़छाड़ का आरोप, लेकिन ये काम कैसे करती हैं?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद आरोप लगाया है कि जिन ईवीएम में 99% बैटरी चार्ज थी, उनमें कांग्रेस हार गई, जबकि 60-70% चार्ज वाली ईवीएम में पार्टी को जीत मिली

जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने हरियाणा चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाए थे
जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने हरियाणा चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाए थे
अपडेटेड 10 अक्टूबर , 2024

कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. पार्टी के संचार महासचिव जयराम रमेश ने एक पैटर्न पर ध्यान दिलाते हुए कहा है, "99% बैटरी चार्ज वाली ईवीएम ने कांग्रेस के लिए हार का संकेत दिया, जबकि 60-70% चार्ज वाली ईवीएम ने जीत का संकेत दिया."

हरियाणा की हार को अप्रत्याशित बताते हुए कांग्रेस नेताओं ने 9 अक्टूबर को चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों से भी मुलाकात की है. इसके बाद पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग से उन वोटिंग मशीनों को सील करने की मांग की है, जिनके खिलाफ उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है. इस सारे विवाद के केंद्र में ईवीएम की बैटरी हैं. ऐसे में समझते हैं कि ये कैसे काम करती हैं और क्या उनके साथ छेड़छाड़ संभव है?

कैसे काम करती है ईवीएम की बैटरी?

ईवीएम एल्कलाइन बैटरी पर काम करती हैं, जिससे बिजली के बिना ही उनका उपयोग किया जा सकता है. ईवीएम की कंट्रोल यूनिट (सीयू) में 7.5 वोल्ट या 8 वोल्ट का पावर पैक होता है, जबकि उसी से जुड़े वीवीपैट यूनिट में 22.5 वोल्ट का एक अलग पावर पैक होता है.

ईवीएम के लिए बैटरी का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) करता है. चुनाव आयोग के मुताबिक, सीयू और वीवीपैट के पावर पैक की नियमित रूप से निगरानी की जाती है जिसमें चार्ज के प्रतिशत के साथ उनकी स्थिति 'उच्च', 'मध्यम', 'निम्न', 'मार्जिनल' या 'बैटरी बदलें' के रूप में डिस्प्ले होती है. जब 'बैटरी बदलें' का संकेत मिलता है, तो सेक्टर अधिकारियों के पास उपलब्ध आरक्षित बैटरियों का उपयोग करके पावर पैक को बदल दिया जाता है.

आमतौर पर, एक नई बैटरी पूरे चुनाव और मतगणना प्रक्रिया के लिए चलती है, और उसी निर्वाचन क्षेत्र में फिर से चुनाव के लिए भी इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. जब तक बैटरी वोल्टेज 7.4 और 8 वोल्ट के बीच है, तब तक डिस्प्ले यूनिट '99%' चार्ज दिखाती है. एक बार जब यह 7.4 वोल्ट से कम हो जाए तो वास्तविक चार्ज प्रतिशत डिस्प्ले होने लगता है. जब वोल्टेज 5.8 वोल्ट तक पहुंच जाता है, तो बैटरी बदलने की बात डिस्प्ले होती है. बैटरी का जीवनकाल उपयोग के आधार पर अलग-अलग हो सकता है, जिसमें मॉक पोल के दौरान डाले गए वोटों की संख्या और वास्तविक चुनाव के दौरान दर्ज किए गए कुल वोट शामिल हैं.

ईवीएम बैटरी बदलने की प्रक्रिया क्या होती है?

किसी भी चुनाव से पहले प्रथम-स्तरीय जांच के दौरान ईवीएम में एक नई बैटरी लगाई जाती है और राजनीतिक दलों को पहले से सूचित किया जाता है ताकि उनके प्रतिनिधि इस प्रक्रिया के दौरान मौजूद रह सकें. चुनाव के दिन, मतदाताओं के मतदान केंद्रों में प्रवेश करने से पहले, उम्मीदवारों के मतदान एजेंटों की उपस्थिति में फिर से एक मॉक पोल आयोजित किया जाता है. अगर मतदान के दौरान बैटरी का लेवल गिरता है, तो उसे इन मतदान एजेंटों की उपस्थिति में बदला जाता है.

चुनाव आयोग के ईवीएम मैनुअल के मुताबिक, यदि सीयू कम बैटरी या खराबी दिखाती है, तो पीठासीन अधिकारी मतदान एजेंटों और सेक्टर अधिकारी के सामने पावर पैक को बदलने के लिए जिम्मेदार होता है. फिर सीयू के बैटरी सेक्शन को एक एड्रेस टैग के साथ फिर से सील कर दिया जाता है, और उपस्थित लोगों से हस्ताक्षर प्राप्त किए जाते हैं. मतदान के अंत में, पीठासीन अधिकारी को बैटरी में किसी भी बदलाव का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है, जिसमें सीयू की विशिष्ट आईडी, प्रतिस्थापन के कारण और मतदान एजेंटों के हस्ताक्षर शामिल हों.

कांग्रेस पार्टी का क्या है आरोप?

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि पार्टी को कम से कम तीन जिलों से मतगणना प्रक्रिया के बारे में गंभीर शिकायतें मिली हैं, जो 10-12 विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं. उन्होंने बैटरी चार्ज के स्तर और चुनाव परिणामों के बीच संबंध का जिक्र करते हुए कहा, "जहां भी 99% बैटरी थी, बीजेपी जीती और जहां यह 70% से कम थी, कांग्रेस ने जीत हासिल की. अगर यह साजिश नहीं है, तो फिर क्या है?” हालांकि  पार्टी ने कथित साजिश या बैटरी प्रतिशत उनके दावों से कैसे संबंधित हैं, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी.

हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद से ईवीएम पर सवाल खड़े होना नया नहीं है. इससे पहले भी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के बाद कांग्रेस ईवीएम की कार्यक्षमता पर सवाल उठा चुकी है. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी जैसी अन्य पार्टियां भी इसी तरह का संदेह ईवीएम पर जता चुकी हैं. हालांकि, चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि ईवीएम में हेरफेर नहीं किया जा सकता. इसके अलावा पिछले दिनों ऐसे मामलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पेपर बैलेट की वापसी या वीवीपैट पर्चियों की पूरी गिनती की मांग को खारिज कर दिया है.

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