पिछले साल सितंबर में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में कर्नाटक मंत्रिमंडल ने आगामी सभी स्थानीय निकाय चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी. कर्नाटक सरकार का यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों (EVM) के इस्तेमाल से पहले चुनाव कराने की पुरानी प्रक्रिया की ओर वापसी का संकेत था.
23 मार्च को कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के विरोध के बावजूद, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज अधिनियम, 1993 में संशोधन पेश किया. सरकार के इस बिल के पेश करने का मुख्य मकसद यह है कि स्थानीय निकाय चुनाव में बैलेट पेपर को फिर से लागू किया जा सके.
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री प्रियांक एम. खड़गे ने मतदान प्रणाली में संशोधन पर बोलते हुए कहा कि इसमें मतपत्र और मतपेटियों की परिभाषाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि नए संशोधन कानून से EVM का जिक्र हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को संरक्षित करने के हित में उठाया गया है क्योंकि EVM में 'विश्वास की कमी' है.
महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में पिछले चुनावों में मतदान फीसद में 'अस्पष्ट' वृद्धि के उदाहरण देते हुए खड़गे ने कहा कि अब से राज्य में तालुक और जिला पंचायत चुनावों के लिए मतपत्र यानी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा.
कर्नाटक में ग्राम पंचायत के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाते हैं, क्योंकि ये चुनाव पार्टी चिह्नों पर नहीं लड़े जाते, जबकि अन्य स्थानीय निकाय चुनाव EVM के माध्यम से होते रहे हैं.
सरकार के इस फैसले पर विपक्षी की ओर से प्रतिक्रिया तुरंत आई. विधानसभा में विपक्ष के नेता और BJP के आर. अशोक ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि EVM की शुरुआत राजीव गांधी ने ही 1980 के दशक में की थी. उन्होंने आगे कहा, “कर्नाटक देश का प्रौद्योगिकी में अग्रणी राज्य है. क्या आईटी मंत्री हमें वापस पाषाण युग में ले जाना चाहते हैं?” दरअसल, प्रियांक खड़गे आईटी विभाग का भी जिम्मा संभालते हैं.
आर. अशोक ने कांग्रेस को यह याद दिलाया कि 2023 के विधानसभा चुनाव वे EVM के माध्यम से ही जीते थे और अब बैलेट पेपर की ओर जाना बूथ कैप्चरिंग के पुराने जमाने में लौटने जैसा होगा.
कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक 2026 पर विधानसभा और विधान परिषद में जमकर बहस हुई. विपक्ष ने कांग्रेस पर चुनाव हारने के लिए EVM पर दोष देने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि चुनावी मशीनों को नजरअंदाज करके कर्नाटक सरकार राज्य को विपरीत दिशा में ले जाना चाहती है.
इन तर्कों का खंडन करते हुए खड़गे ने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे जैसे देश चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है. उन्होंने पूछा, "क्या ये विकसित देश भी पाषाण युग में जी रहे हैं?" उन्होंने यह भी बताया कि तकनीकी दिग्गज एलन मस्क ने 2024 में सुझाव दिया था कि EVM मशीनों के हैक होने का खतरा है.
खड़गे ने 25 मार्च को विधान परिषद में कहा कि कर्नाटक की ओर से तकनीकी विशेषज्ञों के साथ EVM पर एक एथिकल हैकथॉन आयोजित करने की उनकी इच्छा को लेकर भारत निर्वाचन आयोग को लिखे गए उनके पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला.
उन्होंने आगे कहा, "हां, हमें आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन हम इसे अकेले नहीं कर सकते. हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है." विधेयक पर मतदान के दौरान विपक्ष ने दोनों सदनों से वॉकआउट किया. कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक 2026 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने, मतपत्रों की गोपनीयता सुनिश्चित करने और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने वाली चुनावी प्रक्रियाओं को मजबूत करने की आवश्यकता का जिक्र किया गया है.
इस विधेयक में राज्य चुनाव आयोग को मतदाता सूची में संशोधन, बदलाव का अधिकार भी दिया गया है. इससे पहले, अधिनियम के तहत जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों के लिए कर्नाटक विधानसभा की मतदाता सूची को अपनाने की अनुमति थी.
यह कदम राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी के जरिए मतदाता सूचियों में पारदर्शिता के लिए चलाए गए अभियान के बाद उठाया गया है. राहुल गांधी ने सितंबर 2025 में कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 2023 में कांग्रेस समर्थकों को निशाना बनाकर मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से हटाने के कथित प्रयासों का खुलासा किया था.
कर्नाटक सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया था. यह मामला तब सामने आया जब एक बूथ अधिकारी ने अपने रिश्तेदार का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए एक आवेदन पत्र देखा. जांच दल ने हाल ही में इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है.
खड़गे ने बताया कि आलंद में 2023 के चुनाव से पहले मतदाताओं के नाम हटाने के लिए प्राप्त 6,018 आवेदनों में से केवल 24 ही वास्तविक थे. खड़गे ने कहा, "वोट चोरी और EVM में हेराफेरी अलग-अलग चीजें हैं." उन्होंने आगे कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता लाना है.

