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चीनी मांजा के खिलाफ लड़ाई क्यों हार रहा है गुजरात?

चीनी मांजा पर प्रतिबंध के बावजूद गुजरात में हर साल मकर संक्रांति के समय पतंग उड़ाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है, जिससे हजारों पक्षी घायल होते हैं या मारे जाते हैं

चीनी मांजा से घायल हो रहे पक्षी
चीनी मांजा से घायल हो रहे पक्षी
अपडेटेड 16 जनवरी , 2026

हर साल जनवरी में गुजरात के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. हालांकि, पक्षियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है.

नुकीले कांच की परत चढ़े पतंग की डोर या नायलॉन का मांजा पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है. नायलॉन के मांजा को ही चीनी मांजा भी कहा जाता है.

यह मांजा इतना खतरनाक होता है कि ये अक्सर पक्षियों के पंख और गला काट देता है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के समय गुजरात में मांजे से घायल और मृत पक्षियों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है. कई बार इस खतरनाक मांजे से उलझकर अन्य वन्यजीवों की भी मौत की खबर सामने आती है.

जनवरी में बड़ी संख्या में घायल पशु और पक्षियों को अस्पतालों में भर्ती किया जाता है. पिछले कुछ सालों में कांच के पाउडर और धातु लगाए गए मांजा से गिद्ध जैसी लुप्तप्राय प्रजातियां भी प्रभावित हुई हैं. 

हर साल कांच की परत चढ़े तेज धार वाले पतंग के धागों का इस्तेमाल नहीं करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है.

चीनी मांजा पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद हाल के वर्षों में घायल या मृत पाए जाने वाले पक्षियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. वास्तव में यह संख्या बढ़ती ही जा रही है. अहमदाबाद और पूरे राज्य में बचाव समूहों ने हजारों पक्षियों के घायल होने और मरने के मामले दर्ज किए हैं.

गुजरात के मुख्य वन्यजीव संरक्षक के जरिए जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में पतंग की डोर और मांझे से 17,065 पक्षी घायल हुए. निरंतर बचाव और पशु चिकित्सा प्रयासों के बावजूद 1,493 पक्षियों की गंभीर चोटों के कारण मृत्यु हो गई है.  

2022 में घायल पक्षियों की संख्या 14,762 थी, जो 2023 में घटकर 12,771 रह गई. हालांकि, 2024 में बढ़कर ये संख्या लगभग 13,000 हो गई. ये चौंकाने वाले आंकड़े पूरी तरह से सटीक नहीं हैं. मांजा के कारण पक्षियों के पंख और पैर अक्सर कट जाते हैं या पूरी तरह से अलग हो जाते हैं.  

कई बार ये पक्षी गंभीर घावों के बावजूद छिपने में कामयाब हो जाते हैं, इसलिए बचावकर्मी उनकी मदद नहीं कर पाते. लेकिन चोट आखिरकार इनके लिए जानलेवा साबित होती है. जीवदया चैरिटेबल ट्रस्ट (अहमदाबाद) से जुड़े एक अनुभवी बचावकर्मी कार्तिक शास्त्री ने एक मौसमी पक्षी बचाव और पुनर्वास केंद्र स्थापित किया है.

यह जनवरी में पखवाड़े भर का शिविर था, जिसे अब 60 दिनों से अधिक समय तक बढ़ाया गया है. एक और ध्यान देने वाली बात ये भी है कि अपनी मां के नहीं लौटने के कारण भोजन के इंतजार में मरने वाले चूजों की संख्या इन आंकड़ों में शामिल नहीं होती है. इसका अर्थ है कि पक्षियों का नुकसान मानवीय रूप से गिनती की संख्या से कहीं अधिक है.

इस साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी को लाए गए घायल पक्षियों की संख्या 150 थी, जो 2025 की तुलना में 50 फीसद अधिक है. अहमदाबाद विशेष रूप से इस समस्या से ग्रस्त है, क्योंकि घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में पतंग उड़ाने से पक्षियों के लिए उड़ने की जगह बहुत कम रह जाती है.

शास्त्री कहते हैं, “यह शहर दो मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमियों नल सरोवर और थोल वन्यजीव अभयारण्य के बीच पक्षियों के प्रवास मार्ग पर स्थित है. यहां बड़ी संख्या में सारस आते हैं, जिनके पंख कटे हुए होते हैं.”

2024 में केंद्र सरकार के एक वैधानिक निकाय, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सभी प्रकार के मांजा पर प्रतिबंध लगाने और पतंग उड़ाने के लिए केवल सादे सूती धागे के उपयोग की अनुमति देने की सलाह दी.

चंडीगढ़, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना और त्रिपुरा की सरकारों ने भी इसी तरह के निर्देश जारी किए हैं.
 
PETA इंडिया से जुड़े उत्कर्ष गर्ग के मुताबिक, “मांजा मनुष्यों और पक्षियों दोनों को नुकसान पहुंचाता है और उनकी जान ले लेता है. हर कोई साधारण सूती पतंग की डोर इस्तेमाल करके इन विनाशकारी चोटों और दुखद मौतों को रोकने में मदद कर सकता है.”

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण और कई राज्य प्राधिकरणों ने सिंथेटिक, नायलॉन या कांच लेपित पतंग के धागे पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. इसके अलावा, गुजरात की अदालतें और राज्य सरकार हर मकर संक्रांति के समय इन प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने की बात कहती है. 

पुलिस अक्सर 'चाइनीज मांजा' के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर अल्पकालिक प्रतिबंध जारी करती है, लेकिन कागजों पर लिखा प्रतिबंध जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग दिखता है.

नवंबर 2025 से इस जनवरी के बीच गुजरात पुलिस ने चीनी और कांच लेपित मांजे पर कार्रवाई करते हुए अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा और सूरत में लगभग 100 मामले दर्ज किए. अकेले अहमदाबाद शहर में पुलिस ने 55 मामले दर्ज किए और 63 लोगों को गिरफ्तार किया.

साथ ही 20.5 लाख रुपये मूल्य के प्रतिबंधित मांजे की 7,683 रीलें और 576 फिरकी जब्त कीं. अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के विशेष अभियान समूह ने एक बड़े बहु-स्थान अभियान में लगभग 2.34 करोड़ रुपये मूल्य की 52,000 से अधिक चीनी मांजे की रीलें और संबंधित सामग्री बरामद की है. इसके बावजूद घायल होते पक्षियों की संख्या को देखकर लगता है कि चीनी मांजा रोकने की लड़ाई सरकार हार रही है.  

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