देश के ज्यादातर राज्यों में सरकार बनाने वाली BJP को अब तक केरल में सफलता नहीं मिली है. भगवा दल को इस राज्य में अब तक सिर्फ इतनी सफलता मिली है कि 2016 में उसके सीनियर नेता ओ. राजगोपाल नेमोम विधानसभा सीट से चुनाव जीतने में कामयाब हुए.
ओ. राजगोपाल ने CPI(M) से टिकट पर उनके खिलाफ खड़े वी. शिवनकुट्टी को 8,671 वोटों से हराया था. इसके अलावा, 2024 में सुरेश गोपी ने त्रिशूर लोकसभा सीट पर कैथोलिक समुदाय के समर्थन से 5,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की.
2026 के विधानसभा चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) का लक्ष्य कम-से-कम पांच विधानसभा सीटें जीतना है. साथ ही पार्टी 15 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहकर और राज्य में अपना वोट शेयर बढ़ाकर 26 फीसद तक पहुंचाना चाहती है. राज्य नेतृत्व को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा समर्थन हासिल है.
पीएम मोदी ने 29 मार्च को पलक्कड़ और त्रिशूर में बड़ी रैली को संबोधित किया. इसके अलावा, प्रधानमंत्री 3 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम और अलप्पुझा का भी दौरा करने वाले हैं.
पीएम मोदी भले ही पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेता हों, लेकिन केरल के चुनावी मैदान में BJP के पास चुनावी रणनीति की कमी साफ दिखती है. यही कारण है कि पिछली बार की तरह ही राज्य में CPI(M) के नेतृत्व वाला LDF और कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF सत्ता के लिए दावेदार हैं.
BJP के NDA को 2021 के विधानसभा चुनावों में 12.41 फीसद और 2025 के नगर निगम चुनावों में 22.6 फीसद वोट मिले थे. इस साल बेहतर प्रदर्शन की कुछ उम्मीद है. मंजेश्वरम से उम्मीदवार और BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन का कहना है, “केरल में BJP जीत के कगार पर है. हमें उन युवाओं और महिलाओं का समर्थन प्राप्त है जो वामपंथ से निराश हैं. हम LDF और UDF दोनों के खिलाफ एक मजबूत ताकत बनकर उभर रहे हैं.”
BJP को राज्य की कई सीटों पर जीत की उम्मीद है. इनमें तिरुवनंतपुरम का नेमोम और पलक्कड़ सीट भी शामिल है. नेमोम सीट से केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर जबकि पलक्कड़ से शोभा सुरेंद्रन चुनाव लड़ रही हैं. एर्नाकुलम जिले के त्रिपुनिथुरा और त्रिशूर सीट पर भी BJP जोर लगा रही है.
त्रिशूर सीट से दिवंगत मुख्यमंत्री के. करुणाकरण की बेटी पद्मजा वेणुगोपाल BJP की ओर से चुनाव लड़ रही हैं. इसी तरह मंजेश्वर से के. सुरेंद्रन को उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी को यह भी लगता है कि वट्टियूरकावु, कझाकुट्टम , आट्टिंगल , कट्टाकड़ा, चथन्नूर, कोट्टाराक्करा, अलाप्पुझा, देवीकुलम, वैकोम, कांजिरापल्ली, पूंजर, तिरुवल्ला, मालमपुझा, कोडुंगल्लूर और इरिंजलाकुडा में उसका वोट शेयर बढ़ेगा और UDF और LDF दोनों की जीत की संभावना प्रभावित होगी.
राजनीतिक विश्लेषक और अनुभवी पत्रकार वेंकटेश रामकृष्णन ने इंडिया टुडे को बताया, “पिछले कुछ वर्षों में, BJP केरल में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी है. उसके पास एक सुव्यवस्थित कार्यकर्ता समूह है और मोदी सरकार का समर्थन प्राप्त है.”
उन्होंने आगे कहा, "अभी आने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों की भविष्यवाणी करने का समय नहीं है, लेकिन BJP कुछ सरप्राइज दे सकती है. यह सच है कि BJP के पास सिवाय समुदाय-आधारित राजनीति के राज्य के लिए कोई स्पष्ट विकास नीति नहीं है और न ही कोई ठोस राजनीतिक कार्यक्रम है. हालांकि, इसी समुदाय आधारित राजनीति के कारण उन्हें एक खास फैन बेस मिला हुआ है, जिसे कांग्रेस और CPI(M) दोनों ने अब तक नजरअंदाज किया है."
अगर केरल में पार्टी अपनी जड़े जमाने में कामयाब नहीं होती है, तो संभव है कि केंद्रीय नेतृत्व राज्य नेतृत्व में फेरबदल करेगी. चुनाव प्रचार में BJP भारी रकम खर्च कर रही है. साफ है कि राज्य नेतृत्व अगर समर्थन हासिल करने में असफल रहती है, तो इस राजनीतिक तमाशे के अंत यानी चुनाव के बाद कई लोगों को पद से हटाया जाएगा.

