करीब एक दशक पहले तक उत्तर प्रदेश में यदि किसी छात्र से कानपुर विश्वविद्यालय यानी छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) का नाम पूछा जाता था तो सबसे पहले नकल, बिगड़ी हुई परीक्षा प्रणाली और परिणामों में महीनों की देरी की बात होती थी. प्रशासनिक जटिलताएं भी इसकी पहचान बन चुकी थीं.
विश्वविद्यालय का नेटवर्क भले ही बड़ा था लेकिन उसकी पहचान गुणवत्ता से ज्यादा कमजोर परीक्षा व्यवस्था और सुस्त प्रशासन के कारण थी. हर परीक्षा सत्र में पेपर लीक, नकल, मूल्यांकन में देरी और छात्रों की शिकायतें सुर्खियां बनती थीं. लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच यह धारणा बन गई थी कि इस विश्वविद्यालय से समय पर परीक्षा और परिणाम की उम्मीद करना मुश्किल है.
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस विश्वविद्यालय की कहानी पूरी तरह बदल गई. जिस संस्थान की पहचान कभी समस्याओं से होती थी, वही आज उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में उत्कृष्टता का प्रतीक बन गया है. इस बदलाव की सबसे बड़ी पुष्टि 23 जून को जारी टाइम्स हायर एजूकेशन (THE) सस्टेनिबिलिटी इंपैक्ट रैंकिंग 2026 से हुई जिसमें CSJMU ने उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में पहला स्थान हासिल किया.
यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं है बल्कि उस व्यापक संस्थागत परिवर्तन की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति है जो पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय के भीतर हुआ. यह रैंकिंग संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के आधार पर दुनिया भर के विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन करती है और शिक्षण, शोध, प्रशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सतत विकास के मानकों को परखती है.
यह परिवर्तन अचानक नहीं आया. इसके पीछे लगातार चलने वाले प्रशासनिक सुधार, तकनीक आधारित व्यवस्था, नई शिक्षा नीति के अनुरूप अकादमिक बदलाव, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की रणनीति तथा छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण रहा. इन सभी प्रयासों की अगुवाई कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की, जिन्होंने विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया. उनका स्पष्ट मानना रहा कि किसी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा केवल भवनों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसकी कार्यसंस्कृति, पारदर्शिता और छात्रों के अनुभव से तय होती है. यही सोच इस परिवर्तन यात्रा की आधारशिला बनी.
परीक्षा और प्रशासन में शुरू हुई असली क्रांति
किसी भी विश्वविद्यालय में सुधार की शुरुआत सबसे कठिन क्षेत्र से होती है. CSJMU के लिए वह क्षेत्र था परीक्षा प्रणाली. वर्षों से परिणामों में देरी, मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक ढिलाई विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी कमजोरी बन चुके थे. प्रो. विनय कुमार पाठक ने कुलपति बनने के बाद सबसे पहले इसी व्यवस्था को बदलने का फैसला किया. विश्वविद्यालय ने 'एग्जामिनेशन मैनेजमेंट सिस्टम’ यानी EMS लागू किया और प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर मूल्यांकन और परिणाम घोषित होने तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया.
उत्तर पुस्तिकाओं में मास्किंग सिस्टम लागू किया गया ताकि परीक्षक को परीक्षार्थी की पहचान न पता चल सके. इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता बढ़ी. इतना ही नहीं, उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी छात्रों को ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक जवाबदेह बन गई. सबसे बड़ा बदलाव परिणामों में दिखाई दिया. जहां पहले परीक्षा परिणाम आने में कई महीने लग जाते थे, वहीं अब औसतन 13 दिनों के भीतर परिणाम घोषित होने लगे. NAAC की पीयर टीम ने इसे विश्वविद्यालय की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं में शामिल किया. मूल्यांकन संबंधी शिकायतों का प्रतिशत घटकर मात्र 0.53 प्रतिशत रह गया, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि छात्रों का विश्वास किस तरह वापस लौटा.
इसी के साथ विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक ढांचे को भी पूरी तरह बदलना शुरू किया. एडमिशन, मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, ट्रांसक्रिप्ट, दस्तावेज सत्यापन और 40 से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन और फेसलेस बना दिया गया. SAMARTH ERP, Moodle LMS और 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' यानी ABC जैसे प्लेटफॉर्म लागू किए गए. पांच लाख से अधिक ABC ID तैयार की गईं और लाखों अकादेमिक क्रेडिट का डिजिटलीकरण हुआ. इससे छात्रों की विश्वविद्यालय कार्यालयों पर निर्भरता कम हुई और प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेज, पारदर्शी तथा जवाबदेह बनीं.
प्रो. पाठक लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि डिजिटल गवर्नेंस का उद्देश्य केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है. यही कारण है कि विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति धीरे-धीरे फाइलों से निकलकर डेटा आधारित निर्णय और डिजिटल जवाबदेही की ओर बढ़ी.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शोध ने बदला अकादेमिक चरित्र
प्रशासनिक सुधारों के बाद विश्वविद्यालय ने शिक्षा की गुणवत्ता को अपनी अगली प्राथमिकता बनाया. वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 6,500 छात्र और 92 शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित हो रहे थे. पांच वर्षों के भीतर यह संख्या बढ़कर 15,000 से अधिक छात्रों और 170 से ज्यादा पाठ्यक्रमों तक पहुंच गई. यह वृद्धि केवल संख्या की नहीं थी बल्कि विश्वविद्यालय के प्रति बढ़ते भरोसे की भी थी.
नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप विश्वविद्यालय ने बहुविषयक शिक्षा, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, कौशल आधारित पाठ्यक्रम और उद्योगोन्मुख शिक्षण को अपनाया. कानून, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, भारतीय ज्ञान परंपरा और ललित कला जैसे पारंपरिक विषयों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, डिफेंस टेक्नोलॉजी, फूड साइंस और एग्री-बिजनेस जैसे आधुनिक विषयों में नए कार्यक्रम शुरू किए गए.
प्रो. विनय कुमार पाठक कहते हैं कि भविष्य का विश्वविद्यालय वही होगा जो भविष्य की तकनीकों को समय रहते अपनाए. इसी सोच से 'कैंपस एडवांस्डमेंट मिशन फॉर आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (CAM-AI)’ शुरू किया गया. AI आधारित एडमिशन असिस्टेंट 'नारद’, AI लैब, AI आधारित शोध परियोजनाएं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में AI का उपयोग इस सोच का परिणाम हैं. CSJMU उन चुनिंदा राज्य विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया, जिन्होंने AI को संस्थागत स्तर पर अपनाया.
शोध के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने नई पहचान बनाई. वर्ष 2021 में लगभग 82 शोध प्रकाशनों से बढ़कर 2025 तक यह संख्या 390 तक पहुंच गई. विश्वविद्यालय की 'रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट सेल' को मजबूत किया गया और ANRF, ICSSR, DBT जैसी एजेंसियों से रिसर्च प्रोजेक्ट प्राप्त हुए. इसके साथ ही रिसर्च को प्रयोगशाला से उद्योगों और आखिर में समाज तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई.
स्टार्टअप, उद्योग साझेदारी और वैश्विक सहयोग से अंतरराष्ट्रीय पहचान
उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, “विश्वविद्यालय प्रशासन ने महसूस किया कि केवल डिग्री देने से उच्च शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. इसलिए 'इनोवेशन फाउंडेशन’ की स्थापना की गई, जहां छात्रों और शोधार्थियों को अपने विचारों को स्टार्टअप में बदलने का अवसर मिला. मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन, निवेशकों से संपर्क और प्रोटोटाइप विकास जैसी सुविधाओं ने नवाचार को संस्थागत रूप दिया. आज विश्वविद्यालय के इनोवेशन इकोसिस्टम के अंतर्गत 65 से अधिक स्टार्टअप और 22 प्री-इन्क्यूबेटेड वेंचर्स काम कर रहे हैं. इनका संयुक्त कारोबार लगभग 90 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है. AICTE IDEA Lab, Robotics Lab और Drone Innovation Lab जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं छात्रों को वास्तविक तकनीकी समाधान विकसित करने का अवसर दे रही हैं.
इसके समानांतर विश्वविद्यालय ने उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी भी बढ़ाई. IIT कानपुर, DRDO, भारतीय सेना, FinX और कई औद्योगिक संगठनों के साथ सहयोग स्थापित किया गया. अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड, ताइवान, इंडोनेशिया, भूटान और अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के साथ हुए समझौतों ने संयुक्त शोध, स्टूडेंट एक्सचेंज और वैश्विक अवसरों के नए रास्ते खोले.
इन्हीं सुधारों का असर राष्ट्रीय और वैश्विक रैंकिंग में दिखाई दिया. विश्वविद्यालय को NAAC का A++ ग्रेड मिला. क्यूएस एशिया रैंकिंग, क्यूएस सस्टेनिबिलिटी रैंकिंग, दि सस्टेनिबिलिटी इंपैक्ट रैंकिंग, दि इंटरडिसिप्लिनरी साइंस रैंकिंग के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय मूल्यांकन में लगातार बेहतर प्रदर्शन हुआ. यह साबित करता है कि विश्वविद्यालय का परिवर्तन केवल आंतरिक दावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्र एजेंसियों ने भी उसे स्वीकार किया.
'स्टूडेंट फर्स्ट' विजन बना सफलता की सबसे बड़ी वजह
प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने विकास को केवल भवन, बजट और रैंकिंग तक सीमित नहीं रखा. उनकी रणनीति का केंद्र हमेशा छात्र रहा. यही कारण है कि विश्वविद्यालय ने प्लेसमेंट, खेल, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी उतनी ही प्राथमिकता दी, जितनी अकादेमिक उत्कृष्टता को. विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में 4,150 से अधिक जॉब ऑफर मिले, 1,020 से अधिक विद्यार्थियों का कैंपस प्लेसमेंट हुआ और प्लेसमेंट प्रतिशत लगभग 74 प्रतिशत तक पहुंच गया. उद्योगों के साथ साझेदारी, करियर काउंसलिंग और कौशल विकास कार्यक्रमों ने छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाई.
खेल ढांचों को आधुनिक बनाया गया. अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला हॉकी टर्फ, FIBA मानक बास्केटबॉल कोर्ट, फ्लडलाइट क्रिकेट स्टेडियम और अन्य खेल सुविधाएं विकसित की गईं. योग, सेंटर फॉर वैलबीइंग, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग, भावनात्मक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम और महिला स्वास्थ्य कार्यक्रमों ने विश्वविद्यालय को छात्र कल्याण के क्षेत्र में अलग पहचान दी.
विश्वविद्यालय ने NSS, NCC, पर्यावरण संरक्षण, गांवों में विस्तार गतिविधियों और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को समाज से भी जोड़ा. यह संदेश दिया गया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है. यही कारण है कि आज CSJMU उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है और उसकी परिवर्तन यात्रा देश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बनती जा रही है.

