scorecardresearch

चारा घोटाले की तर्ज पर झारखंड में कैसे हुई करोड़ों रुपए की हेराफेरी?

झारखंड के खजाना घोटाले में 1990 के चारा घोटाले की झलक दिखाई देती है. हालांकि, यह धोखाधड़ी पुराने कागजी तरीके से नहीं, बल्कि डिजिटल सिस्टम के अंदर ही की गई है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 30 अप्रैल , 2026

झारखंड में 1990 के बिहार चारा घोटाले के बाद अब उसी तर्ज पर एक और बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है. इसके बाद पूरे राज्य में ट्रेजरी की जांच की जा रही है.

इस जांच में सरकारी खजानों से 33 करोड़ से 40 करोड़ रुपए तक की फर्जी सैलरी निकासी का खुलासा हुआ है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, घोटाले की यह रकम भी बढ़ने का अंदेशा है.

इस घोटाले की खास बात यह है कि इसे राज्य की अपनी डिजिटल वित्तीय व्यवस्था के अंदर से ही अंजाम दिया गया. आरोप है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने जे-कुबेर पोर्टल का गलत इस्तेमाल कर कई सालों तक सरकारी पैसे की हेराफेरी की. यह पोर्टल सरकारी कर्मचारियों की सैलरी भुगतान के लिए इस्तेमाल होता है. आरोप है कि कर्मचारियों ने इसी पोर्टल का दुरुपयोग करके सरकारी पैसे को हड़प लिया.

झारखंड में होने वाले इस घोटाले में क्या हुआ?

जांच में सामने आया कि कुछ अधिकारियों ने जे-कुबेर पोर्टल सिस्टम में गड़बड़ी करके फर्जी सैलरी निकाली. उन्होंने गलत तरीके से पैसे निकासी के लिए ये तरीके अपनाए हैं-

  • कर्मचारियों का नाम, आईडी, बैंक खाता और जन्मतिथि बदल दी.
  • जो कर्मचारी पहले ही रिटायर हो चुके थे, उनकी रिटायरमेंट डेट बदलकर उन्हें अभी भी नौकरी पर दिखाया.
  • एक ही व्यक्ति की सैलरी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई या एक नाम पर कई बार एंट्री बना दी.
  • घोटाले के पैसे को अपने या किसी सगे-संबंधी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया.

घोटाले को किस तरह से अंजाम दिया गया?

कुछ मामलों में सैलरी को बहुत बढ़ा दिया गया. उदाहरण के लिए, ₹43,000 की सैलरी को ₹4 लाख 30 हजार कर दिया गया और पैसा खजाने से निकाल लिया गया. यह पूरी तरह डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर किया गया घोटाला था. अभी भी जांच चल रही है, इसलिए घोटाले की रकम बढ़ती जा रही है. इस घोटाले से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें:

  • सिर्फ हजारीबाग में ₹27 करोड़ का घोटाला सामने आया.
  • बोकारो में ₹4 करोड़ से ज्यादा का घोटाला पाया गया.
  • पूरे झारखंड में कुल मिलाकर ₹33 करोड़ से ₹150 करोड़ तक का घोटाला होने का अनुमान है.

बोकारो के एक मामले में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है कि 2016 में रिटायर हो चुके एक पुलिस वाले के नाम पर 63 फर्जी लेन-देन करके नवंबर 2023 से मार्च 2026 तक ₹4.29 करोड़ रुपए निकाल लिए गए.

इसके अलावा, 600 से अधिक सरकारी कर्मचारी, जिनमें कांस्टेबल से लेकर DSP रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं, इस घोटाले में शामिल होने या उससे पैसे लेने के आरोप में जांच के घेरे में हैं.

घोटाले में किस स्तर के अधिकारी शामिल हैं?

जांच में जो पैटर्न सामने आ रहा है, उससे साफ लगता है कि यह घोटाला अंदर के लोगों की मिलीभगत से हुआ है. जांच के दायरे में आने वाले अधिकारियों में ये लोग शामिल हैं:

  • पुलिसकर्मी (कांस्टेबल से लेकर अकाउंट्स स्टाफ तक)
  • खजाना (ट्रेजरी) और अकाउंट्स विभाग के अधिकारी
  • ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO)
  • वरिष्ठ निगरानी अधिकारियों की भी इस मामले में संभावित तौर पर संलिप्तता जाहिर की जा रही है.

एक मुख्य आरोपी होम गार्ड कांस्टेबल शंभू कुमार पर आरोप है कि उसने पिछले दस साल से ज्यादा समय तक सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया. जांचकर्ताओं का कहना है कि शंभू कुमार और उसके साथियों ने घोटाले के पैसे से गया और हजारीबाग में कई जगहों पर जमीनें खरीदी, इमारतें बनवाईं और गाड़ियां खरीदीं.

यह कोई बाहरी साइबर हमला नहीं है. यह एक आंतरिक रूप से समर्थित धोखाधड़ी है, जिसमें भुगतान को सत्यापित करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति खुद इस भ्रष्टाचार का हिस्सा हैं.

घोटाले की शुरुआत कब और कहां?

ऐसा जाहिर होता है कि यह घोटाला लंबे समय से बेरोकटोक चला आ रहा है. इस घोटाले की अनुमानित अवधि करीब 8 से 15 वर्ष यानी लगभग 2011-2026 तक है. जे-कुबेर पोर्टल के लॉन्च के बाद इसमें और ज्यादा वृद्धि हुई.

प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल के जरिए किए गए निरीक्षणों के बाद अप्रैल 2026 की शुरुआत में इसका खुलासा हुआ. 9-10 अप्रैल, 2026 को हजारीबाग में गिरफ्तारियां हुईं और 15.41 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का पता चला. 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यव्यापी जांच के आदेश दिए. पिछले 15 से 26 वर्षों के वेतन रिकॉर्ड की ऑडिट जारी है.

इस घोटाले का केंद्र हजारीबाग (27-30 करोड़ रुपए) और बोकारो के कोषागार हैं. हालांकि, रांची (लगभग 3 करोड़ रुपए) में भी अनियमितताएं पाई गई हैं. पलामू, देवघर, रामगढ़ और जमशेदपुर में भी जांच जारी है. राज्य सरकार ने झारखंड के सभी 33 कोषागारों का व्यापक ऑडिट करने का आदेश दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक हो सकती है.

Advertisement
Advertisement