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झारखंड के सबसे बड़े माओवादी एनकाउंटर की कहानी

इस मुठभेड़ में 1 करोड़ रुपए के इनाम वाला एक माओवादी भी शामिल था. इस मुठभेड़ के बाद झारखंड में सिर्फ 45 माओवादियों के सक्रिय होने की खबर है

सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों और नक्सलियों की मुठभेड़
सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों और नक्सलियों की मुठभेड़ (Photo: Satyajeet/ITG)
अपडेटेड 23 जनवरी , 2026

झारखंड पुलिस और CRPF के लिए 22 जनवरी का दिन बड़ी सफलता भरा रहा. दोनों ने मिलकर एक करोड़ रुपए के इनामी माओवादी अनल दा उर्फ पतिराम माझी को मुठभेड़ में मार गिराया. पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक झारखंड पुलिस और CRPF ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में सुबह 6 बजे अभियान शुरू किया. लगभग 7 घंटा चली मुठभेड़ में कुल 15 माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि पुलिस ने की है. झारखंड में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में माओवादी कभी नहीं मारे गए थे.  

सर्च अभियान खत्म होने के बाद देर शाम पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CRPF के आईजी साकेत सिंह ने बताया, “झारखंड पुलिस, CRPF और कोबरा बटालियन के लिए यह ऐतिहासिक पल है. हालांकि सर्च अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है.’’ एक करोड़ रुपए के एक और माओवादी और सेंट्रल कमेटी मेंबर मिसिर बेसरा के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया, “हमारी जानकारी के मुताबिक जिस इलाके में अभी मुठभेड़ हुई है, उसी के 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में वो है. उसके साथ 40 से 50 के लगभग माओवादी और हैं.’’  

वहीं आईजी अभियान माइकल राज एस ने कहा, “हम नक्सलियों से कहना चाहते हैं कि हमें उनके हर मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है. वह समय चला गया जब हमें उनकी जानकारी नहीं रहती थी. उसका नतीजा आप देख सकते हैं कि सूचना मिलने के बाद हम किस तरीके से ऑपरेट करते हैं. इसलिए हम अपील करते हैं कि जो बचे हुए हैं माओवादी हैं, वे आत्मसमर्पण कर दें.’’ 

पूरी कहानी, प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी 

नाम न छापने की शर्त पर एक प्रत्यक्षदर्शी (पुलिस और CRPF के दल में शामिल) ने बताया -  पुलिस और केंद्रीय बल के पास इन माओवादियों के सारंडा जंगल के (किरीबुरू थाना क्षेत्र) में होने की पुख्ता सूचना थी. कुल 15 से 20 लोगों का दस्ता था. खास बात ये रही कि जिस इलाके में मुठभेड़ हुई, वहां माओवादियों का पहले से कोई मूवमेंट नहीं था. यही वजह थी कि वे अपनी सुरक्षा में कोई IED बम नहीं लगा पाए थे. 

तीन दिन पहले यानी 19 जनवरी से ही हम धीरे-धीरे उस इलाके में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे थे. बुधवार 20 जनवरी को रात दो बजे हम वहां पहुंच गए जहां से माओवादियों के ठिकाने की दूरी मात्र 2 किलोमीटर रह गई थी. हम सभी अत्याधुनिक हथियार और निगरानी के लिए सभी जरूरी उपकरण लेकर चल रहे थे. हम उन्हें स्पष्ट देख पा रहे थे. हमने उन्हें खाना बनाने, खाने और आराम से सोने दिया. 

सुबह पांच बजे से हम उन पर हमला करने के लिए तैयार थे. ठीक 6.30 बजे पहली मुठभेड़ हुई, जिसमें तीन माओवादी मारे गए. वहां अफरा-तफरी मच गई. माओवादी दूसरी तरफ भागे लेकिन हमने वहां भी पहले से उन्हें घेर रखा था. कुल पांच राउंड मुठभेड़ हुई, जिसमें यूबीजीएल हैंड ग्रेनेड तक इस्तेमाल हुए. इसके बाद 15 माओवादियों को हमने ढेर कर दिया. 

हम उन्हें लंबे समय से ट्रैक कर रहे थे. माओवादी अगर राशन का सामान किसी से मंगवाते थे तो कहते थे अमुक जगह पर रख दो. लेकिन वे अगले आठ से दस दिनों तक उसे ले नहीं जाते थे. ऐसे में जो ट्रैकर आदि लगा होता था, उसकी बैटरी डाउन हो जाती थी. लेकिन हमें आखिरकार सफलता मिली. 

अब भी बचे हैं 45 सक्रिय माओवादी 

बीते महीने झारखंड पुलिस ने बताया था कि राज्य में सिर्फ 60 माओवादी रह गए हैं. इस आंकड़े के लिहाज से राज्य में अब सक्रिय रूप से 45 माओवादी बचे हैं. इससे पहले साल 2023 में एक करोड़ के इनामी माओवादी प्रशांत बोस की गिरफ्तारी हो चुकी है. वहीं बीते साल यानी 2025 में एक करोड़ रुपए इनामी दो माओवादी अनुज सोरेन और प्रयाग मांझी को मुठभेड़ में मारा जा चुका है. 

एक करोड़ के इनामी माओवादी अनल दा उर्फ तूफान का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश था. वो गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना इलाके के झरहाबाले गांव का रहने वाला था. उसके पिता का नाम टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी है. अनल दा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) यानी CPI (माओ) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था. उसे माओवादियों का रणनीतिकार माना जाता था, जो संगठन के लिए बड़ी योजनाएं बनाता था. वह 1987 से माओवादी के तौर पर एक्टिव था और लंबे समय से सारंडा और गिरिडीह के जंगलों में सक्रिय था. उस पर हत्या, IED ब्लास्ट, हथियार और लूट जैसे कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज थे. मारे गए कुल 15 माओवादियों में से 11 की पहचान हो गई है. बाकियों की पहचान की जा रही है.

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