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झारखंड में 10 हजार से ज्यादा रेप! क्या है BJP की 'क्राइम रिपोर्ट' की असलियत?

BJP ने झारखंड सरकार पर निशाना साधते हुए एक 'क्राइम रिपोर्ट’ जारी की है और दिलचस्प बात है कि इससे पहले सरकार में शामिल कांग्रेस भी कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा चुकी है

राष्ट्रीय महिला आयोग की 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक रांची में महिलाएं सबसे असुरक्षित हैं
अपडेटेड 3 अप्रैल , 2026

हजारीबाग जिले के बड़कागांव की पूर्व कांग्रेसी विधायक अंबा प्रसाद ने बीते दिनों झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और BJP के बीच चल रही 'दोस्ती' को 'एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर' का नाम दिया था. दिलचस्प बात ये है कि राज्य में हालात इसके ठीक उलट दिख रहे हैं. पहले तो कांग्रेस ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका को हटाने के राज्य सरकार के निर्णय का विरोध किया, जिस पर उसे BJP का साथ मिला.

इसके बाद बीते 31 मार्च को राज्य कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालात बहुत खराब हैं और पार्टी माइनिंग माफिया के खिलाफ सड़क पर उतरेगी. अब इस मुद्दे पर भी कांग्रेस को BJP का समर्थन मिला है. के. राजू के हमलावर होने के बाद एक कदम आगे बढ़ते हुए BJP ने बीते पांच साल का 'क्राइम रिपोर्ट कार्ड' ही जारी कर दिया.

पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने 1 अप्रैल को राज्य BJP मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 से जनवरी 2026 तक झारखंड में बलात्कार की 10,113 घटनाएं सामने आई हैं. उन्होंने कहा कि यह BJP नहीं, बल्कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और झारखंड पुलिस की वेबसाइट के आंकड़े खुद कह रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि में पूरे राज्य में अपहरण की 11,000 से ज्यादा और चोरी की 60,000 से ज्यादा वारदातें हुई हैं. इसके अलावा हत्या की 9,213 घटनाओं सहित कुल 2 लाख 80 हजार संज्ञेय अपराध दर्ज हो चुके हैं.

उन्होंने के. राजू के बयान को हथियार बनाते हुए कहा कि खुद कांग्रेस प्रभारी ने माना है कि मुख्यमंत्री के अंतर्गत आने वाले माइनिंग विभाग पर माफियाओं का कब्जा है. यानी सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि प्रदेश में विधि व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. प्रतुल शाहदेव ने कहा, "विधि व्यवस्था की यह दयनीय स्थिति इसलिए हुई है क्योंकि सरकार का फोकस इसे ठीक करने पर है ही नहीं. प्रदेश में माफिया बालू, कोयला और लोहे की चोरी का बड़ा खेल कर रहे हैं. यह सरकार के संरक्षण के बिना संभव नहीं लगता."

प्रतुल शाहदेव ने सितंबर 2025 में राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से जारी 'नारी रिपोर्ट-2025' का भी जिक्र किया. रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने दावा किया, "देश के 31 शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर हुए सर्वे में राजधानी रांची की महिलाएं सबसे असुरक्षित पाई गई हैं. रांची की 27 प्रतिशत महिलाएं छेड़खानी के कारण अपना घर बदलने को मजबूर होती हैं. लगभग 9 प्रतिशत महिलाएं अपने साथ हुए अपराध को छुपा लेती हैं. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि 85 प्रतिशत महिलाओं को प्रशासन पर भरोसा ही नहीं है. इससे साफ है कि झारखंड में महिलाएं पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही हैं."

BJP को एक बार फिर कांग्रेस के एक विधायक का साथ मिला. कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने अवैध बालू खनन और वसूली को लेकर गंभीर आरोप लगाए. बीते 2 अप्रैल को गोड्डा जिलाधिकारी को लिखे पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि पथरगामा क्षेत्र की गेरुआ नदी के कई घाटों पर पिछले छह महीनों से बड़े पैमाने पर अवैध बालू का उठाव हो रहा है. वहां प्रतिदिन करीब 150 ट्रकों से बालू निकाली जाती है और प्रत्येक ट्रक से लगभग 18,500 रुपए की वसूली की जाती है. इस हिसाब से रोजाना करीब 27,75,000 रुपए की अवैध उगाही हो रही है.

BJP-कांग्रेस के दावों में कितनी सचाई

के. राजू और प्रतुल शाहदेव के दावों को इस उदाहरण से समझिए. बीते 1 अप्रैल को राजधानी रांची के कोकर इलाके में तीन आदिवासी महिलाओं पर बाइक चोरी का शक जताते हुए उनके मुंह पर कालिख पोत दी गई. इसके बाद युवकों और महिलाओं के एक झुंड ने उन्हें पूरे मोहल्ले में घुमाया. आदिवासी संगठनों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने हंगामा किया और थाने का घेराव किया. इसके बाद पुलिस ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा.

इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वूमेन (ICRW) की साल 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट ‘पितृसत्ता, गरीबी और हिंसा: झारखंड में महिलाओं के खिलाफ हिंसा का बहुआयामी विश्लेषण’ के एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष “Culture of Silence” के मुताबिक, महिलाएं हिंसा के बावजूद मदद नहीं मांगतीं. भारत में केवल 14 प्रतिशत और झारखंड में लगभग 21 प्रतिशत महिलाएं ही हिंसा के मामलों में सहायता लेती हैं. इसका मुख्य कारण सामाजिक कलंक, डर और कमजोर सहायता प्रणाली है.

राज्य में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और तेज न्याय व्यवस्था के बदतर हालात का एक और पहलू देखिए. राज्य में बीते पांच सालों से महिला आयोग में न तो अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है और न ही किसी सदस्य की. जून 2020 से जनवरी 2026 तक आयोग में सुनवाई के लिए कुल 4,014 मामले लंबित हैं. यहां तक कि राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष का पद भी नवंबर 2025 से खाली पड़ा है.

कुछ ऐसे भी अपराध हो रहे हैं जो प्रत्यक्ष दिख रहे हैं, लेकिन संज्ञान में नहीं लिए जा रहे. बीते रामनवमी के दौरान केवल हजारीबाग जिले में शोभायात्रा में शस्त्र प्रदर्शन और करतबों के कारण छह लोगों की मौत हो गई, जबकि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन आयोजनों में 600 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

इस स्थिति पर प्रदेश BJP अध्यक्ष आदित्य साहू कहते हैं, "रामनवमी जैसे पावन पर्व पर पहले इस प्रकार की पत्थरबाजी और उपद्रव की घटनाएं सामान्य नहीं थीं, लेकिन पिछले 6 वर्षों में ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है. रामभक्तों की शांतिपूर्ण और अनुशासित परंपरा पर इस प्रकार का प्रहार स्वीकार्य नहीं है. सरकार को निष्पक्षता के साथ कार्य करते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए."

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