scorecardresearch

झारखंड : हेमंत सोरेन ने बीजेपी और उसके ‘घुसपैठिया’ नैरेटिव को कैसे किया चारों खाने चित?

झारखंड विधानसभा 2024 हेमंत सोरेन की अगुवाई में JMM गठबंधन ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है

हेमंत सोरेन
हेमंत सोरेन एक चुनावी रैली के दौरान
अपडेटेड 23 नवंबर , 2024

इस साल की शुरुआत में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार किया तो अचानक ही झारखंड में उनकी सरकार और पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे. लेकिन अब विधानसभा चुनाव के जो नतीजे आए हैं, उनके मुताबिक सोरेन इन सभी अनिश्चितताओं को धता बताते हुए सत्ता में जोरदार वापसी कर चुके हैं.     

JMM गठबंधन ने कुल 56 सीटें जीती हैं, जो कि बहुमत के आंकड़े 42 से 14 ज्यादा है. बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA 24 सीटें ही जीत पाया है. नतीजों से पता चलता है कि झारखंड के सभी प्रमुख क्षेत्रों - छोटा नागपुर, कोल्हान, कोयलांचल, पलामू और संथाल परगना में JMM-कांग्रेस गठबंधन आगे चल रहा है. 

2019 के विधानसभा चुनाव में, JMM-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (RJD) गठबंधन ने 47 सीटें जीती थीं. JMM ने अपने दम पर 30 सीटें जीतीं, जो 2014 में 19 थीं. बीजेपी 81 में से केवल 25 सीटें ही जीत सकी थी. 

इस बार के चुनाव कैंपेन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत बीजेपी ने सोरेन सरकार पर हमला करने के लिए बांग्लादेश से आए कथित "अवैध अप्रवासियों" का बार-बार हवाला दिया. बीजेपी ने चुनावी रैलियों में बार-बार कहा कि झारखंड की 'माटी, बेटी और रोटी' खतरे में है क्योंकि "घुसपैठिए" आदिवासियों से जल, ज़मीन और जंगल छीन रहे हैं.

हालांकि, JMM ने अपने अभियान को अपनी कल्याणकारी योजनाओं, खासकर मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना और आदिवासी अस्मिता के नैरेटिव पर केंद्रित किया. मैया सम्मान योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1000 रुपए प्रति महीने मिलता है. इस बात की काफी संभावना है कि JMM की जीत में महिला मतदाताओं की अहम भूमिका रहेगी. चुनाव आयोग के अनुसार, 81 सीटों में से 68 सीटों पर महिलाओं ने अधिक मतदान भी किया है.

इस चुनाव से पहले JMM के लिए स्थिति अच्छी नहीं रही, हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया गया और कई दलबदल हुए, जिनमें उनकी भाभी सीता सोरेन का बीजेपी में शामिल होना भी शामिल है. वे जामताड़ा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार इरफान अंसारी के सामने करीब 44 हजार वोटों से हार गई हैं. 

31 जनवरी को जब ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया, उससे पहले उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था. पार्टी के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन को राज्य की कमान सौंपी गई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में हेमंत को जमानत दे दी और उनकी मुख्यमंत्री पद पर फिर वापसी हो गई. इस बीच उनके चंपाई सोरेन से रिश्ते बिगड़ गए और इस आदिवासी नेता ने आखिरकार बीजेपी का दामन थाम लिया. वे सराईकेला से बीजेपी के उम्मीदवार थे और उन्होंने यहां से अपनी पूर्व पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ अच्छी जीत दर्ज की है.

बीजेपी ने आदिवासियों के बीच सहानुभूति बटोरने के मकसद से चंपाई सोरेन के मुद्दे को भी चुनावी कैंपेन में बखूबी उठाया था. बीजेपी ने इस हवाले से नैरेटिव तैयार किया कि कैसे JMM ने एक आदिवासी नेता का अपमान किया. दूसरी तरफ JMM ने मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी को बीजेपी द्वारा एक आदिवासी के उत्पीड़न के रूप में पेश किया और चुनाव हेमंत सोरने बनाम बीजेपी बना दिया. आखिर में यही नैरेटिव जीता.

Advertisement
Advertisement