केंद्रीय चुनाव आयोग ने झारखंड में दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित कर दी है. इसके मुताबिक 18 जून को मतदान होना है. घोषणा के साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिख हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है.
पार्टी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास संख्या बल कम है. ऐसे में BJP अपना उम्मीदवार उतारने के बाद विधायकों को प्रभावित करने के लिए आर्थिक प्रलोभन, बाहरी दबाव या अन्य अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया कर सकती है.
JMM ने चुनाव आयोग से निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त माहौल में चुनाव कराने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है. पार्टी ने केंद्रीय एजेंसियों जैसे सीबीआई, ईडी, केंद्रीय सतर्कता आयोग, राज्य खुफिया निदेशालय और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी सतर्क रखने का आग्रह किया है. JMM का कहना है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
इधर BJP ने एक सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की बात कही है. हाल ही में हुई पार्टी की बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पार्टी और उसके सहयोगी दलों के पास कुल 24 वोट हैं और जीत के लिए अतिरिक्त 4 वोटों के समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी. पार्टी ने निर्णय लिया गया कि सभी विधायकों से राष्ट्रहित में समर्थन की अपील की जाएगी ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को और मजबूत किया जा सके. इसके साथ ही जेएलकेएम विधायक जयराम महतो, आजसू, जदयू और लोजपा (आर) के विधायकों एवं प्रदेश नेतृत्व से भी संपर्क साधने पर सहमति बनी.
प्रदेश BJP महामंत्री अमर बाउरी ने कहा कि पार्टी का ही कार्यकर्ता उम्मीदवार होगा, कोई बाहरी चेहरा नहीं उतारा जाएगा. उन्होंने JMM की अगुवाई वाले महागठबंधन पर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले ही उसे अपने विधायकों पर भरोसा नहीं रहा.
अमर बाउरी कहते हैं, "आज झारखंड में इंडिया गठबंधन का भारी अंतर्कलह किसी से छिपी नहीं है. हॉर्स ट्रेडिंग की शुरुआत करने वाले वही लोग हैं. जब उनके 56 विधायक एकजुट हैं तो क्या वे घोड़ा-बकरी हैं जो बिक जाएंगे. जहां तक हमारी पार्टी की बात है चुनाव लड़ना हमारा संवैधानिक अधिकार है. आज हमारे पास संख्याबल नहीं है. लेकिन अंतरात्मा की कोई चीज होती है. कोई तो होगा जो पीएम मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर मतदान करेगा और 28 जरूरी मत हम निश्चित रूप से ले आएंगे."
असल खेल, जिसकी संभावना बन बन रही है
JMM कांग्रेस की एक सीट पर दावेदारी पर पहले ही सवालिया निशान लगा चुका है. ऐसे में प्रथम वरीयता वाले 28 वोट के बाद JMM के पास 6 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जबकि इंडिया गठबंधन मिलकर वोट करे तो दोनों सीटें जीत सकता है, क्योंकि उसके पास कुल 56 वोट हैं. एक सीट न मिलने की स्थिति में अब कांग्रेस के 16 विधायकों पर निर्भर करता है कि वे JMM के दूसरे प्रत्याशी को वोट करें या फिर मतदान से बाहर रहें. ऐसे में BJP को जरूरी छह अतिरिक्त वोट के लिए दोनों ही दलों के विधायकों पर कड़ी नजर रहेगी. संभावना यह भी जताई जा रही है कि अगर JMM या कांग्रेस के विधायक BJP प्रत्याशी को वोट करते हैं तो बाद में उसे हॉर्स ट्रेडिंग बताकर इसका ठीकरा BJP पर फोड़ा जाए ताकि मैच फिक्स न लगे.
हालांकि किसी भी दल से संभावित प्रत्याशियों के बारे में कोई नाम पुख्ता तौर पर सामने नहीं आया है. JMM की तरफ से संभावना जताई जा रही है कि पहला कैंडिडेट सोरेन परिवार से ही होगा. इसमें हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजलि के नाम की चर्चा है. वे ओडिशा की निवासी हैं. इसके अलावा उनके परिवार में पत्नी कल्पना सोरेन और भाई बसंत सोरेन हैं और ये दोनो ही विधायक हैं. ऐसे में अगर परिवार से ही किसी को भेजा जाएगा तो अंजली सोरेन प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं.
कांग्रेस की अगर बात करें तो पूर्व राज्यसभा सांसद और कारोबारी धीरज साहू अपने गृह जिले लोहरदगा में स्टेडियम निर्माण के बहाने हेमंत सोरेन से लगातार मिल रहे हैं. कभी एयरपोर्ट तो कभी दिल्ली में हुई मुलाकातों के बारे में वे सोशल मीडिया के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से इसके राजनीतिक संकेत भी दे रहे हैं. इसके अलावा पूर्व राज्यसभा सांसद और कारोबारी परिमल नाथवानी के नाम की चर्चा भी जोरों पर है. परिमल नाथवानी के पास दोनों ही दलों, यानी BJP और JMM, या फिर वोट पक्का करने के बाद निर्दलीय उतरने का भी विकल्प है. ऐसे में दोनों ही नेताओं के उतरने पर किसी न किसी के पक्ष के विधायक 'अंतरात्मा की आवाज' पर वोट देंगे. ऐसी स्थिति में संभावित हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. धीरज साहू के पास भी दोनों (JMM या कांग्रेस) ही दलों से उतरने का विकल्प है.
हालांकि JMM या कांग्रेस ने BJP के विरोध में एकजुट होना चुना, जिसमें से किसी एक को कुर्बानी देनी होगी तो फिर खेल एकतरफा होगा. हालांकि इसकी संभावना फिलहाल बहुत कम दिखाई दे रही है क्योंकि इंडिया गठबंधन के दोनों दल फिलहाल झुकने को तैयार नहीं हैं. BJP को इसी टकराव में अपना फायदा दिख रहा है. फिलहाल सबकी नजर पक्ष और विपक्ष के संभावित प्रत्याशियों पर है. नाम घोषणा होने के बाद ऊंट के करवट का भी अंदाजा लगाना आसान होगा.

