केरल में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होने वाले हैं. विपक्षी दल कांग्रेस की तैयारी देखकर ऐसा लग रहा है कि वह इस बार सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के खिलाफ मजबूती से मैदान में उतर रही है.
सत्ताधारी सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने राज्य में एक मेगा प्रोटेस्ट आयोजित करके अपनी ताकत दिखा दी है. इस प्रोटेस्ट के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने केरल की 140 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें जीतने का भरोसा जताया है.
चुनाव में बढ़त हासिल करने के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने में काफी समय लिया. यहीं कांग्रेस पार्टी से बड़ी चूक हो गई. पार्टी ने 20 मार्च की देर रात उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की. इस देरी के कारण सूची में शामिल कांग्रेस के 40 उम्मीदवारों को प्रचार के लिए बाकी दलों से 5 दिन कम समय मिले. यह आखिरी वक्त था, जब हर दल के उम्मीदवार पूरी ताकत से प्रचार में लगते हैं.
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च को दोपहर 3 बजे समाप्त हो गई है. सबसे अहम बात तो यह है कि ईद की छुट्टी के कारण अंतिम सूची में शामिल उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने की तैयारी के लिए केवल 2 दिन का समय मिला.
केरल हाईकोर्ट के वकील ए. जयशंकर ने इंडिया टुडे को बताया, “कांग्रेस नेतृत्व ने उम्मीदवारों की सूची जारी करने में देरी करके खुद को ही नुकसान पहुंचाया है.” उन्होंने कहा, "कांग्रेस की ओर से स्पष्टीकरण चाहे जो भी हो, लेकिन यह सच्चाई है कि पार्टी उम्मीदवारों का चयन करने में जिम्मेदारी से काम करने में विफल रही. यह खुद को धोखा देने जैसा था.”
उनके मुताबिक, कांग्रेस ने उम्मीदवारों का चयन करते समय राजनीतिक वास्तविकताओं का आकलन नहीं किया. जयशंकर ने कहा कि वे मीडिया के उस प्रचार से बहक गए जिसमें पार्टी को विजेता के रूप में पेश किया गया था. पलक्कड़ के वरिष्ठ पत्रकार पीके सुरेंद्रन ने बताया, "कांग्रेस नेतृत्व में कलह और उम्मीदवारों को लेकर चल रही खींचतान ने LDF को शुरुआती बढ़त दिलाई क्योंकि LDF पहले चुनाव प्रचार शुरू कर सकी."
कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची को लेकर झूठी खबरें फैलाने के लिए मीडिया को दोषी ठहराया है. विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने CPIM के जरिए प्रायोजित कांग्रेस पार्टी के खिलाफ फर्जी खबरें चलाईं. यह गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता है. जब LDF ने सिर्फ चार निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों का फैसला किया था, तब ही हम उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने का अपना काम पूरा कर चुके थे.”
अंतिम सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में और भी ज्यादा कार्यकर्ताओं में नाराजगी और विरोध देखने को मिले. उदाहरण के लिए, पेरुम्बावूर के पूर्व विधायक एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली, जिन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिला है. उन्होंने पहले तो बगावत की, लेकिन वरिष्ठ पार्टी नेता ए.के. एंटनी से बातचीत के बाद उन्होंने सुलह कर ली. इसके बाद एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली ने कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार शुरू कर दिया. हालांकि, पुनालुर और अंबलपुझा में पार्टी उम्मीदवारों को लेकर विद्रोह की आशंका बनी हुई है.\
इसके अलावा, पूर्व CPIM मंत्री और चार बार के विधायक जी. सुधाकरन, पूर्व विधायक और केरल पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष पी.के. शशि, CPIM कन्नूर जिला सचिवालय के सदस्य (तलईपरम्बा से) टी.के. गोविंदन और (पय्यानूर से) वी. कुन्हीकृष्णन ने वामपंथी पार्टी छोड़ दी है. इन नेताओं ने कांग्रेस के समर्थन से पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है. हालांकि, इनके लिए एक मुश्किल यह है कि कांग्रेस के स्थानीय नेता पूर्व CPIM नेताओं के खिलाफ बागी के रूप में चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं.
जिन दिग्गज नेताओं को टिकट नहीं मिला, उनमें PCC उपाध्यक्ष जोसेफ वझक्कन, ओमन चांडी की बड़ी बेटी मारिया ओमन, कोच्चि से दीप्ति मैरी वर्गीस, आटिंगल से लोकसभा सदस्य और UDF संयोजक अडूर प्रकाश और पूर्व PCC अध्यक्ष और कन्नूर से लोकसभा सदस्य के. सुधाकरन शामिल हैं. हालांकि, कन्नूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के उनके अनुरोध को अस्वीकार किए जाने के बाद सुधाकरन ने ज्यादा विरोध नहीं किया है. उन्होंने कांग्रेस हाई कमांड के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
अब मतगणना के लिए केवल 15 दिन बचे हैं. ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे को सत्तारूढ़ वाम मोर्चे को हराने के लिए दिन-रात मेहनत करनी होगी.

