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पिनाराई के बचाव में हुई हिंसा CPI(M) पर पड़ रही भारी

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के घर पर छापेमारी करने पहुंची ED की टीम पर CPI(M) कार्यकर्ताओं का हमला पार्टी के लिए दोहरी चुनौती बन गया है

केरल में ED की टीम पर वाम दल के कार्यकर्ताओं का हमला
केरल में ED की टीम पर वाम दल के कार्यकर्ताओं का हमला
अपडेटेड 8 जून , 2026

27 मई को तिरुवनंतपुरम में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के किराए के घर पर ED और बैंक अधिकारियों की टीम छापेमारी के लिए पहुंची थी. लेकिन इस दौरान CPI(M) के कार्यकर्ताओं ने ED की टीम पर पत्थरबाजी करते हुए गाड़ियों को रोकने की कोशिश की.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. हिंसा की इस घटना से वामपंथी दलों नकारात्मक छवि बन गई खबर है कि यह छापेमारी राज्य में कई जगहों पर एक साथ की गई थी, जिसमें पिनाराई विजयन के दामाद और पूर्व मंत्री मोहम्मद रियास का कोझिकोड स्थित घर भी शामिल था.

ED अधिकारियों के मुताबिक यह छापेमारी CMRL कंपनी के जरिए 2017 से 2020 के बीच राजनेताओं और उनके रिश्तेदारों को दिए गए अवैध भुगतानों से जुड़ी थी. खबर है कि अवैध पैसे पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा की IT कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को भी मिले थे.

कोच्चि स्थित ED दफ्तर के अधिकारियों ने 26 मई को CMRL कंपनी की केरल हाईकोर्ट में दायर याचिकाएं खारिज होने के बाद ही छापेमारी की योजना बनाई. हाईकोर्ट के इस फैसले ने ED को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ाने की हरी झंडी दे दी.

इस छापेमारी से CPI(M) के अंदर भारी हलचल मच गई. 27 मई को पार्टी के कई नेता अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किए. CPI(M) के पोलितब्यूरो ने भी पूरे देश में प्रदर्शन करने का फैसला लिया. पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी समेत कई वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी दी.

CPI (M) के पोलित ब्यूरो सदस्य ए. विजयराघवन ने इंडिया टुडे को बताया, “ ED ने केरल में BJP के एजेंडे का विरोध करने के लिए पिनाराई विजयन को निशाना बनाया है. उनकी बेटी टी. वीणा के खिलाफ मामला निराधार है. उनकी कंपनी ने कानून का पालन किया और भुगतान का हिसाब दिया.” उन्होंने आगे कहा, “CPI (M) कांग्रेस और BJP की साजिशों के आगे नहीं झुकेगी और पार्टी और उसके नेताओं को बदनाम करने के प्रयासों का विरोध करती रहेगी.”

वीणा से जुड़े लंबे विवाद में आरोप है कि उनकी कंपनी ने 2017-20 के दौरान बिना कोई सेवा दिए CMRL से 1.72 करोड़ रुपए हासिल किए थे. विजयन का कहना है कि ये आरोप उनकी छवि खराब करने की कोशिश हैं.

साथ ही ED और बैंक अधिकारियों के खिलाफ हिंसा CPI (M) पर तीन तरह से धब्बा है. पहला, यह राजनीतिक दृष्टि से भी अनुचित था क्योंकि वीणा पार्टी की सदस्य नहीं हैं. दूसरा, अधिकारियों पर हमले ने CPI (M) के उन आपराधिक तत्वों को उजागर किया जो पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं करते. तीसरा, इस हमले से विजयन की राजनीतिक स्थिति और चल रही जांच में वीणा का केस कमजोर हुआ है.

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए ED की छापेमारी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. अटकलें तेज होने के साथ ही एक असहज राजनीतिक संयोग भी सामने आया क्योंकि सतीशन ने मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ठीक एक दिन पहले मुलाकात की थी.

कांग्रेस केंद्रीय जांच एजेंसियों पर विपक्षी दलों के खिलाफ BJP के हथियार के रूप में काम करने का आरोप लगा रही है लेकिन ED की छापेमारी की निंदा करना केरल में कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी वामपंथी पार्टी का समर्थन करने जैसा होता. हालांकि, सतीशन ने राज्य के पुलिस प्रमुख रावड़ा ए. चंद्रशेखर को तलब कर हमले की परिस्थितियों और पुलिस के जरिए छापेमारी दल को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने के कारणों के बारे में जानकारी मांगी है.

इस बीच, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) की केरल शाखा ने बैंक अधिकारियों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की. AIBOC केरल ने एक मीडिया बयान में कहा, “इस घटना से गंभीर और संवेदनशील सवाल उठते हैं. केरल पुलिस पर आरोप है कि जांच करने के लिए पहुंचे निर्दोष बैंक अधिकारियों को परिसर के बाहर तनावपूर्ण स्थिति की जानकारी होने के बावजूद, उत्तेजित भीड़ के हवाले कर दिया गया. जिनमें एक महिला अधिकारी भी शामिल थीं."

केरल AIBOC के राज्य सचिव श्रीनाथ इंदुचूडन ने कहा कि यह घटना कुछ अधिकारियों पर हुए हमले से कहीं अधिक गंभीर है. उनका कहना था, “यह एक व्यापक और बेहद चिंताजनक मुद्दे को दिखाता है जो हजारों बैंक अधिकारियों को प्रभावित कर रहा है. ये अधिकारी पहले से ही कर्मचारियों की कमी, अत्यधिक कार्यभार, लक्ष्य-आधारित तनाव और गैर-बैंकिंग जिम्मेदारियों में वृद्धि के कारण भारी दबाव में काम कर रहे हैं.”

इस हमले के सिलसिले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन केरल पुलिस हिंसा की आशंका जताने और उसे रोकने में नाकाम रहने के लिए आलोचनाओं का सामना कर रही है क्योंकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे.

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