
चिराग पासवान की पार्टी लोजपा रामविलास की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक इस बार रांची में हुई. यहां पार्टी की बैठक होने से लोग हैरत में थे. क्यों - क्योंकि झारखंड में पार्टी का न कोई विधायक है, और न एमपी. लोजपा (आर) मूलतः बिहार की पार्टी है. हालिया लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है. हालांकि बिहार विधानसभा में पार्टी का एक भी विधायक नहीं है. मगर 2020 के विधानसभा चुनाव में लोजपा (आर) ने 134 सीटों पर चुनाव लड़ा था और ऐसा कहा जाता है कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की सीटें 71 से 43 तक लाने में इस पार्टी की बड़ी भूमिका रही.
बहरहाल, रांची में पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में चिराग को न सिर्फ पार्टी का दुबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, बल्कि पार्टी की तरफ से इस साल के अंत में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनावों में 28 सीटों पर दावेदारी भी पेश की गयी. लोजपा (आर) की तरफ से कहा गया कि पार्टी चाहती तो है एनडीए गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ना, पर अगर वहां गुंजाइश नहीं बनी तो पार्टी अकेले भी इस विधानसभा चुनाव में उतर सकती है. लोजपा (आर) पहले भी यहां चुनाव लड़ती रही है, मगर पार्टी की तरफ से इस तरह की दावेदारी पहली बार की जा रही है.
लोजपा (आर) की तरह बिहार की एक और पार्टी जदयू भी (जो एनडीए गठबंधन का हिस्सा है) झारखंड विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में है. हालांकि पार्टी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि कितने सीटों पर उसका दावा है. मगर कभी झारखंड में भाजपा के कद्दावर नेता रहे सरयू राय को जदयू में शामिल कर पार्टी ने इशारा कर दिया है कि वह इस बार के चुनाव में बड़ी दावेदारी पेश करेगी.

सरयू राय बचपन से ही आरएसएस से जुड़े थे. बाद में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजयुमो में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली. वे जनसंघ से भी जुड़े. जेपी की 'संपूर्ण क्रांति' में भागीदारी के दौरान उनकी नीतीश कुमार से मित्रता हुई. वे एकीकृत बिहार में भी विधायक रहे और झारखंड के अलग होने पर वे भाजपा की तरफ से झारखंड से विधायक चुने जाते रहे.
उन्होंने पार्टी से असहमति के बाद 2019 में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा और उन्हें हराया. राय झारखंड के कद्दावर नेताओं में से एक माने जाते हैं. नीतीश से मित्रता की वजह से वे फिलहाल जदयू में आए हैं और उनके कई समर्थक जदयू में शामिल हुए हैं.
जदयू भी झारखंड में चुनाव लड़ती रही है. राज्य की मूल निवासी आबादी, खास कर महतो समाज में वह अपना पैठ बनाने की कोशिश करती है. मगर कभी उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली. पार्टी के प्रवक्ता निहोरा यादव कहते हैं, "अगर समझौता हुआ तो पार्टी एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ेगी, नहीं तो अकेले भी हम चुनाव लड़ सकते हैं."
जहां तक बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का सवाल है, वह झारखंड में ज्यादा दम-खम से चुनाव लड़ती रही है. फिलहाल पार्टी का एक विधायक झारखंड विधानसभा में भी है. 2019 के चुनाव में राजद ने यूपीए के बैनर तले सात सीटों पर चुनाव लड़ा था. फिलहाल स्मृति ईरानी की जगह पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री बनने वाली अन्नपूर्णा देवी लंबे अरसे तक झारखंड में राजद का हिस्सा रहीं और वे कोडरमा से विधानसभा चुनाव जीतती रही हैं. फिलहाल वे पार्टी छोड़कर भाजपा में आ गई हैं और इस बार के लोकसभा चुनाव में कोडरमा सीट से जीती हैं.
राजद ने फिलहाल झारखंड की 22 सीटों पर दावेदारी की है, और इस चुनाव में कम से कम 12-14 सीटें जीतना चाहती है. मगर चूंकि राजद झारखंड में इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए वहां झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच सीट शेयरिंग होगी. राजद अकेले चुनाव शायद ही लड़े.
हालांकि बिहार में इंडिया गठबंधन का हिस्सा रही मुकेश सहनी की (विकासशील इंसान पार्टी) वीआईपी पार्टी भी झारखंड में चुनाव लड़ने की तैयारी में है. इंडिया टुडे से बातचीत में सहनी ने कहा था कि वे इंडिया गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे. मगर क्या 81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन वीआईपी पार्टी को सीटें दे पाएगी, यह देखने वाली बात होगी.
भाकपा-माले बिहार में इंडिया गठबंधन का हिस्सा रही है, मगर 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अकेले 14 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती. यह देखना है कि इस बार पार्टी वहां अकेले चुनाव लड़ती है या इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनती है. जहां तक एनडीए का सवाल है, 2019 में भाजपा ने वहां से अकेले 79 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इस बार झारखंड की पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) ने कंफर्म किया है कि वह एनडीए का हिस्सा होगी. अब जदयू और लोजपा जैसी पार्टियों को भाजपा एनडीए में शामिल करती है या नहीं, यह देखने की बात होगी.
झारखंड की राजनीति को लंबे समय तक कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्र कहते हैं, "कहने को तो बिहार की कई पार्टियां झारखंड में दावेदारी कर रही हैं. मगर झारखंड के लोगों के लिए सिर्फ राजद और माले ही ऐसी पार्टी है, जिसे यहां गंभीरता से लिया जा रहा है. राजद पिछले चुनाव में यूपीए का हिस्सा थी, इस बार इंडिया गठबंधन का हिस्सा रहेगी. माले ने पिछला चुनाव अकेले लड़ा था, इस बार वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा रहेगी, ऐसा लगता है. वीआईपी को शायद ही इंडिया गठबंधन में जगह मिले."
वे आगे बताते हैं,"जहां तक एनडीए का सवाल है, भाजपा के पास अपना बैगेज पहले से है. बाबूलाल मरांडी साथ आ गए हैं, चंपाई सोरेन साथ आ गए हैं. आजसू साथ लड़ेगी. ऐसे में वह किसी और पार्टी को शायद ही एनडीए में जगह दे. लोजपा को तो बिल्कुल जगह नहीं मिलेगी, ऐसा लगता है क्योंकि पार्टी का कोई ठोस आधार नहीं है. हां, जदयू ने सरयू राय को साथ लाकर जरूर पेंच फंसा दिया है. मगर सरयू राय की नजर जिस सीट पर है, वह लंबे अरसे से भाजपा की सीट रही है. क्या वह इस सीट को छोड़ेगी, ऐसा लगता नहीं है?"

